'खूब विकास करो और उपलब्धियां हासिल करो' से प्रेरित भारत विकसित राष्ट्र बनने की राह पर : मोदी
पवनेश
- 09 Jul 2026, 10:42 PM
- Updated: 10:42 PM
मेलबर्न, नौ जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि ''खूब विकास करो, और उपलब्धियां हासिल करो'' की दृष्टि से प्रेरित भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने साथ ही कहा कि देश के बड़े सपनों एवं बड़ी आकांक्षाओं की बुनियाद उसके लोग हैं।
प्रवासी भारतीयों के कार्यक्रम 'मेलबर्न मीट्स मोदी' में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की उपस्थिति में मोदी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि शिक्षा, कौशल एवं नवोन्मेष के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी गहरी और मजबूत हो रही है।
प्रधानमंत्री ने खचाखच भरे स्टेडियम में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कहा, ''21वीं सदी का भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है। यह एक ऐसा भारत है जो 'खबू विकास करो, और उपलब्धियां हासिल करो' में यकीन करता है।''
उन्होंने कहा, ''हम 1.4 अरब लोगों का देश हैं जो उम्मीदों और आकांक्षाओं से भरा है; हम अति-उत्सुक और उत्साहित हैं। हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं, हमारा लक्ष्य जल्द से जल्द दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना है। क्योंकि हमारी प्रेरक शक्ति है - 'खूब विकास करो, और उपलब्धियां हासिल करो।''
मोदी ने कहा कि ''नागरिक देवो भव'' का मंत्र भारत में शासन का मार्गदर्शक सिद्धांत बन गया है।
उन्होंने कहा, ''भारत के बड़े सपनों और बड़ी आकांक्षाओं की नींव इसके लोग ... 'हम, भारत के लोग' हैं।''
उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां नागरिकों के कल्याण पर केंद्रित हैं।
मोदी ने भारत में हो रही तेज प्रगति के बारे में बात की, जो लगातार तेज विकास, नीतिगत सुधारों, डिजिटल क्रांति और अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे के विकास पर आधारित है।
उन्होंने कहा, ''आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5जी बाजार बन गया है। इसके अलावा, भारत तेज़ी से 'मेड इन इंडिया' 6जी प्रौद्योगिकी पर भी काम कर रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारतीय इस मंत्र में विश्वास करते हैं: 'खूब विकास करो, और उपलब्धियां हासिल करो'।''
प्रधानमंत्री ने कहा, ''भारत यहीं रुकना नहीं चाहता... आज भारत में चिप से लेकर जहाजों तक, हर चीज़ के लिए एक नया विनिर्माण तंत्र तैयार किया जा रहा है।''
उन्होंने रेखांकित किया कि भारत का नज़रिया सिर्फ़ अपनी तरक्की पर ध्यान देना नहीं, बल्कि अपने दोस्तों और साझेदारों के साथ मिलकर आगे बढ़ना है।
मोदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया ने भारत के रक्षा उपकरणों की क्षमता और विश्वसनीयता को देखा है।
उन्होंने दर्शकों की तालियों के बीच कहा, ''आपने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान एक झलक देखी होगी। धमाके आतंकवादियों के ठिकानों पर हो रहे थे और उनकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही थी।''
मोदी ने कहा कि भारत में 2,00,000 से ज़्यादा पंजीकृत 'स्टार्टअप' हैं और हर महीने 4,000 से ज़्यादा नए 'स्टार्टअप' पंजीकृत हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सैकड़ों 'स्टार्ट-अप' काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों को कुछ साल पहले ही निजी उद्यम के लिए खोला गया था और आज भारत का पहला निजी अंतरिक्ष 'स्टार्ट-अप' बहुत जल्द अपने रॉकेट से उपग्रह प्रक्षेपित करने वाला है।
उन्होंने कहा, ''आप सभी जानते हैं कि चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा। भारत के अलावा कोई भी देश ऐसा नहीं कर पाया है। लेकिन भारत इतने से ही संतुष्ट नहीं है। जैसा कि हम कहते हैं, 'और विकास करो, और उपलब्धियां हासिल करो।' ऐसे में अब भारत गगनयान भेजेगा और हम अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं।''
वेनेजुएला के हालिया भूकंप का ज़िक्र करते हुए मोदी ने कहा कि भारत ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया तथा जितनी जल्दी हो सका, उसने मदद भेजी।
तुर्किये और सीरिया में आए भूकंप तथा श्रीलंका में चक्रवात से हुई तबाही जैसे उदाहरण देते हुए मोदी ने कहा, ''हमने दूरी की परवाह नहीं की। भारत ने वेनेज़ुएला के दर्द को अपना दर्द समझा। जब भारत मदद करता है, तो वह पासपोर्ट नहीं देखता। वह पासपोर्ट का रंग भी नहीं देखता। इसीलिए दुनिया भारत पर इतना भरोसा करती है।''
अपने तीन देशों के दौरे के दूसरे चरण में बुधवार को ऑस्ट्रेलिया पहुंचे मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में यह उनकी तीसरी यात्रा है।
उन्होंने लोगों की तालियों और उत्साह के बीच कहा, ''यह हैट्रिक है। इससे पता चलता है कि भारत-ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते मज़बूत हुए हैं। इसमें सबसे अहम भूमिका मैंने नहीं, बल्कि आप सभी, प्रवासी भारतीयों ने निभाई है।''
मोदी ने कहा, ''जैसे दूध में चीनी घुलने से वह मीठा हो जाता है, वैसे ही हम भारतीय दुनिया में अपने प्यार का रस घोलते हैं।'' उन्होंने कहा, ''घर में इस्तेमाल होने वाला दूध भले ही ऑस्ट्रेलिया का हो, लेकिन चाय भारतीय तरीके से ही बनाई जाती है। दाल और सब्ज़ियां ऑस्ट्रेलिया की होती हैं, लेकिन उन्हें असली भारतीय मसालों का तड़का लगाया जाता है।''
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लगभग दस लाख लोग रहते हैं।
मोदी ने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों, जिसमें भारतीय समुदाय का कल्याण भी शामिल है, के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के लिए प्रधानमंत्री अल्बनीज़ का धन्यवाद किया।
पिछले दशक में द्विपक्षीय साझेदारी में हुई उल्लेखनीय प्रगति पर ज़ोर देते हुए, मोदी ने कहा कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं की एक-दूसरे की पूरक प्रकृति भारत और ऑस्ट्रेलिया को एक सुरक्षित, समृद्ध एवं मज़बूत साझेदारी बनाने में स्वाभाविक साझेदार बनाती है।
उन्होंने कहा, ''एक और क्षेत्र है जो हमारे देशों के बीच साझेदारी को मज़बूत करता है: खेल। खेलों की दुनिया में ऑस्ट्रेलिया अपने आप में एक ब्रांड है। हालांकि, भारत में भी खेलों का इकोसिस्टम बदल रहा है।'''
मोदी ने कहा कि भारत 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी करने के लिए तैयार है और 2036 ओलंपिक की मेज़बानी का भी दावेदार है। उन्होंने कहा, ''मुझे पूरा भरोसा है कि खेल के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया तथा भारत के बीच साझेदारी और बढ़ेगी।''
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