चेक बाउंस मामले: अदालत ने राजपाल यादव की दोषसिद्धि बरकरार रखी, तीन महीने जेल की सजा सुनाई
अविनाश
- 10 Jul 2026, 07:39 PM
- Updated: 07:39 PM
नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने अभिनेता राजपाल यादव को 'चेक बाउंस' मामलों में दोषी ठहराए जाने के फैसले को शुक्रवार को बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर करने में 1,894 दिन या पांच वर्ष से अधिक की ''असाधारण'' देरी को माफ करने से इनकार कर दिया। साथ ही उन्होंने यादव को सातों शिकायतों में शिकायतकर्ता को एक-एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने का निर्देश दिया।
हालांकि, न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अभिनेता द्वारा पहले ही अदा की जा चुकी लगभग दो करोड़ रुपये की राशि का समायोजन किया जाएगा। अदालत ने यादव को इस फैसले के खिलाफ अपीलीय अदालत का रुख करने के लिए दो महीने का समय भी दिया।
न्यायमूर्ति शर्मा ने 108 पृष्ठों के फैसले में कहा कि यादव शिकायतकर्ता मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को भुगतान करने संबंधी अदालत को दिए गए अपने आश्वासनों का बार-बार पालन करने में विफल रहे। उन्होंने कहा कि हालांकि अदालत ने मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान कराने के लिए गंभीर प्रयास किए, लेकिन अभिनेता ने अंततः कोई और भुगतान करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया।
अदालत ने फैसले में कहा, ''इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि इन याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के दिन याचिकाकर्ता संख्या-1 (यादव) ने इस अदालत के समक्ष कहा कि 'वह शिकायतकर्ता को कोई राशि देने के लिए तैयार नहीं है और पैसे लौटाने के बजाय पांच बार जेल जाना पसंद करेगा।''
अदालत ने कहा, ''यदि कोई पक्षकार अदालत को दिए गए अपने आश्वासनों को पूरा करने के बजाय कारावास का रास्ता चुनना चाहता है, तो यह पूरी तरह उसका निर्णय है। कानून कोई ऐसी पटकथा नहीं है जिसे किसी अभिनेता की इच्छा के अनुसार दोबारा लिखा जा सके और न ही उसकी रणनीति बदलने के साथ कानूनी स्थिति बदली जा सकती है, चाहे पक्षकार कोई भी हो।''
अदालत ने राजपाल यादव की परिवीक्षा पर रिहा किए जाने संबंधी याचिका खारिज कर दी और कहा कि सजा के संबंध में निचली अदालत के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है।
अदालत ने आदेश में कहा, ''याचिकाकर्ता संख्या-1 (दोषी संख्या-2) राजपाल नौरंग यादव को सातों शिकायत में से प्रत्येक में तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई जाती है तथा प्रत्येक मामले में 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। जुर्माने का भुगतान नहीं करने की स्थिति में उन्हें छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।''
अदालत ने कहा कि प्रत्येक मामले में जुर्माने की राशि में से 1.04 करोड़ रुपये शिकायतकर्ता को और 25,000 रुपये राज्य सरकार को दिए जाएंगे।
अदालत ने अभिनेता की पत्नी राधा राजपाल यादव को भी प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को लगभग 5.5 लाख रुपये जुर्माने के रूप में अदा करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि जुर्माने का भुगतान नहीं करने की स्थिति में उन्हें तीन महीने का साधारण कारावास भुगतना होगा।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2013 में यादव ने वर्ष 2010 में एक फिल्म के लिए उन्हें दी गई पांच करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के निपटान के लिए 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए थे, जो बाउंस हो गए।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2012 में दोनों पक्षों के बीच हुए एक समझौते के तहत यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज सहित लगभग 11 करोड़ रुपये लौटाने पर सहमति जताई थी।
अदालत ने यह फैसला राजपाल यादव और उनकी पत्नी द्वारा दायर उन पुनरीक्षण याचिकाओं पर दिया, जो दोनों ने वर्ष 2019 में एक सत्र अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले को चुनौती देते हुए दायर की थी। सत्र अदालत ने एक मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा अप्रैल 2018 में चेक बाउंस के मामलों में उन्हें दोषी ठहराए जाने के निर्णय को बरकरार रखा था।
मजिस्ट्रेट अदालत ने अभिनेता को छह महीने के कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में घटाकर तीन महीने कर दिया गया।
यादव ने पुनरीक्षण याचिकाएं दायर करने में पांच वर्ष से अधिक की देरी को यह कहते हुए उचित ठहराने की कोशिश की कि उनके पहले वकील ने उन्हें गलत कानूनी सलाह दी थी और उन्हें ''विश्वास'' था कि उनकी दोषसिद्धि को पहले ही चुनौती दी जा चुकी है।
इस दलील को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि यादव एक स्थापित अभिनेता हैं, जिनके पास पर्याप्त साधन और संसाधन हैं तथा पूरे मामले के दौरान उनका प्रतिनिधित्व बार के अनुभवी और प्रतिष्ठित वकीलों ने किया।
अदालत ने कहा, ''ऐसी परिस्थितियों में यह दलील स्वीकार नहीं की जा सकती कि याचिकाकर्ता पांच वर्ष से अधिक समय तक इस गलतफहमी में रहे कि उन्होंने अपनी दोषसिद्धि को भी चुनौती दे दी है, जबकि इस अवधि के दौरान वे विभिन्न अदालतों में कानूनी कार्यवाही में सक्रिय रूप से शामिल रहे और कई वकीलों की सेवाएं लेते रहे।''
अदालत ने कहा, ''देरी माफ किए जाने का अनुरोध करने वाले आवेदन खारिज किए जाते हैं। परिणामस्वरूप, पुनरीक्षण याचिकाएं भी खारिज की जाती हैं।''
जून 2024 में उच्च न्यायालय ने इस शर्त के साथ उनकी दोषसिद्धि पर अस्थायी रोक लगा दी थी कि वह दूसरे पक्ष के साथ सौहार्दपूर्ण समझौते की संभावना तलाशने के लिए ''ईमानदार और वास्तविक प्रयास'' करेंगे।
उस समय यादव के वकील ने कहा था कि यह फिल्म निर्माण के वित्तपोषण से जुड़ा एक वास्तविक लेनदेन था, लेकिन फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल रहने से यादव को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
हालांकि, दो फरवरी को अदालत ने यह कहते हुए यादव को चार फरवरी को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था कि उन्होंने राशि लौटाने के संबंध में अदालत को दिए गए अपने आश्वासनों का बार-बार उल्लंघन किया।
इसके बाद 16 फरवरी को अदालत ने उनकी सजा पर फिलहाल रोक लगा दी थी और शिकायतकर्ता के बैंक खाते में 1.5 करोड़ रुपये जमा कराने के बाद उन्हें जेल से रिहा करने की अनुमति दी थी।
भाषा अमित अविनाश
अविनाश
1007 1939 दिल्ली