पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण से 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचीः सरकार
रमण
- 10 Jul 2026, 10:01 PM
- Updated: 10:01 PM
नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) सरकार ने पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण यानी ईबीपी कार्यक्रम का शुक्रवार को बचाव करते हुए कहा कि इस योजना से न केवल चीनी उद्योग को मजबूती मिली है, बल्कि किसानों की आय बढ़ी है और 2014-15 से अब तक देश को 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
खाद्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव ने 'अनाज एथनॉल विनिर्माता संघ' (जीईएमए) के एक सम्मेलन में कहा कि एथनॉल अब कृषि अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है। इससे अतिरिक्त फसलों के लिए नए बाजार बने हैं और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 से 2026 के बीच एथनॉल आपूर्ति के जरिए 310 लाख टन से अधिक कच्चे तेल की जरूरत कम हुई है, जिससे 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई। इस दौरान लगभग 930 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी भी आई है।
श्रीवास्तव ने कहा कि गन्ना आधारित एथनॉल से शुरू हुए ईबीपी कार्यक्रम ने गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है और चीनी उद्योग को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाया है। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों का बकाया अब ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर है।
उन्होंने बताया कि 2014-15 से 2020-21 के बीच केंद्र ने चीनी मिलों को करीब 14,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी, लेकिन 2021-22 के बाद से अतिरिक्त चीनी को एथनॉल उत्पादन में उपयोग किए जाने के कारण निर्यात सब्सिडी की जरूरत ही नहीं पड़ी।
श्रीवास्तव ने कहा कि एथनॉल उत्पादन में मक्का प्रमुख कच्चा माल बनकर उभरा है, जो 2024-25 में तेल विपणन कंपनियों को आपूर्ति का 47 प्रतिशत रहा और मौजूदा आपूर्ति वर्ष में अब तक 36 प्रतिशत योगदान दे रहा है। इससे मक्का किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि देश में एथनॉल उत्पादन क्षमता 2013-14 के लगभग 21 करोड़ लीटर से बढ़कर अब करीब 2,000 करोड़ लीटर हो गई है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' के तहत चावल में टूटे दानों की सीमा 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने के हालिया फैसले से बेहतर गुणवत्ता का चावल मिलेगा और अतिरिक्त टूटे चावल का उपयोग एथनॉल उत्पादन जैसे औद्योगिक कार्यों में किया जा सकेगा।
श्रीवास्तव ने कहा कि एथनॉल के विविध मिश्रणों वाले पेट्रोल से चलने में सक्षम फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा और ई20 से ई100 तक के ईंधन के उपयोग की योजना से उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेगा और एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम को और गति मिलेगी।
इस बीच, जीईएमए के अध्यक्ष सी के जैन ने कहा कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम व्यापक शोध के बाद लागू किया गया है और यह जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नहीं है। उन्होंने कहा कि ई20 मिश्रण पर 2014 से 2018 के बीच चार वर्षों तक अध्ययन किया गया, जिसमें वाहनों को लंबी दूरी तक चलाकर परीक्षण किया गया।
जैन ने कहा कि ई20 पेट्रोल को सभी इंजनों के लिए सुरक्षित पाया गया और इसे तकनीकी अध्ययन, पायलट परियोजनाओं एवं नीतिगत चर्चाओं के बाद लागू किया गया।
उन्होंने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के खराब होने के संबंध में आ रही शिकायतों पर कहा कि इस विषय पर चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि भ्रांतियों पर।
जैन ने कहा कि फिलहाल क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती उत्पादन न होकर धारणा है और ई20 के आगे की नीति स्पष्ट करने की जरूरत है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण
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