मैं जल्द ही दिल्ली जाऊंगा: मंत्रिमंडल विस्तार पर मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा
संतोष
- 13 Jul 2026, 06:17 PM
- Updated: 06:17 PM
बेंगलुरु, 13 जुलाई (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस आलाकमान से समय मिलने के बाद वह दिल्ली जाएंगे। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उनकी तरफ से कोई देरी नहीं हो रही है।
शिवकुमार ने कहा कि विधानसभा का सत्र बुलाना उनकी प्राथमिकता है और पार्टी नेतृत्व से तारीख मिलने के बाद वह राष्ट्रीय राजधानी का दौरा करेंगे।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा, "देखिए, मैं छह तारीख (6 अगस्त) को विधानसभा का सत्र आहूत कर रहा हूं, जो मेरी प्राथमिकता है।"
उन्होंने कहा, "मेरी तरफ से (मंत्रिमंडल विस्तार में) कोई देरी नहीं है। जब भी वे (पार्टी आलाकमान) मुझे समय देंगे, मैं चला जाऊंगा। वे मुझे अगले तीन या चार दिनों में कोई तारीख बता देंगे। जैसे ही वे तारीख बताएंगे, मैं जाकर वापस आ जाऊंगा।"
राज्य में अभी मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री हैं, जबकि कर्नाटक में मंत्रियों की तय संख्या 34 है। फिलहाल, 20 पद खाली हैं।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, मंत्री पद पाने के लिए जोर-शोर से लामबंदी चल रही है, खासकर वरिष्ठ विधायकों की ओर से।
कावेरी जल विवाद से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मांड्या के विधायकों ने पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर उनसे मुलाकात की थी और राज्य सरकार 15 जुलाई को होने वाली बैठक के बाद इस पर कोई फैसला लेगी।
उन्होंने कहा, "हां, मांड्या के विधायक, श्रीरंगपट्टनम के विधायक और जिले के मंत्री मुझसे मिले। 15 तारीख को एक बैठक है।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मांड्या जिले के किसानों के हितों की रक्षा करेगी और पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।
उन्होंने कहा, "हमें तमिलनाडु से जुड़े निर्देशों का भी पालन करना है। इसी के अनुसार, हम 15 तारीख को होने वाली बैठक में कर्नाटक का पक्ष रखेंगे और 15 तारीख की शाम तक कोई फैसला लेंगे।"
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के अध्यक्ष को निलंबित किए जाने पर शिवकुमार ने कहा कि यह कार्रवाई राज्यपाल ने की है और सरकार ने आयोग के कामकाज में निरंतरता बनाए रखने के लिए कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा, "यह राज्यपाल का आदेश है। राज्यपाल ने निलंबन का आदेश दिया है। मैंने पहले ही निर्देश दे दिया है कि सबसे वरिष्ठ व्यक्ति को तुरंत प्रभार सौंप दिया जाए।"
भाषा प्रशांत संतोष
संतोष
1307 1817 बेंगलुरु