भारत ने निज्जर मामले में कनाडा की पुलिस अधिकारी के बयान का लिया संज्ञान
सुरेश
- 14 Jul 2026, 07:09 PM
- Updated: 07:09 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) भारत ने मंगलवार को कहा कि उसने कनाडा की एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के उस बयान पर गौर किया है, जिसमें कहा गया कि सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की 2023 में हुई हत्या की जांच कर रहे अधिकारियों को मामले में भारतीय सरकारी एजेंट की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला है।
रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) की उपायुक्त लिसा मोरलैंड की यह टिप्पणी पिछले सप्ताह उस वक्त आई, जब अमेरिकी अधिकारियों ने जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पर निज्जर की हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का आदेश देने का आरोप लगाया।
मोरलैंड की टिप्पणियां कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के उस आरोप के उलट थीं, जिसमें उन्होंने सिख अलगाववादी की हत्या के लिए भारतीय सरकारी एजेंट को जिम्मेदार ठहराया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा, ''हम कई देशों में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा आरोप तय किए जाने और कार्रवाई की घोषणाओं से अवगत हैं।''
उन्होंने कहा कि भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि सीमा-पार संगठित अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, अवैध हथियारों की तस्करी और इनसे जुड़े आपराधिक नेटवर्क हमारे समाज के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
उन्होंने कहा, ''आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ लड़ाई में भारत-अमेरिका का सहयोग लगातार गहरा हो रहा है। हमारी एजेंसियों ने पिछले कुछ वर्षों में मिलकर काम किया है और यह सहयोग लगातार प्रगाढ़ होता जा रहा है।''
जायसवाल ने कहा कि भारत ने आरसीएमपी उपायुक्त की टिप्पणियों पर गौर किया है। उन्होंने कहा, ''ये टिप्पणियां हाल ही में सार्वजनिक किए गए अमेरिकी आरोपपत्र के अनुरूप हैं, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई के संगठित अपराध गिरोह के सदस्यों को जिम्मेदार ठहराया गया है।''
उन्होंने कहा, ''भारत आतंकवाद और सीमा-पार संगठित अपराध से निपटने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध है, जिसके लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों और सुरक्षा के क्षेत्र में करीबी सहयोग किया जाएगा।''
ब्रिटिश कोलंबिया में एक गुरुद्वारे के बाहर निज्जर की हत्या के कुछ हफ्तों बाद, ट्रूडो ने सिख अलगाववादी की हत्या के लिए भारत सरकार से जुड़े लोगों को जिम्मेदार ठहराया था। तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया था।
ट्रूडो के आरोपों के बाद दोनों देशों के संबंध बेहद खराब दौर में पहुंच गए। इसके बाद भारत ने कनाडा पर आरोप लगाया कि वह अपनी धरती से खालिस्तान समर्थकों को अपनी गतिविधियां चलाने की अनुमति दे रहा है।
भाषा आशीष सुरेश
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