असम: सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब करने वालों के वीडियो नगर निकाय ने विशाल स्क्रीन पर दिखाने शुरू किये
दिलीप
- 14 Jul 2026, 10:37 PM
- Updated: 10:37 PM
तिनसुकिया, 14 जुलाई (भाषा) असम में लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब करने से रोकने के लिए आईने लगाने का प्रयोग विफल होने के बाद एक नगर निकाय ने अब ऐसे लोगों के वीडियो विशाल एलईडी स्क्रीन पर दिखाने शुरू कर दिए हैं।
तिनसुकिया नगर पालिका बोर्ड ने कहा कि बार-बार जागरूकता अभियान और सार्वजनिक अपील के बावजूद व्यस्त स्थानों पर लोगों के खुले में पेशाब करने की शिकायतें मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है।
नगरपालिका के कार्यकारी अधिकारी नयन ज्योति नाथ ने मंगलवार को 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''बार-बार जागरूकता अभियान चलाने और सार्वजनिक अपील करने के बावजूद लोगों के खुले में पेशाब करने की समस्या से नगर बोर्ड जूझ रहा है।''
उन्होंने बताया कि एटी रोड, लाल बंगला रोड, विद्यालयों के आसपास और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पेशाब करने को लेकर स्थानीय लोगों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
करीब एक महीने पहले नगरपालिका बोर्ड ने ऐसे स्थानों पर बड़े आईने लगाए थे, जहां इस तरह की शिकायतें अधिक थीं।
नाथ ने कहा, ''उद्देश्य यह था कि लोग अपना प्रतिबिंब देखकर असहज महसूस करेंगे और इस तरह की हरकत करने से बचेंगे। हालांकि, यह प्रयोग अपेक्षित परिणाम देने में विफल रहा, जिसके बाद बोर्ड को सख्त कदम उठाने पड़े।''
उन्होंने बताया कि आईने लगाने की पहल विफल होने के बाद नगरपालिका की टीम ने सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब करते पाए गए लोगों के वीडियो रिकॉर्ड करने और तस्वीरें लेने शुरू किए।
उन्होंने कहा कि इन वीडियो का इस्तेमाल कार्रवाई के लिए साक्ष्य के रूप में करने के साथ-साथ जागरूकता अभियान के तहत नगरपालिका कार्यालय के बाहर लगी एलईडी स्क्रीन पर दिखाने के लिए भी किया जा रहा है।
नाथ ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल लोगों पर जुर्माना लगाना नहीं है, बल्कि सार्वजनिक व्यवहार में स्थायी बदलाव लाना और पूरे शहर में स्वच्छता को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा, ''आदतन नियम तोड़ने वालों पर नगरपालिका के लागू नियमों के तहत जुर्माना भी लगाया जा रहा है। नगरपालिका क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध हैं।''
उन्होंने लोगों से इन शौचालयों का इस्तेमाल करने की अपील की।
इस अभियान को लेकर स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कई लोगों ने नगरपालिका के इस अभिनव कदम की सराहना करते हुए कहा कि सार्वजनिक शर्मिंदगी का भय आर्थिक जुर्माने से अधिक प्रभावी रोकथाम साबित हो सकता है। वहीं, कुछ लोगों ने चिंता जताई कि ऐसे वीडियो बार-बार दिखाए जाने से राहगीरों, खासकर महिलाओं और बच्चों, को असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
भाषा अमित दिलीप
दिलीप
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