तीन साल की बच्ची को गंवाना पड़ा हाथ, तृणमूल नेता अभिषेक के सेवाश्रय शिविर में लापरवाही का आरोप
माधव
- 15 Jul 2026, 09:40 PM
- Updated: 09:40 PM
कोलकाता, 15 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा संचालित सेवाश्रय स्वास्थ्य शिविर में लापरवाही का एक और चौंकाने वाला आरोप लगा है। बुधवार को एक तीन साल की बच्ची के माता-पिता ने दावा किया कि सेवाश्रय में इलाज कराने के कारण उनकी बेटी का दाहिना हाथ कंधे से काटना पड़ा।
दक्षिण 24 परगना के बिष्णुपुर थाने में दर्ज शिकायत में बनर्जी के साथ कई और लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें तृणमूल के पूर्व राज्यसभा सदस्य शांतनु सेन, गिरफ्तार हो चुके स्थानीय पार्टी विधायक दिलीप मंडल और कोलकाता में बनर्जी के कैमक स्ट्रीट कार्यालय के कर्मी अयान घोष दस्तीदार शामिल हैं।
यह आरोप एक महिला के पुलिस में यह शिकायत करने के कुछ ही दिन बाद आया है कि उसी जिले में सेवाश्रय शिविर में घुटने के दर्द के खराब इलाज के बाद उसका एक पैर काटना पड़ा, जिसके बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की।
बच्ची के माता-पिता ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव से पहले अपने रिपोर्ट कार्ड में डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी के साथ परिवार की तस्वीरें, सेवाश्रय की 'सफलता' के सबूत के तौर पर जारी की थीं जिसके लिए उनकी लिखित या मौखिक मंजूरी नहीं ली गई थी।
अपनी शिकायत में, साढ़े तीन साल की कृति मन्ना की मां रूमा मन्ना ने कहा कि उनकी बेटी एक दुर्लभ और जटिल बीमारी के साथ पैदा हुई थी, जिससे उसके शरीर में रक्त प्रवाह में रुकावट आ रही थी और मार्च 2024 से एम्स, नई दिल्ली में उसका इलाज चल रहा था।
मन्ना ने दावा किया कि इलाज का खर्च उठाने में मुश्किल होने पर, उन्होंने और उनके पति ने चिकित्सा और वित्तीय मदद के लिए बनर्जी से संपर्क किया था। उन्होंने कहा कि इसके बजाय, परिवार को सेवाश्रय शिविर में इलाज कराने के लिए मना लिया गया।
शिकायतकर्ता ने कहा कि स्थानीय तृणमूल नेताओं के कहने पर, परिवार बाद में तीन सेवाश्रय शिविरों में गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें परामर्श दिया। उन्होंने कहा कि नेताओं ने एक शिविर में अभिषेक बनर्जी के साथ मुलाकात भी तय की थी।
उन्होंने कहा,''मेरे (बनर्जी) यह कहने के बावजूद कि हम एम्स में इलाज जारी रखने के लिए सिर्फ़ पैसे की मदद चाहते हैं, सांसद ने हमें आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बेहतर इलाज की सुविधाओं का भरोसा दिलाया।''
मन्ना ने अपनी शिकायत में लिखा, ''एक लाचार मां होने के नाते, जो कम पढ़ी-लिखी है, मैंने जन प्रतिनिधि और उनके दफ्तर के प्रतिनिधियों पर भरोसा किया और अपनी बेटी का इलाज बंगाल में जारी रखने का फ़ैसला किया।''
उन्होंने आरोप लगाया कि इतने आश्वासनों के बावजूद, आरजी कर अस्पताल में परिवार पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया और स्तब्ध करने वाली बात है कि उनकी बेटी की हालत बिगड़ने के बाद, अस्पताल ने बच्ची को वापस एम्स, नई दिल्ली रेफर कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बेंगलुरु के एक अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम द्वारा बाद में की गई जांच में, कृति को जानलेवा बीमारी का पता चला जो शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल गई थी।
मन्ना ने कहा, "मेडिकल बोर्ड ने पहले मेरी बेटी की जान को खतरा कम करने के लिए एम्बोलाइज़ेशन किया और बाद में यह पता चलने पर कि इलाज का कोई और रास्ता नहीं है, मेरी बेटी के दाहिने कंधे की 'डिसआर्टिक्यूलेशन' सर्जरी करने का फैसला किया।"
उन्होंने मामले की "स्वतंत्र, निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच" की मांग की।
भाजपा नेता अभिजीत दास ने आरोप लगाया, "परिवार की इस बुरी हालत के लिए पूरी तरह से अभिषेक बनर्जी जिम्मेदार हैं।''
पिछले कुछ हफ्तों में बनर्जी और डायमंड हार्बर में उनके सेवाश्रय शिविर के खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिसमें इलाज में गड़बड़ियों और मेडिकल नैतिकताओं तथा नियमों को तोड़कर ऑपरेशन करने का आरोप है, जिसके बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष जांच समिति बनाई है।
भाषा वैभव माधव
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