ब्रिक्स देशों ने श्रम और रोजगार के क्षेत्र में सहयोग गहरा करने के लिए घोषणापत्र अपनाया
वैभव
- 15 Jul 2026, 11:56 PM
- Updated: 11:56 PM
हैदराबाद, 15 जुलाई (भाषा) हैदराबाद में बुधवार को आयोजित ब्रिक्स देशों के श्रम और रोजगार मंत्रियों की 12वीं बैठक (एलईएमएम) में एक घोषणापत्र अपनाया गया, जो गरिमापूर्ण कार्य को बढ़ावा देने, सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने, समावेशी विकास का समर्थन करने और श्रम व रोजगार के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने की ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस बैठक के दौरान भारत द्वारा प्रस्तावित 'ब्रिक्स कनेक्ट' पहल की शुरुआत भी की गई, जिसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच तकनीकी सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण को मजबूत करना है।
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने बैठक में अपनाए गए घोषणापत्र को सामूहिक प्रयासों का सफल परिणाम और आम सहमति की भावना का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा, "हम एक लचीला, औपचारिक, समावेशी, लैंगिक रूप से संवेदनशील, डिजिटल रूप से सशक्त और भविष्य के लिए तैयार श्रम बाजार बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि कोई भी श्रमिक पीछे न छूटे।"
देश के सुधारों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने नवंबर 2025 में 29 पुराने श्रम कानूनों को चार आधुनिक श्रम संहिताओं में समाहित किया है, जो देश के 1.4 अरब नागरिकों के लिए एक ऐतिहासिक सुधार है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, घोषणापत्र में साझा श्रम बाजार की चुनौतियों से निपटने में ब्रिक्स सदस्यों के बीच दक्षिण-दक्षिण सहयोग (साउथ-साउथ कोऑपरेशन), आपसी सीख और व्यावहारिक सहयोग के महत्व को दोहराया गया।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत आयोजित इस बैठक में मंत्रियों, प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों और ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने काम के भविष्य को आकार देने वाले प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
यह बैठक 13-14 जुलाई को हैदराबाद में आयोजित ब्रिक्स रोजगार कार्य समूह (ईडब्ल्यूजी) की तीसरी बैठक के बाद हुई है, जिसमें सदस्य देशों ने चार प्राथमिक क्षेत्रों में अपने अनुभवों को साझा किया।
घोषणापत्र के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने और श्रम बाजारों को औपचारिक बनाने पर सदस्य देश अपने-अपने स्तर पर सामाजिक सुरक्षा का दायरा उत्तरोत्तर बढ़ाने का प्रयास करने पर सहमत हुए।
कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर सदस्य देशों ने महिला सशक्तीकरण के लिए नीतिगत ढांचे को मजबूत करने और कार्यस्थल पर उत्पीड़न व भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई।
कामगारों की रोजगार क्षमता और उनके हुनर (कौशल) के विकास व उसकी पहचान को लेकर सदस्य देशों ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएमओ) द्वारा भारत और ब्राजील के सहयोग से दुनिया भर के कामकाज व पेशों को एक मानक श्रेणी में बांटने के लिए किए जा रहे शुरुआती अध्ययन पर चर्चा की।
भाषा सुमित वैभव
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