सरकार ने नए सीएएफई मानदंडों का मसौदा किया जारी, हितधारकों से सुझाव मांगे
अजय
- 16 Jul 2026, 04:52 PM
- Updated: 04:52 PM
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) सरकार ने कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता (सीएएफई) विनियमों के तीसरे चरण के तहत यात्री वाहनों के लिए अधिक कड़े ईंधन दक्षता मानदंड प्रस्तावित किए हैं। इनमें कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के अधिक सख्त लक्ष्य, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के लिए प्रोत्साहन और बाजार-आधारित अनुपालन व्यवस्था शामिल है।
केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को नए सीएएफई मानदंड का मसौदा हितधारकों के परामर्श के लिए जारी किया। नए मानदंडों को एक अप्रैल, 2027 से पांच साल के लिए लागू करने का प्रस्ताव है।
वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में चरणबद्ध तरीके से कमी लाने के उद्देश्य से तैयार किए गए ये नए मानदंड मौजूदा सीएएफई (द्वितीय) मानदंड का स्थान लेंगे। मौजूदा सीएएफई मानदंड की अवधि 31 मार्च, 2027 तक है।
मानदंड के अनुपालन का आकलन दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण तीन वर्ष का होगा जिसके बाद दो साल का दूसरा चरण होगा।
प्रस्तावित नियम 2027-28 से 2031-32 की अवधि के दौरान भारत में बिक्री के लिए विनिर्मित या आयातित एम-1 श्रेणी के उन यात्री वाहनों पर लागू होंगे, जिनमें चालक के अतिरिक्त आठ से अधिक सीट नहीं होंगी।
प्रस्तावित मसौदे में ईंधन खपत के लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से और कड़े किए जाएंगे। इन्हें वर्ष 2027-28 में 3.99 लीटर प्रति 100 किलोमीटर (94.76 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड प्रति किलोमीटर) से घटाकर वर्ष 2031-32 तक 3.32 लीटर प्रति 100 किलोमीटर (78.90 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड प्रति किलोमीटर) करने का प्रस्ताव है।
चरणबद्ध व्यवस्था का उद्देश्य वाहन विनिर्माताओं को नियामकीय स्पष्टता प्रदान करना है, ताकि उन्हें अधिक ईंधन दक्षता वाले मॉडल विकसित करने और बाजार में उतारने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
प्रस्ताव में पहली बार कार्बन निरपेक्षता कारक (सीएनएफ) का प्रावधान किया गया है। इसके तहत एथनॉल, जैव-ईंधन और संपीड़ित जैव-गैस (सीबीजी) का उपयोग करने वाले वाहनों के घोषित टेलपाइप कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में निर्धारित सीमा तक कमी की अनुमति होगी।
एथनॉल मिश्रण स्तर के लिए आठ प्रतिशत सीएनएफ प्रस्तावित किया गया है, जबकि सीबीजी और अन्य जैव-ईंधन के लिए उत्सर्जन में कमी मौजूदा मिश्रण स्तर के आधार पर तय की जाएगी।
मसौदे में स्वीकृत ईंधन-बचत प्रौद्योगिकियों के लिए प्रति किलोमीटर कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में अधिकतम नौ ग्राम तक अनुपालन प्रोत्साहन देने का भी प्रस्ताव है। हालांकि, प्रत्येक प्रौद्योगिकी के लिए यह लाभ अधिकतम एक ग्राम प्रति किलोमीटर तक सीमित रहेगा। साथ ही, बेड़े की औसत ईंधन खपत की गणना के दौरान बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन, रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहन, प्लग-इन हाइब्रिड, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल वाहन के लिए मात्रा-आधारित 'सुपर क्रेडिट' की मौजूदा व्यवस्था बरकरार रखने का प्रस्ताव है।
मसौदे में क्रेडिट-डेबिट व्यवस्था का भी प्रस्ताव है। इसके तहत निर्धारित लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करने वाले वाहन विनिर्माताओं को अनुपालन क्रेडिट मिलेगा, जिसे वे उसी अनुपालन अवधि के भीतर आगे के लिए ले जा सकेंगे।
इसके तहत जो वाहन विनिर्माता अपने निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं कर पाएंगे, वे आगे ले जाए गए क्रेडिट, अन्य वाहन विनिर्माताओं के साथ स्वैच्छिक 'पूलिंग' व्यवस्था या भारतीय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) से अनुपालन क्रेडिट खरीदकर अपनी बाध्यता पूरी कर सकेंगे।
प्रस्ताव में प्रत्येक अनुपालन क्रेडिट के लिए शुरुआती 'बायआउट' (किसी के एवज में कुछ खरीदना) मूल्य 2,500 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसे हर वर्ष 500 रुपये बढ़ाया जाएगा। अनुपालन अवधि समाप्त होने तक उपयोग नहीं किए गए क्रेडिट स्वतः समाप्त हो जाएंगे।
मानदंड का पालन नहीं करने वाले वाहन विनिर्माताओं पर ऊर्जा संरक्षण अधिनियम के तहत जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि, सालाना 1,000 से कम यात्री वाहन बेचने वाले वाहन विनिर्माताओं को इससे छूट मिलेगी।
बिजली मंत्रालय ने मसौदा मानदंडों पर हितधारकों और आम जनता से छह अगस्त तक सुझाव मांगे हैं।
मंत्रालय ने कहा कि प्रस्तावित मानदंड 2027-28 से 2031-32 के दौरान भारत में बिक्री के लिए विनिर्मित या आयातित एम-1 श्रेणी के यात्री वाहनों पर लागू होंगे।
भाषा निहारिका अजय
अजय
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