तृणमूल कांगेस की रुक्मिणी मलिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया
सुरेश
- 16 Jul 2026, 06:48 PM
- Updated: 06:48 PM
नयी दिल्ली/कोलकाता, 16 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस की रुक्मिणी मलिक ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद इस्तीफा देने वाली मलिक तृणमूल कांग्रेस की चौथी सांसद हैं।
अभिनेत्री से नेता बनीं रुक्मिणी मलिक को कोयल मलिक के नाम से भी जाना जाता है।
मलिक ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया।
मुश्किलों से घिरी तृणमूल कांग्रेस को मलिक के इस्तीफे से राज्यसभा में एक और झटका लगा है और उसके सांसदों की संख्या घटकर नौ रह गई।
इस बीच ऐसी अटकलें हैं कि पार्टी के कुछ और नेता भी इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे संसद में पार्टी की स्थिरता को लेकर सवाल खड़ा हो गया है।
मलिक ने अपने इस्तीफा पत्र में कहा, ''मैं राज्यसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा देती हूं, जिसे कृपया तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए।''
उन्होंने पत्र में कहा, ''मैं राज्यसभा की सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उपसभापति और राज्यसभा सचिवालय के सभी अधिकारियों द्वारा दिए गए सहयोग और मदद के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं।''
इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक भी राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं। बाद में ये तीनों सांसद भाजपा में शामिल हो गए थे और उन्होंने उन सीटों पर दोबारा चुनाव के लिए अपने नामांकन दाखिल कर दिए, जो उनके इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थीं। इन सीटों पर फिलहाल अभी तक कोई अन्य उम्मीदवार चुनाव मैदान में नहीं है।
यदि शुक्रवार की अपराह्न तीन बजे तक उनकी उम्मीदवारी को कोई चुनौती नहीं मिलती है, तो संभावना है कि तीनों ही राज्यसभा के लिए भाजपा उम्मीदवार के रूप में फिर से निर्वाचित हो जाएंगे।
दिलचस्प बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस के कुछ बागी नेताओं की तरह ही मलिक ने भी सांसद के रूप में इस्तीफा देने के बाद दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात की।
बंगाल की प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्रियों में से एक और दिग्गज अभिनेता रंजीत मलिक की बेटी कोयल ने राज्यसभा के लिए नामित किए जाने से केवल एक महीने पहले ही सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था।
अभिनेत्री ने मार्च में अपना नामांकन दाखिल करने के बाद कहा था, ''यह मेरे जीवन का एक नया चरण है और जिस जिम्मेदारी को मैं संभालने जा रही हूं, उसके लिए मैं सभी का आशीर्वाद चाहती हूं। लोगों और देश की सेवा करना मेरे मन में कुछ समय से था और मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे यह अवसर मिला।''
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा, ''कोयल मलिक कोई स्वाभाविक रूप से उभरी हुई नेता नहीं हैं। तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से उनकी नजदीकी के कारण उन्होंने राजनीति में सीधा प्रवेश किया। इसके तुरंत बाद हमने देखा कि उन्हें राज्यसभा के लिए नामित कर दिया गया। सांसद बनने के बाद वह कहीं नजर नहीं आईं।''
उन्होंने कहा, ''हमें खुशी है कि वह अब फिर से सामने आई हैं और वह भी ममता बनर्जी से अपने संबंध तोड़ना चाहती हैं।''
भट्टाचार्य ने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी ने जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खो दी है।
उन्होंने कहा, ''तृणमूल कांग्रेस अब खत्म हो चुकी है। ऐसी पार्टी पर चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है, जिसने जनता के बीच अपनी सारी प्रासंगिकता खो दी है। तृणमूल कांग्रेस के वे नेता, जो हताश होकर अपना पाला बदलने की कोशिश कर रहे हैं और जिनकी पृष्ठभूमि उजागर हो चुकी है, उनपर भी जनता की कड़ी नजर है।''
भाषा देवेंद्र सुरेश
सुरेश
1607 1848 नयी दिल्ली/ कोलकाता