भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2047 तक 2,600 अरब डॉलर तक पहुंचेगी : नीति आयोग रिपोर्ट
अजय
- 16 Jul 2026, 04:17 PM
- Updated: 04:17 PM
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) भारत अपनी जैव-अर्थव्यवस्था (बायोइकॉनमी) को वर्ष 2035 तक 691 अरब डॉलर और 2047 तक 2,600 अरब डॉलर तक पहुंचा सकता है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
जैव-अर्थव्यवस्था से तात्पर्य उस आर्थिक मॉडल से है जिसमें खाद्य, ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादों के उत्पादन के लिए नवीकरणीय जैविक संसाधनों का उपयोग किया जाता है।
आयोग ने 'रोडमैप फॉर बिल्डिंग इंडिया ऐज ए लीडिंग बायोइकॉनमी पावरहाउस बाय 2035' शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा कि 2047 तक 2,600 अरब डॉलर की जैव-अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए देश को विघटित पहल से आगे बढ़कर समन्वित राष्ट्रीय क्रियान्वयन व्यवस्था अपनानी होगी।
रिपोर्ट में कहा गया, '' दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और तेजी से क्रियान्वयन के साथ भारत 2035 तक अपनी जैव-अर्थव्यवस्था को 691 अरब डॉलर और 2047 तक 2,600 अरब डॉलर तक पहुंचा सकता है। इससे तीन करोड़ से अधिक उच्च-मूल्य वाली नौकरियां सृजित होंगी और भारत जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया की शीर्ष तीन ताकतों में शामिल हो सकेगा।''
नीति आयोग ने कहा कि 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में विस्तार को तेजी से राष्ट्रीय जैव मिशन शुरू करना आवश्यक होगा।
रिपोर्ट में कहा गया कि विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए अधिकार-संपन्न समितियां, सुरक्षा और विश्वसनीयता बनाए रखते हुए अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए नियामकीय सुधार, जैव-विज्ञान नेतृत्व और प्रतिभा विकास को मजबूत करने तथा नवोन्मेषण, विस्तार, बुनियादी ढांचे और जैव-विनिर्माण को समर्थन देने के लिए 50,000 करोड़ रुपये का 'बायोइकॉनमी ग्रोथ फंड' भी जरूरी होगा।
इसमें भारत के पारंपरिक जैविक अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) से आगे बढ़कर कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित जैव-प्रौद्योगिकी एवं अगली पीढ़ी के जैव-विनिर्माण की ओर बढ़ने का सुझाव भी दिया गया। इसके लिए मंत्रालयों, विभागों, शिक्षण संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप के बीच गहन सहयोग की आवश्यकता होगी।
रिपोर्ट कहती है, '' यदि समय रहते कदम उठाए जाते हैं, तो भारत केवल इस परिवर्तन में भागीदार ही नहीं बनेगा, बल्कि जैविक युग के वैश्विक नियमों, बाजारों और मंचों को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा। यह परिवर्तन एआई से आई क्रांति के बराबर या उससे भी बड़ा साबित हो सकता है।''
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
इसमें कहा गया, ''अमेरिका ने जैव-विनिर्माण के लिए 'समूची सरकार' दृष्टिकोण अपनाया है, यूरोपीय संघ जैव-प्रौद्योगिकी को जलवायु और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा से जोड़ रहा है, जबकि चीन इसे बड़े पैमाने पर औद्योगिक रूप देने के लिए अपनी पंचवर्षीय योजनाओं का उपयोग कर रहा है।''
रिपोर्ट के अनुसार, जैव-प्रौद्योगिकी का अगला चरण कृत्रिम मेधा, रोबोटिक्स, संगणनात्मक जीवविज्ञान (कंप्यूटेशनल बायोलॉजी) और जैव-संवेदी (बायोसेंसर) नेटवर्क के साथ गहरे एकीकरण से परिभाषित होगा।
इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य गोवर्धन दास ने कहा कि भारत की जैव-अर्थव्यवस्था तीव्र प्रगति के दौर में प्रवेश कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक जैविक युग में भारत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। पिछले एक दशक में देश की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 के 100 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 1,953 अरब डॉलर हो गई है, जो 16 गुना वृद्धि है। वर्तमान में इसका राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान 4.8 प्रतिशत है।
भाषा निहारिका अजय
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