वांगचुक का अनशन केंद्र सरकार से बातचीत के बाद खत्म होना चाहिए था : सर्मथकों ने कहा
सुभाष
- 18 Jul 2026, 05:04 PM
- Updated: 05:04 PM
शिमला, 18 जुलाई (भाषा) हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक नेताओं और नागरिक समाज संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय राजधानी में अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने को लेकर शनिवार को केंद्र सरकार की आलोचना की तथा दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को ''असंवेदनशील'' बताया।
उन्होंने कहा कि वांगचुक का अनशन सरकार के साथ बातचीत के बाद खत्म होना चाहिए था, लेकिन बिना कोई समाधान दिए उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
वांगचुक के समर्थन में सैकड़ों युवाओं, महिलाओं, सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों और नागरिक समाज संस्थाओं के लोगों ने शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के सोलन में एक दिन का सांकेतिक उपवास रखा। यह उपवास शहर की संस्था जागरूक युवा संगठन के आह्वान पर किया गया था।
प्रदर्शनकारियों ने पहले 20 जुलाई को सोलन में बड़ा प्रदर्शन करने का फैसला किया था। इसी दिन कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की संसद मार्च की योजना है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक करेंगे।
राज्य के राजस्व और बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने शनिवार को केंद्र सरकार पर "असंवेदनशील" होने और देश में "अघोषित आपातकाल" जैसा माहौल बनाने का आरोप लगाया।
नेगी ने कहा कि वांगचुक केंद्रीय शिक्षा मंत्री से जवाबदेही की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज जो भी किसी मुद्दे पर आवाज उठाता है, वह खतरा महसूस करता है और उसे असंवैधानिक तरीके से जेल भेजा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जब वांगचुक ने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग की थी, तब उन्हें कई महीनों तक जेल में रखा गया था।
शुक्रवार को सोलन में हुए प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले अधिवक्ता मनोज वर्मा ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च के प्रति युवाओं का बढ़ता समर्थन देखकर सरकार पर दबाव बढ़ गया था, इसलिए वांगचुक का अनशन बीच में रुकवाया गया।
वर्मा ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "हम चाहते थे कि वांगचुक अपना अनशन खत्म करें क्योंकि उनका जीवन बहुत महत्वपूर्ण है और हम उन्हें खोना नहीं चाहते थे। लेकिन हम चाहते थे कि यह सरकार से बातचीत के बाद खत्म हो। इसके बजाय उन्हें जंतर-मंतर से हटा दिया गया।"
उन्होंने कहा, "जिस मुद्दे के लिए वह लड़ रहे थे, उसका कोई समाधान किए बिना उन्हें अस्पताल ले जाना सरकार की मनमानी और उनके स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही को दिखाता है।"
सोलन की रहने वाली भाविता ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होना अब आम बात हो गई है और इससे छात्र तथा अभिभावक, दोनों परेशान हैं।
उन्होंने कहा, "छात्र पूरे साल मेहनत करते हैं, कोचिंग कक्षाओं में शामिल होते हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर लाखों रुपये खर्च करते हैं। ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।"
सोलन की ही निवासी कनक ने कहा कि योग्यता के आधार पर मेधा सूची में जगह पाना हर नागरिक का मूल अधिकार है।
उन्होंने कहा कि हर साल प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने मजबूत परीक्षा प्रणाली लागू करने में सरकार की विफलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 28 जून से कॉजपा के प्रदर्शन के समर्थन में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे वांगचुक को शनिवार को दिल्ली पुलिस अस्पताल ले गई। कॉजपा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएं हुई हैं।
पुलिस ने कहा कि वांगचुक के स्वास्थ्य की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।
भाषा जोहेब सुभाष
सुभाष
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