उत्तराखंड में दावानल: उच्चतम न्यायालय ने 2016 के उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द किया
सुरेश
- 23 Jul 2026, 06:50 PM
- Updated: 06:50 PM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 2016 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दावानल को नियंत्रित करने और रोकने समेत कई निर्देश दिए गए थे।
उच्चतम न्यायालय ने मामले को दोबारा विचार के लिए उच्च न्यायालय को वापस भेज दिया।
न्यायालय ने कहा कि दावानल से जुड़े मामलों में ''लगातार निगरानी'' की जरूरत होती है और संबंधित उच्च न्यायालय इनसे निपटने के लिए ज्यादा बेहतर स्थिति में है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने गौर किया कि उच्चतम न्यायालय ने मार्च 2017 में उच्च न्यायालय के दिसंबर 2016 के आदेश पर रोक लगा दी थी।
पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय को 2016 के आदेश में दिए गए निर्देशों पर फिर से विचार करना चाहिए, खासकर इसलिए क्योंकि लगभग एक दशक बीत चुका है और जाहिर है कि समय के साथ जमीनी स्तर पर काफी बदलाव आए हैं।
अदालत ने कहा, ''हमें यह भी लगता है कि दावानल के मामलों में संबंधित उच्च न्यायालय द्वारा लगातार निगरानी की जरूरत है, क्योंकि वह हमसे ज्यादा बेहतर स्थिति में है।''
शीर्ष अदालत ने यह आदेश दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उत्तराखंड सरकार की अपील भी शामिल थी।
अदालत ने वरिष्ठ अधविक्ता राजीव दत्ता की एक अर्जी पर भी सुनवाई की, जिन्होंने उत्तराखंड में जंगल की आग से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए पीठ ने कहा, ''मामले को उच्च न्यायालय के पास वापस भेजा जा रहा है, ताकि वह विचार करने योग्य सवालों पर फिर से गौर कर सके और बदली हुई परिस्थितियों के अनुसार जरूरी नए निर्देश जारी कर सके।''
सुनवाई के दौरान, उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता जतिंदर कुमार सेठी ने पीठ को बताया कि हाल के वर्षों में दावानल की घटनाओं में कमी आई है, क्योंकि ऐसी घटनाओं को रोकने और उनपर काबू पाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य ने उच्च न्यायालय द्वारा जारी कुछ निर्देशों का पहले ही पालन कर लिया है।
दिसंबर 2016 के अपने आदेश में, उच्च न्यायालय ने जंगल के पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कई निर्देश जारी किए थे।
अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह जंगल के दायरे को बनाए रखने और उसे बढ़ाने के मकसद से जंगल के प्रबंधन, संरक्षण और टिकाऊ विकास के लिए एक राष्ट्रीय वन नीति बनाए।
उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि वह गर्मियों के मौसम में जंगल की आग का जल्द पता लगाने और उसे रोकने के लिए कम से कम 10,000 'फायर वॉचर' नियुक्त करे।
अदालत ने राज्य सरकार को दावानल की घटनाओं को रोकने और उस पर काबू पाने के लिए पर्याप्त कोष उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया था।
भाषा शफीक सुरेश
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