चढ़ावा चोरी विवाद के बाद संतों ने अयोध्या की 'प्रतिष्ठा' बहाल करने की वकालत की
शफीक
- 23 Jul 2026, 06:52 PM
- Updated: 06:52 PM
(किशोर द्विवेदी)
अयोध्या, 22 जुलाई (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) पदाधिकारियों के साथ अयोध्या के मठों, मंदिरों और अखाड़ों के लगभग 250 संतों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच अयोध्या के ''सम्मान और प्रतिष्ठा'' को बहाल करने पर बृहस्पतिवार को विचार-विमर्श शुरू किया।
प्रतिभागियों ने मंदिर के अनुष्ठानों में वैष्णव-रामानंदी परंपरा का कड़ाई से पालन करने का आह्वान किया। बैठक दोपहर करीब साढ़े तीन बजे 'मणिराम दास' छावनी स्थित श्रीराम सत्संग भवन में शुरू हुई।
सूत्रों के अनुसार, चर्चा के दौरान मुख्य रूप से ''अयोध्या की छवि की बहाली'' पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने चढ़ावे की कथित चोरी से उत्पन्न राजनीतिक विवाद और इसके ''श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रतिष्ठा पर प्रभाव'' को लेकर चिंता व्यक्त की।
सुबह 'पीटीआई वीडियो' सेवा से बात करते हुए, महंत नृत्य गोपाल दास के नामित उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने कहा कि बृहस्पतिवार की बैठक का केंद्रीय विषय ''राष्ट्र और सनातन'' होगा।
उन्होंने कहा, ''अयोध्या भर से मठों और मंदिरों के प्रतिनिधि बैठक में भाग लेंगे।''
आयोजकों से जुड़े जय राम दास ने कहा कि एजेंडे में प्रमुख मुद्दों में से एक ट्रस्ट के माध्यम से ऐसा तंत्र विकसित करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी मंदिर अनुष्ठान, त्योहार, उत्सव और पूजा के तरीके रामानंदी परंपरा के अनुसार सख्ती से आयोजित किए जाएं।
रामानंदी परंपरा एक वैष्णव संप्रदाय है जो भगवान राम को सर्वोच्च व्यक्ति के रूप में पूजता है और अपनी वंशावली संत रामानंद से जोड़ता है।
राम मंदिर, अयोध्या के अधिकांश अन्य मंदिरों की तरह, इस परंपरा का पालन करता है, जिसके तहत 'आरती' और 'भोग' जैसे दैनिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
मंदिर प्रबंधन के सूत्रों ने कहा कि गैर-रामानंदी परंपराओं, विशेष रूप से रामानुजाचार्य परंपरा, जिसका बड़े पैमाने पर दक्षिण भारत में पालन किया जाता है, को अपनाने पर कुछ हलकों से आपत्तियां आई हैं।
सूत्रों ने कहा कि इस प्रथा से विचलन ''गैर-उत्तर भारतीयों और गैर-स्थानीय लोगों'' के बढ़ते प्रभाव के कारण हुआ, जिन्होंने मंदिर प्रबंधन में प्रमुखता हासिल की।
सूत्रों ने कहा कि संतों के बीच व्यापक सहमति थी कि सनातन धर्म के अनुयायियों को उन लोगों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए, जिन्होंने सनातन धर्म की "छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की" और चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर जनता को "गुमराह किया या उकसाया"।
हालांकि, चर्चा में किसी व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लिया गया।
जय राम दास ने पहले कहा था कि एक और महत्वपूर्ण चर्चा उन लोगों पर केंद्रित होगी, जिन्होंने "दान चोरी मामले के बहाने, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश की", और "ऐसे तत्वों का सामाजिक बहिष्कार करने" पर विचार-विमर्श होगा।
जय राम दास के मुताबिक, एजेंडा में कहा गया है कि बुधवार को ट्रस्ट की पुनर्गठित धार्मिक समिति में शामिल किए गए अयोध्या के पांच संतों को सम्मानित किया जाएगा।
इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पदाधिकारी बैठक का हिस्सा थे या नहीं।
बुधवार की बैठकों के दौरान, ट्रस्ट ने मंदिर के अनुष्ठानों, धार्मिक समारोहों और त्योहारों की देखरेख के लिए अपनी धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया।
हालांकि, मंदिर ट्रस्ट ने एक स्थायी महासचिव की नियुक्ति, तीन खाली ट्रस्टी पदों को भरने और मंदिर के पहले सीईओ के चयन पर निर्णय यह कहते हुए टाल दिया कि इन मुद्दों पर आगे के परामर्श के बाद विचार किया जाएगा।
भाषा किशोर जफर शफीक
शफीक
2307 1852 अयोध्या