महबूबा मुफ्ती ने कश्मीरी लोगों के खिलाफ बल प्रयोग को उचित ठहराने वाले बयान के लिये माफी मांगी
दिलीप
- 28 Jul 2026, 04:27 PM
- Updated: 04:27 PM
श्रीनगर, 28 जुलाई (भाषा) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर कश्मीरी लोगों के खिलाफ बल प्रयोग को उचित ठहराने वाले अपने बयानों के लिए माफी मांगी।
महबूबा मुफ्ती ने पीडीपी के 27वें स्थापना दिवस के मौके पर यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ''अगर मेरी बातों से लोग आहत हुए हैं, तो मैं माफी मांगती हूं।''
पीडीपी अध्यक्ष ने 23 जुलाई को जंतर-मंतर का दौरा किया था और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया था।
दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए पीडीपी अध्यक्ष ने घाटी में पूर्व में पैलेट गन के इस्तेमाल का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि कश्मीर में स्थिति अलग थी, क्योंकि सुरक्षा बल आतंकवाद से लड़ रहे थे।
महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को सफाई दी कि उनके कहने का अभिप्राय था कि आतंकवाद की वजह से सुरक्षा बलों को कश्मीरियों के खिलाफ बल प्रयोग करने का बहाना मिल जाता है।
उन्होंने कहा, ''मैं 'बहाना बनता है' कहना चाहती थी, लेकिन मैं 'बहाना' शब्द नहीं बोल पाई, क्योंकि मैं बहुत सारे लोगों से बात कर रही थी।''
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) ने मांग की कि महबूबा अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांगें।
अब्दुल्ला ने सोमवार को महबूबा से माफी की मांग करते हुए कहा कि पीडीपी अध्यक्ष को जंतर-मंतर जाने के बजाय 'घर पर ही रहना' चाहिए था।
उन्होंने कहा कि सत्तासीन रहे लोगों के 'गैर-जिम्मेदाराना' बयान आम लोगों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने से रोक सकते हैं।
अब्दुल्ला ने कहा, ''जब कोई पूर्व मुख्यमंत्री यह कहे कि कश्मीर में आतंकवाद से लड़ने के लिए बल प्रयोग सही है, तो उनके अधिकारों के लिए लड़ने कौन आगे आएगा? बेहतर होता अगर वह जंतर-मंतर न जातीं।''
उन्होंने कहा था, ''जब हम (नेता) केंद्र द्वारा किए जा रहे दमन और बल प्रयोग का समर्थन करेंगे, तो अगर लोग राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए विरोध करना चाहें, तो हमारा साथ कौन देगा? वे बाहर नहीं आएंगे, क्योंकि महबूबा जी ने कहा है कि 'यह तो बनता है' (यह स्वीकार्य है)।''
भाषा धीरज दिलीप
दिलीप
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