जॉर्डन ने ईरान की मिसाइलें मार गिराईं, अमेरिका और सऊदी अरब ने ईरान समर्थित लड़ाकों पर किए हमले
सिम्मी
- 29 Jul 2026, 03:09 PM
- Updated: 03:09 PM
काहिरा, 29 जुलाई (एपी) जॉर्डन की सेना ने कहा कि देश की हवाई रक्षा प्रणाली ने बुधवार तड़के ईरान से दागी गईं पांच मिसाइलों को बीच रास्ते में ही मार गिराया।
यह घटना अमेरिकी सेना द्वारा पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर दागी गईं ईरानी मिसाइलों को निष्क्रिय करने और इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के ठिकानों पर सऊदी अरब के साथ संयुक्त हवाई हमले किए जाने के कुछ ही घंटों बाद हुई।
जॉर्डन की सेना ने कहा कि 'सभी पांच मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोककर नष्ट कर दिया गया।'
इस बीच, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'आईआरएनए' ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के हवाले से कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन स्थित मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस और अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुख्यालय पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
इससे कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा था कि उसकी सेनाएं 'पूरी तरह सतर्क और उच्च स्तर की तैयारी' में हैं। सेंटकॉम ने यह भी बताया कि अमेरिकी और सऊदी बलों ने इराक में उन ठिकानों पर हमले किए, जिनका इस्तेमाल ईरान समर्थित सशस्त्र समूह हाल के दिनों में हमले करने के लिए कर रहे थे।
अमेरिका ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी सैनिकों या सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर आगे भी हमले हुए, तो और कड़ी सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
इराक के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने इन हमलों पर चर्चा के लिए बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई।
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों से अपेक्षाकृत शांति का दौर था। लगभग तीन दिनों तक दोनों देशों की ओर से किसी नए हमले की घोषणा नहीं हुई थी। इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कई सप्ताह तक तनाव बना हुआ था। यह वही रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार होता है।
यह संघर्ष ऐसे समय फिर भड़क उठा है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रहे हैं। हाल के सप्ताहों में संघर्ष में चार अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि पेंटागन ने युद्ध की बढ़ती लागत के लिए कांग्रेस से अतिरिक्त धन की मांग की है।
सेंटकॉम ने कहा, "पिछले 72 घंटों में आईआरजीसी के निर्देश पर किए गए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में अमेरिकी और सऊदी लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में आतंकवादी संगठनों के कई रसद और हथियार भंडारण ठिकानों पर हमला किया।"
सेंटकॉम ने चेतावनी दी कि "आईआरजीसी और उससे जुड़े आतंकवादी समूहों को ये हमले बंद करने होंगे, अन्यथा अमेरिका आगे भी सैन्य कार्रवाई करेगा।"
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने भी सोशल मीडिया पर हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि "सऊदी अरब तनाव बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब देगा।"
'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज' (पीएमएफ), जो मुख्य रूप से शिया और ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों का गठबंधन है तथा औपचारिक रूप से इराकी सेना के अधीन है, ने दावा किया कि रातभर चले हवाई हमलों में उसके 20 लड़ाके मारे गए और 32 घायल हुए।
सऊदी अरब ने मंगलवार को कहा था कि उसने लगातार दूसरे दिन इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा दागे गए ड्रोन मार गिराए। वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उसने नाकाबंदी करके एक सऊदी तेल टैंकर को रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया।
इराक के प्रधानमंत्री अल-ज़ैदी ने सोमवार के कथित ड्रोन हमले के बाद जांच के आदेश दिए। इराकी सेना ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इराक की भूमि का उपयोग किसी भी मित्र या पड़ोसी देश पर हमला करने के लिए न किया जाए।
हालांकि, इराकी मिलिशिया समूहों ने ड्रोन हमलों में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है।
एपी शोभना सिम्मी
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