कावेरी नदी का जल छोड़ने का निर्देश अवैज्ञानिक, कर्नाटक के हितों के प्रतिकूल : कुमारस्वामी
नेत्रपाल
- 29 Jul 2026, 09:14 PM
- Updated: 09:14 PM
हासन (कर्नाटक), 29 जुलाई (भाषा) केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी का पानी छोड़ने संबंधी निर्देश को बुधवार को ''अवैज्ञानिक'' बताते हुए दावा किया कि यह कर्नाटक के हितों के ''प्रतिकूल'' है।
जनता दल (सेक्युलर) के नेता ने कहा कि कर्नाटक के कई हिस्से पहले से ही सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं और पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण जलाशय भी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं।
कुमारस्वामी ने दावा किया, ''राज्य अपने ही किसानों को पानी उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष कर रहा है और लोगों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसी कठिन परिस्थिति में कर्नाटक को पड़ोसी राज्य के लिए पानी छोड़ने का निर्देश देना न तो व्यावहारिक है और न ही वैज्ञानिक।''
कुमारस्वामी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि यदि आने वाले दिनों में भी सामान्य से कम बारिश होती रही तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
उन्होंने कहा, ''सीडब्ल्यूआरसी के इस निर्देश का विरोध करने के लिए पूरे राज्य को एकजुट होना होगा। किसान संगठनों और विभिन्न समूहों ने पहले ही इस आदेश के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है। तमिलनाडु जहां लगातार पानी छोड़ने की मांग कर रहा है, वहीं कर्नाटक को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के समक्ष जमीनी हकीकत प्रभावी ढंग से रखनी होगी।''
कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि उनका यह आशय नहीं है कि राज्य के कानूनी विशेषज्ञों या अधिकारियों ने कर्नाटक का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा।
सीडब्ल्यूआरसी ने कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिन तक बिलिगुंडलु में 3,500 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, जो लगभग चार टीएमसी पानी छोड़ने के बराबर है।
जद (एस) नेता ने कहा कि कर्नाटक को ईमानदारी से आत्ममंथन करना चाहिए कि उसने उपलब्ध जल संसाधनों का प्रबंधन कितनी कुशलता से किया है।
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में तीन बार कर्नाटक के जलाशय पूरी क्षमता तक भर चुके थे। ऐसे समय में राज्य सरकार को अतिरिक्त पानी को मोड़कर झीलों और अन्य जलाशयों को भरने के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए थे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''यदि सिंचाई विभाग और राज्य सरकार ने समय रहते कार्रवाई की होती तो बड़ी मात्रा में पानी का संरक्षण किया जा सकता था। इसके बजाय, पर्याप्त वर्षा और जलाशयों के भर जाने के बावजूद झीलों और अन्य जल निकायों को पर्याप्त रूप से भरे बिना पानी नीचे की ओर बह जाने दिया गया।''
कुमारस्वामी ने कहा कि तमिलनाडु ने भी अतिरिक्त वर्षा जल का प्रभावी उपयोग या भंडारण करने के बजाय उसे समुद्र में बह जाने दिया।
उन्होंने कहा, ''आज दोनों राज्य उन चूके हुए अवसरों का परिणाम भुगत रहे हैं।''
केंद्रीय मंत्री ने चिंता जताई कि कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों ने बार-बार आने वाले जल संकट से कोई सबक नहीं लिया है।
उन्होंने कहा कि अच्छी वर्षा वाले वर्षों में अतिरिक्त पानी का संरक्षण कर पर्याप्त भंडार तैयार करने की आवश्यकता है।
कुमारस्वामी ने कहा कि भारत संघीय व्यवस्था के तहत संचालित होता है और कर्नाटक को कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे पर कई वर्षों से अन्याय का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझने के बजाय विवेकपूर्ण जल प्रबंधन और दीर्घकालिक जल संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
भाषा रवि कांत नेत्रपाल
नेत्रपाल
2907 2114 हासन (कर्नाटक)