भोपाल में मुख्यमंत्री आवास के बेहद करीब पहुंचा किसानों का हुजूम, शिवराज के घर के बाहर हुआ प्रदर्शन
जोहेब
- 29 Jul 2026, 10:28 PM
- Updated: 10:28 PM
भोपाल, 29 जुलाई (भाषा) न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर शत-प्रतिशत मूंग खरीद समेत विभिन्न मांगों को लेकर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आंदोलनरत किसानों ने बुधवार शाम केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास के बाहर प्रदर्शन किया और फिर शहर के प्रमुख रोशनपुरा चौराहे पर पहुंचे, जो मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है।
हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों ने व्यस्त नर्मदापुरम राजमार्ग पर लगाए गए कई स्तरों के अवरोधकों को पारकर जहां रोशनपुरा चौराहे पर डेरा डाल दिया है, वहीं दूसरी ओर राज्य सचिवालय में सरकार के प्रतिनिधियों ने किसानों से चर्चा शुरु कर दी है।
रोशनपुरा चौराहे पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है, जहां पहुंचने से पहले कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की पुलिस से धक्का मुक्की भी हुई और कुछ बसों के कांच भी टूट गए लेकिन पुलिस ने संयम बरतते हुए किसी प्रकार का कोई बल प्रयोग नहीं किया।
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 19 संगठनों की ओर से मिलकर आयोजित इस प्रदर्शन में किसानों की प्रमुख मांगों में राज्य की पूरी मूंग की फसल को 100 प्रतिशत एमएसपी पर खरीदा जाना, खाद वितरण की जटिल ई-टोकन व्यवस्था को खत्म करना और आगामी बुवाई सत्र के लिए समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराना शामिल है।
किसानों की मांगों के मद्देनजर बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने के प्रयास के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चार सदस्यीय समिति बनाने की घोषणा की है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों का विरोध प्रदर्शन रात भर जारी रहा, जिससे राज्य की राजधानी में व्यस्त नर्मदापुरम राजमार्ग पर यातायात बाधित हो गया। यादव ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, ''सरकार हमेशा सकारात्मक सुझावों के साथ किसानों के साथ खड़ी रही है। लेकिन दोनों पक्षों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि लोगों को परेशानी न हो। इसलिए, हम बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान निकालेंगे।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारतीय किसान संगठन और अन्य सभी किसान संगठन कोई न कोई रास्ता निकालेंगे क्योंकि जब सरकार जनता के कल्याण के बारे में बात करती है तो जाहिर है कि इसमें किसानों की भलाई भी शामिल है।
मुख्यमंत्री की ओर से समिति के गठन के घोषणा के बावजूद नर्मदापुरम रोड पर कुछ किसानों ने जहां अर्धनग्न अवस्था में प्रदर्शन किया, तो वहीं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी पहुंच गए, जिनमें कुछ 'जेन जेड' भी शामिल थे, जिन्होंने खुलकर किसानों की मांगों का समर्थन किया।
'जेन जेड' शब्द 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सड़क पर 'सदबुद्धि यज्ञ' किया।
इससे पहले, राज्य के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने किसानों से मंगलवार रात पहले दौर की वार्ता की थी, जो बेनतीजा रही।
इस वार्ता के दौरान किसानों को आश्वस्त किया गया कि सरकार उनकी जायज मांगों के प्रति संवेदनशील है और सभी मुद्दों का शीघ्र एवं सकारात्मक समाधान करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, इसके बावजूद किसान मंगलवार को पूरी रात सड़कों पर डटे रहे। इस कारण नर्मदापुरम रोड पर आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई और आसपास के इलाकों में जाम लग गया।
पुलिस ने परेशानी से बचने के लिए लोगों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने का सुझाव जारी किया था।
मुख्यमंत्री आवास घेरने की घोषणा कर मंगलवार रात आगे बढ़ रहे हजारों किसानों को नर्मदापुरम रोड स्थित वीर सावरकर सेतु के पहले रोक लिया गया था। प्रशासन ने आसपास के इलाकों में मौजूद स्कूलों में बुधवार सुबह छुट्टी की घोषणा की। कंषाना ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन का लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध किया।
उन्होंने पत्र में कहा किसानों को बेहतर मूल्य मिले और किसान भविष्य में भी दलहन उत्पादन के प्रति इच्छुक रहे इसे सुनिश्चित करने के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य का अधिकाधिक लाभ उन्हें दिया जाना आवश्यक है, जो केन्द्र सरकार द्वारा प्रदत्त लक्ष्य सीमा से संभव नहीं हो सकेगा।
कंषाना के पत्र के जवाब में चौहान ने बुधवार शाम अपने आवास के बाहर प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री यादव को एक पत्र लिखा और कहा कि ग्रीष्मकालीन मौसम 2025-26 के लिए अनुमानित उत्पादन की अधिकतम सीमा 4,54,580 मीट्रिक टन मूंग की खरीद मध्यप्रदेश राज्य के लिए मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत पहले ही स्वीकृत की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि उनके विभाग द्वारा इस मौसम में विभिन्न राज्यों को खरीद हेतु स्वीकृत कुल 5,23,243 मीट्रिक टन मूंग की मात्रा की स्वीकृति में 87 प्रतिशत मध्य प्रदेश को दी गयी है, जो कि देश में सर्वाधिक है।
उन्होंने कहा कि कंषाना के पत्र में उल्लेख किया है कि केंद्र द्वारा राज्य को 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य प्रदान किया गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि केंद्र सरकार द्वारा किसी भी प्रकार का खरीद का लक्ष्य प्रदान नहीं किया जाता है।
चौहान ने पत्र में कहा कि 'पीएम-आशा योजना' के अंतर्गत उपार्जन के लिए दिशानिर्देशों में 25 प्रतिशत की सीमा स्वीकृति प्रदान की जाती है और इस वर्ष भी राज्यों को पीएम-आशा योजना के अतंर्गत देश भर से केंद्र सरकार द्वारा कुल 5,23,243 मीट्रिक टन मूंग की खरीदी की जानी है जिसमें उत्तर प्रदेश से 48,298 मीट्रिक टन, हरियाणा से 2,115 मीट्रिक टन,गुजरात से 18,250 मीट्रिक टन एवं मध्यप्रदेश से सर्वाधिक 4,54,580 मीट्रिक टन की स्वीकृति दी गई है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि आपके संज्ञान में यह विषय अवश्य होगा कि केंद्र सरकार राज्यों से पीएम-आशा योजना के अंतर्गत ही मूंग खरीदी की स्वीकृति प्रदान करती है और इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि केंद्र सरकार योजना के तहत राज्यों से 25 प्रतिशत तक ही खरीद कर सकती है।
उन्होंने कहा, ''अतिरिक्त खरीदी राज्यों को करनी होती है। भारत सरकार ने पीएम-आशा के ढांचे के अंतर्गत मूल्य समर्थन योजना के तहत मध्य प्रदेश राज्य को लगातार अधिकतम स्वीकार्य समर्थन प्रदान किया है।''
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को आज दिनांक 29 जुलाई, 2026 तक के प्राप्त आंकड़ों के अनुसार राज्य में मूंग की खरीदी लगभग 60 हजार मीट्रिक टन है।
उन्होंने कहा, ''अतः किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार से यह अनुरोध है कि मूंग की खरीदी शीघ्रता से सुनिश्चित करने का कष्ट करें।'' भाषा ब्रजेन्द्र जोहेब
जोहेब
2907 2228 भोपाल