विरोध-प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले छात्रों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए: दीपके
पारुल
- 29 Jul 2026, 10:56 PM
- Updated: 10:56 PM
(फोटो के साथ)
छत्रपति संभाजीनगर, 29 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को कहा कि प्रदर्शनकारी छात्र "आतंकवादी नहीं" हैं। उन्होंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर पैलेट गन चलाने का आदेश देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की।
दीपके ने चेतावनी दी कि अगर पुलिस की ओर से छात्रों को परेशान करना जारी रहा, तो युवा "सरकार बदल देंगे।"
दीपके बुधवार को दिल्ली से अपने गृहनगर छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र) पहुंचे। कॉजपा ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर दिल्ली में एक महीने तक विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और केंद्र द्वारा प्रदर्शनकारियों की सभी मांगें मान लिए जाने के बाद विरोध-प्रदर्शन समाप्त हो गया था।
दीपके ने दावा किया कि कई राज्यों की पुलिस छात्र कार्यकर्ताओं के घरों पर जा रही है और उन्हें गिरफ्तारी की धमकी दे रही है।
कॉजपा संस्थापक छत्रपति संभाजीनगर हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से कहा, "अब सरकार को अच्छा व्यवहार करना चाहिए। 20 जुलाई को (संसद चलो मार्च के दौरान) सड़कों पर छात्रों का खून बहा था। उस दिन वास्तव में बहुत बुरा हुआ था। क्या यह पर्याप्त नहीं है। अब भी छात्रों को परेशान किया जा रहा है। कई राज्यों में पुलिस छात्रों के घरों पर जाकर उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दे रही है।"
उन्होंने कहा, "चाहे वह अमित शाह ही क्यों न हों, पैलेट गन चलाने का आदेश देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।''
दीपके ने इस बात पर खुशी जताई कि वह अपने माता-पिता से मिल सकेंगे। उन्होंने कहा, "मैं लगभग 40 दिन बाद घर लौट रहा हूं। जब से मैं भारत आया हूं, तब से आंदोलन चल रहा था। इसके बाद मैं लगभग 36 दिन तक दिल्ली में जंतर-मंतर पर था। यह आंदोलन सफल साबित हुआ और देश के छात्रों की जीत हुई... मैं यहां आ गया हूं और मुझे खुशी है कि मैं अपने माता-पिता से मिलने जा रहा हूं।''
दीपके ने आरोप लगाया कि कई राज्यों की सरकारें उन छात्रों को परेशान कर रही हैं, जिन्होंने विरोध-प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था।
कॉजपा संस्थापक ने कहा, "ये छात्र आतंकवादी नहीं हैं। ये हमारे देश का भविष्य हैं। अगर देश के भविष्य को इस तरह प्रताड़ित किया जाएगा, तो जिस तरह धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा... तो कल हम सरकार बदल देंगे, अगर वह (सरकार) सही रास्ते पर नहीं आती है।"
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस्तीफा दे देना चाहिए और एक 'इंफ्लुएंसर' बन जाना चाहिए, "जिस काम में वह बहुत माहिर हैं।"
दीपके ने कहा कि सरकार को यह नहीं मान लेना चाहिए कि प्रधान के इस्तीफे से छात्रों का गुस्सा कम हो गया है। उन्होंने कहा, "अगर जरूरत पड़ी, तो हम इससे भी बड़े स्तर पर एक नया आंदोलन शुरू करेंगे।"
इसके बाद दीपके डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के पास स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे।
बाद में अपने घर पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल पर सवाल उठाया।
दीपके ने कहा, "पैलेट गन के इस्तेमाल की क्या जरूरत थी। किसी के खिलाफ भी पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। वे (छात्र) हमारे देश के नागरिक हैं, आतंकवादी नहीं। चाहे वह (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह ही क्यों न हों, पैलेट गन चलाने का आदेश देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।"
प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉजपा के स्वयंसेवियों द्वारा मनाए गए जश्न के बारे में पूछे जाने पर दीपके ने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं था।
उन्होंने कहा, "स्वयंसेवी 36 दिन तक तेज धूप और बारिश में बैठे रहे। इतनी बड़ी जीत के बाद (जश्न मनाने में) क्या गलत है? चुनाव जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) क्या करती है? स्वयंसेवियों ने भाजपा के लोगों की तरह सड़कों को जाम नहीं किया।"
दीपके ने सवाल किया, "क्या छात्रों के आत्महत्या करने के बाद भी संसद में धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान किए जाने पर भाजपा को जरा भी शर्म महसूस नहीं हुई।"
जब दीपके से पूछा गया कि क्या कॉजपा एक और आंदोलन शुरू करेगी, तो उन्होंने कहा कि सरकार उसे ऐसा करने के लिए मजबूर कर रही है।
कॉजपा संस्थापक ने कहा, "सरकार हमें उसके खिलाफ आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर कर रही है। उसे छात्रों को परेशान करना बंद करना चाहिए। छात्रों में अब भी गुस्सा है, क्योंकि उनका गुस्सा सिर्फ एक मंत्री के खिलाफ नहीं था, बल्कि पूरी सरकार के खिलाफ था। सरकार को अपने रवैये में सुधार करना चाहिए।"
दीपके ने कहा कि आंदोलन ने एक बड़ी जीत हासिल की, क्योंकि युवाओं ने यह दिखा दिया कि वे सरकार पर सवाल उठाने से डरेंगे नहीं।
'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' की आलोचना करते हुए दीपके ने कहा कि देश में कई कानून हैं, लेकिन जब तक उन्हें लागू करने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे, तब तक कुछ भी नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, "तीन दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए त्वरित अदालतों की स्थापना का वादा किया था। लोग भी खुश हुए थे। लेकिन हुआ क्या? मामले की पहली ही सुनवाई इसलिए टाल दी गई, क्योंकि सीबीआई के वकील पेश नहीं हुए।"
भाषा देवेंद्र पारुल
पारुल
2907 2256 छत्रपति संभाजीनगर