अमृतपाल की रिहाई की मांग को लेकर 'वारिस पंजाब दे' का प्रदर्शन, पुलिस के साथ झड़प
पारुल
- 29 Jul 2026, 11:32 PM
- Updated: 11:32 PM
चंडीगढ़, 29 जुलाई (भाषा) जेल में बंद खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह और बंदी सिंहों (सिख कैदियों) की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे 'अकाली दल वारिस पंजाब दे' के समर्थकों की बुधवार को चंडीगढ़ पुलिस से झड़प हो गई।
प्रदर्शनकारियों की पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास का घेराव करने की योजना थी। हालांकि, पुलिस ने उन्हें मान के आवास की तरफ मार्च करने से रोक दिया।
चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शनकारियों के जबरन मान के आवास की ओर बढ़ने की कोशिश करने के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास के पास भारी पुलिस बल और दंगा-रोधी वाहन तैनात किए।
चंडीगढ़ की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कंवरदीप कौर के मुताबिक, इसके बाद हुई झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें से कुछ को गंभीर चोट आई है। उन्होंने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
इससे पहले, 'अकाली दल वारिस पंजाब दे' ने अमृतपाल और बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री के आवास का घेराव करने की घोषणा की थी। बंदी सिंह वे सिख कैदी हैं, जिन्हें 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के दौरान आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता के मामलों में दोषी ठहराया गया था।
बुधवार को अमृतपाल और बंदी सिंहों के पोस्टर लिए बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मोहाली के गुरुद्वारा अंब साहिब से चंडीगढ़ की ओर मार्च किया। उनके साथ तलवारें और अन्य पारंपरिक हथियार लिए निहंग भी थे।
पुलिस के अनुसार, अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह और पार्टी के प्रमुख नेता मनप्रीत सिंह अयाली भी प्रदर्शनकारियों में शामिल थे।
मार्च के मद्देनजर चंडीगढ़ पुलिस ने बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया था। प्रदर्शनकारियों को केंद्र-शासित प्रदेश की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बुड़ैल जेल के पास मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर अवरोधक लगाए थे।
एक प्रदर्शनकारी पानी की बौछार करने वाले वाहन पर चढ़ गया और उसने वाहन की दिशा भीड़ से दूसरी ओर मोड़ दी। देखते ही देखते कुछ और प्रदर्शनकारी भी वाहन पर चढ़ गए। इसके बाद, प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़ दिए और चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे।
एसएसपी कौर ने कहा, ''प्रदर्शनकारियों को गोशाला चौक पर रोका गया और चेतावनी दी गई कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा-163 लागू होने के कारण वे आगे नहीं बढ़ सकते हैं। हालांकि, वे हिंसक हो गए और अवरोधक तोड़ दिए। उनमें से कुछ के पास तलवारें और अन्य खतरनाक हथियार थे।''
कौर ने कहा कि पुलिस ने पूरी तरह संयम बरता। उन्होंने कहा, ''जब प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़े तो हमने उन्हें कई जगहों पर रोका और उनके नेताओं से अपने समर्थकों को रोकने की अपील की।''
कौर के मुताबिक, संगठन के नेताओं के आगे नहीं बढ़ने के अनुरोध के बावजूद कुछ समर्थक नहीं माने और आगे बढ़ते रहे, जिससे शहर में यातायात जाम लग गया।
चंडीगढ़ के पुलिस महानिरीक्षक पुष्पेंद्र कुमार और कुछ पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें आगे बढ़ने से रोकने में नाकाम रहे।
प्रदर्शनकारी पंजाब के मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) को ज्ञापन सौंपने के बाद ही वापस लौटे। कुछ प्रदर्शनकारी फिर भी आगे बढ़ने पर अड़े हुए थे, जिन्हें हिरासत में ले लिया गया।
'वारिस पंजाब दे' समूह खडूर साहिब से लोकसभा सदस्य अमृतपाल और बंदी सिखों की रिहाई की मांग कर रहा था।
अमृतपाल 2023 में अजनाला पुलिस थाने पर हुए हमले से जुड़े मामले के सिलसिले में फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत उसकी हिरासत 22 अप्रैल को समाप्त हो गई थी।
भाषा सुरभि पारुल
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2907 2332 चंडीगढ़