कावेरी जल बंटवारे पर फैसला लेने का अधिकार केवल सीडब्ल्यूएमए के पास है : द्रमुक
माधव
- 30 Jul 2026, 01:44 PM
- Updated: 01:44 PM
चेन्नई, 30 जुलाई (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता टी. के. एस. एलनगोवन ने बृहस्पतिवार को कहा कि कर्नाटक सरकार का कावेरी नदी पर कोई अधिकार नहीं है और जल बंटवारे का फैसला करने का अधिकार केवल कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के पास है।
एलनगोवन ने मेकेदातु बांध परियोजना के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए यह टिप्पणी की। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब खबरें हैं कि कर्नाटक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को इस आधार पर लौटा दिया गया कि वह कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले और उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के अनुरूप नहीं है।
द्रमुक नेता ने कहा, ''एक बार न्यायाधिकरण का गठन हो जाने के बाद उसके अधिकार क्षेत्र में कोई अन्य हस्तक्षेप नहीं कर सकता।''
केंद्र ने 2018 में तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के बीच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद को सुलझाने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) का गठन किया था। इस बोर्ड में नदी के तटवर्ती राज्यों के सदस्यों के अलावा, केंद्र का एक नामित सदस्य भी शामिल है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और कर्नाटक के उनके समकक्ष डी. के. शिवकुमार के बीच कावेरी विवाद पर प्रस्तावित बैठक के बारे में पूछे जाने पर द्रमुक के प्रवक्ता ने इस पहल को ''महज दिखावा'' करार दिया।
एलनगोवन ने 'पीटीआई-वीडियो' से कहा, ''कर्नाटक के मुख्यमंत्री से बात करने का क्या फायदा? वह तो मेकेदातु में बांध बनाने के अपने फैसले पर अड़े हुए हैं।''
उन्होंने कहा कि बातचीत करने के बजाय न्यायाधिकरण से अपील की जानी चाहिए कि वह इस बांध के निर्माण पर रोक लगाए।
भ्रष्टाचार निरोधक एवं सतर्कता निदेशालय (डीवीएसी) द्वारा पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए द्रमुक नेता ने कहा कि बालाजी इस घटनाक्रम से बिल्कुल विचलित नहीं हैं।
उन्होंने कहा, ''उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं है। उनका कहना है कि मैं हर स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हूं।''
एलनगोवन ने विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्य सचिव एम. वीरापांडियन के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि तमिलनाडु के अधिकारों पर जब भी कोई खतरा आएगा, द्रविड़ दल और वामपंथी दल एकजुट होकर उसका मुकाबला करेंगे।
उन्होंने इस रुख से सहमति जताते हुए दोनों दलों की वैचारिक समानता का उल्लेख किया। एलनगोवन ने कहा, ''हम लगभग 50-60 वर्षों तक साथ रहे हैं... वैचारिक रूप से भी हम एक साथ हैं।'' उन्होंने कहा कि दोनों दल तमिलनाडु के लोगों के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं।
'तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन' द्वारा यह आरोप लगाए जाने के मुद्दे पर कि सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा पाठ्यक्रमों की 151 सीटों में से सात सीटें अखिल भारतीय कोटे में चली गईं, एलनगोवन ने विरोधियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सीटें बचाने के लिए ठोस कदम उठाने के बजाय विरोधी बिना किसी आधार के इस चूक के लिए द्रमुक को दोषी ठहरा रहा है।
करूर भगदड़ मामले में मृतकों के 41 परिजनों को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए तमिलनाडु सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय का रुख किए जाने के प्रस्ताव पर एलनगोवन ने कहा कि सरकारी नौकरियों में नियुक्तियां केवल तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (टीएनपीएससी) और रोजगार कार्यालयों के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का प्रावधान है, लेकिन दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है।
इस बीच, तमिलागा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार को झटका देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पिछले वर्ष करूर में भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने कहा कि इससे भविष्य में इसी प्रकार की मांगों की बाढ़ आ जाएगी।
न्यायमूर्ति सी. वी. कार्तिकेयन और न्यायमूर्ति आर. शक्तिवेल की खंडपीठ ने कहा कि सरकारी विभागों में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अनेक अन्य लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।
भाषा
गोला माधव
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