राष्ट्रमंडल खेल : भारोत्तोलक मार्टिना देवी पांचवें स्थान पर रहीं
नमिता
- 30 Jul 2026, 09:45 PM
- Updated: 09:45 PM
(अपराजिता उपाध्याय)
ग्लास्गो, 30 जुलाई (भाषा) भारतीय भारोत्तोलक मार्टिना देवी मेबाम का राष्ट्रमंडल खेलों में पदार्पण बृहस्पतिवार को भावनाओं से भरा रहा जब यह 18 वर्षीय खिलाड़ी मुकाबले से बाहर होने की कगार से वापसी करने में सफल रहीं लेकिन पदक से चूककर महिलाओं के 86 किग्रा से अधिक भारवर्ग में पांचवें स्थान पर रहीं।
मणिपुर की मार्टिना ने स्नैच में 105 किग्रा और क्लीन एवं जर्क में 140 किग्रा सहित कुल 245 किग्रा वजन उठाया। उनका कुल भार न्यूजीलैंड की तुई अलोफा पटोलो (115 किग्रा और 130 किग्रा) के बराबर रहा।
हालांकि कम असफल प्रयासों के आधार पर पटोलो को चौथा स्थान मिला।
इंग्लैंड की दो बार की ओलंपिक पदक विजेता एमिली कैंपबेल ने कुल 278 किग्रा (115 किग्रा और 163 किग्रा) वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीतते हुए अपना खिताब बरकरार रखा। इस दौरान उन्होंने क्लीन एवं जर्क में राष्ट्रमंडल और खेलों का रिकॉर्ड भी तोड़ा।
मलेशिया की सिटी अकिलाह फरहाना द्रामन ने 253 किग्रा (113 किग्रा और 140 किग्रा) वजन उठाकर रजत पदक जीता जबकि कनाडा की एटा मे लव ने 250 किग्रा (106 किग्रा और 144 किग्रा) वजन के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया।
मार्टिना की शुरुआत दबाव भरी रही। वह स्नैच में 103 किग्रा के अपने शुरुआती दोनों प्रयासों में असफल रहीं और प्रतियोगिता से बाहर होने की कगार पर पहुंच गईं।
ऐसे में मुख्य कोच विजय शर्मा ने रणनीतिक फैसला लेते हुए तीसरे प्रयास के लिए फिर से 103 किग्रा की जगह भार बढ़ाकर 105 किग्रा कर दिया। यह दांव सफल रहा और मार्टिना ने बेहद सहजता के साथ यह भार उठाकर प्रतियोगिता में अपनी चुनौती बरकरार रखी।
इस सफलता के बाद राहत की भावना इतनी प्रबल थी कि मंच से उतरकर पर्दे के पीछे जाते समय युवा खिलाड़ी की आंखों से आंसू निकल पड़े।
इसके बाद भारतीय टीम ने क्लीन एवं जर्क में उनके शुरुआती प्रयास के लिए 140 किग्रा भार तय किया जो प्रतियोगिता में दूसरा सबसे अधिक शुरुआती भार था। मार्टिना ने इसे पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक उठा लिया।
पदक की दौड़ में बने रहने के लिए उन्हें अधिक भार उठाने की जरूरत थी लेकिन 144 किग्रा के दूसरे प्रयास में वह सफल नहीं हो सकीं।
उन्हें 146 किग्रा के अंतिम प्रयास में भी निराशा हाथ लगी और इसके साथ ही उनका अभियान समाप्त हो गया। मंच से उतरते समय वह एक बार फिर भावुक हो गईं।
भाषा सुधीर नमिता
नमिता
3007 2145 ग्लास्गो