अन्नाद्रमुक प्रमुख ने कावेरी विवाद पर सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने की मांग की
वैभव
- 31 Jul 2026, 02:10 PM
- Updated: 02:10 PM
चेन्नई, 31 जुलाई (भाषा) अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के महासचिव ई. के. पलानीस्वामी ने कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी का पानी छोड़ने से इनकार किए जाने को लेकर तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार से कड़ा रुख अपनाने का आग्रह करते हुए शुक्रवार को मांग की कि तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
पलानीस्वामी ने कहा कि राज्य के नदी जल अधिकारों और कृषि हितों की रक्षा के लिए यह बैठक बुलायी जानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह मांग भी की कि सरकार 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए अपने वादे को आगामी कृषि बजट में सहकारी कृषि ऋण पूरी तरह माफ करके पूरा करे।
पलानीस्वामी ने एक बयान में कहा, ''उच्चतम न्यायालय ने कावेरी नदी के पानी के तटवर्ती राज्यों के बीच बंटवारे को लेकर स्पष्ट फैसला दिया है। इसके अनुसार कर्नाटक को जून में तमिलनाडु के लिए 9.19 अरब घन फुट (टीएमसी) पानी छोड़ना था, लेकिन उसने केवल 2.91 अरब घन फुट पानी छोड़ा। जुलाई में 31.24 अरब घन फुट पानी छोड़ा जाना था लेकिन कर्नाटक ने इस महीने के लिए निर्धारित मात्रा में अब तक पानी नहीं छोड़ा है।''
अन्नाद्रमुक प्रमुख ने कहा कि कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को अपने जलाशयों से 29 जुलाई से 15 दिन तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था।
उन्होंने कहा, ''कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने भी कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को इस आदेश का पालन करने का निर्देश दिया।''
पलानीस्वामी ने कहा, ''हालांकि, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेश को लागू करने से इनकार कर दिया और इसके बजाय कर्नाटक में सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा की है।''
उन्होंने कहा, ''शिवकुमार ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि अगर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय बातचीत के लिए बेंगलुरु आते हैं तो वह उन्हें हेलीकॉप्टर से कर्नाटक के जलाशयों का निरीक्षण कराएंगे।''
पलानीस्वामी ने दावा किया, ''इन परिस्थितियों में अगर कावेरी नदी पर मेकेदातु में बांध बनाया जाता है तो तमिलनाडु को एक बूंद भी पानी नहीं मिलेगा। पेयजल के लिए इस नदी पर निर्भर 20 से अधिक जिलों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ेगा और डेल्टा क्षेत्र के जिले रेगिस्तान में बदल जाएंगे।''
उन्होंने मेकेदातु परियोजना पर केंद्र के इस जवाब को लेकर मुख्यमंत्री विजय की ''लगातार चुप्पी'' की कड़ी निंदा की कि जलाशय के निर्माण के लिए तटवर्ती राज्यों की सहमति जरूरी नहीं है। उन्होंने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों की ''अवहेलना करने'' के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री की भी कड़ी आलोचना की।
पलानीस्वामी ने कहा, ''मैं तमिलनाडु सरकार से आग्रह करता हूं कि वह राज्य के किसानों की जीवनरेखा कावेरी नदी की रक्षा और मेकेदातु परियोजना को रोकने के उपायों पर चर्चा के लिए तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाए।''
पलानीस्वामी ने आगामी कृषि बजट में सहकारी कृषि ऋण पूरी तरह माफ किए जाने की मांग की और कहा कि टीवीके ने 2026 के चुनाव में पांच एकड़ से कम भूमि वाले किसानों के सहकारी कृषि ऋण पूरी तरह माफ करने और पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों के ऋण में 50 प्रतिशत की छूट देने का वादा किया था।
उन्होंने कहा, ''सत्ता में आने के बाद सरकार ने 75,000 रुपये तक का ऋण लेने वाले सीमांत और छोटे किसानों के लिए ही पूरा ऋण माफ करने की घोषणा करके नाटक किया, जबकि इससे अधिक बकाया वाले किसानों को मिलने वाली राहत केवल 35,000 रुपये तक सीमित कर दी।''
उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु के किसान इस ''भ्रामक'' घोषणा के विरोध में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
पलानीस्वामी ने कहा, ''टीवीके सरकार को छह अगस्त 2026 को कृषि बजट पेश करते समय अपने चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादे के अनुसार सभी सहकारी कृषि ऋण पूरी तरह माफ करने की घोषणा करनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो अन्नाद्रमुक सत्तारूढ़ गठबंधन के खिलाफ राज्यव्यापी व्यापक आंदोलन शुरू करेगी।''
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