छह महीने में निपटाए जाएंगे सीएए के सभी लंबित आवेदन: शुभेंदु अधिकारी
प्रशांत
- 01 Aug 2026, 09:13 PM
- Updated: 09:13 PM
कोलकाता, एक अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत लंबित सभी नागरिकता आवेदनों का निस्तारण अगले छह महीनों के भीतर कर दिया जाएगा।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह कानून नागरिकता देने के लिए बनाया गया है, किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं।
न्यू टाउन में आयोजित सीएए प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम में, जहां उत्तर 24 परगना जिले के मतुआ समुदाय के लगभग 300 लोगों को भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र दिए गए, अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य की पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को इस कानून के बारे में गुमराह किया।
उन्होंने कहा, "सीएए का उद्देश्य नागरिकता देना है, किसी की नागरिकता छीनना नहीं।"
उन्होंने पात्र लोगों से अधिनियम के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने की अपील करते हुए कहा कि आने वाले महीनों में और अधिक नागरिकता प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे।
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए छह समुदायों के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इन छह समुदायों में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं।
राज्य में सीएए के क्रियान्वयन की प्रगति का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक 23,956 नागरिकता प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से 5,966 प्रमाणपत्र पिछले 11 सप्ताह में जारी किए गए हैं, जब से राज्य में नयी भाजपा सरकार बनी है।
उन्होंने बताया कि पूरे राज्य से अब तक कुल 2,30,605 आवेदन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि इनमें सबसे अधिक लाभार्थी नदिया जिले में हैं, जहां 10,191 नागरिकता प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इसके बाद उत्तर 24 परगना जिले में 8,930 प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं।
अधिकारी ने कहा, "केंद्रीय गृह सचिव के साथ चर्चा के बाद सीएए आवेदनों के तेजी से निपटारे के लिए जिलाधिकारियों को कानूनी और प्रशासनिक अधिकार सौंपने की प्रक्रिया एक महीने के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।"
उन्होंने कहा कि गुजरात और राजस्थान में जिलाधिकारियों को पहले से ही यह अधिकार प्राप्त है।
पड़ोसी देशों से आए धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के शरणार्थियों को नागरिकता देने के भाजपा के वादे का उल्लेख करते हुए अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले एक रैली में मतुआ समुदाय को आश्वासन दिया था कि बांग्लादेश से आए पात्र शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इसके बाद संसद ने सीएए पारित किया और कोविड-19 महामारी के कारण इसके क्रियान्वयन में देरी के बाद 6 मार्च, 2024 को इसके नियम अधिसूचित किए गए।
पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए अधिकारी ने आरोप लगाया कि उसने जानबूझकर सीएए को राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से जोड़कर लोगों में भ्रम फैलाया।
उन्होंने कहा, "पिछली सरकार ने सीएए को एनआरसी के रूप में पेश किया और लोगों, खासकर मुस्लिम समुदाय को गुमराह किया। झूठा प्रचार किया गया कि सीएए के तहत आवेदन करने से नौकरी, राशन लाभ या लक्ष्मीर भंडार वित्तीय सहायता योजना का लाभ छिन जाएगा।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की गलत सूचनाओं के आधार पर हुए प्रदर्शनों के दौरान सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने कहा, "आज सच्चाई सामने आ गई है और विपक्ष के विधायक भी स्वेच्छा से इस सरकारी कार्यक्रम में शामिल हुए हैं।"
अधिकारी ने कहा कि सरकार ऐसे पात्र सीएए लाभार्थियों को जमानत दिलाने के लिए कदम उठाएगी, जो दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं के कारण अब भी कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं या जेल में हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस को निर्देश दिया गया है कि सीएए से जुड़े मामलों में किसी भी पात्र आवेदक को परेशान ना किया जाए।
अधिकारी ने कहा कि नागरिकता प्रमाणपत्र जारी होने के बाद राज्य सरकार लाभार्थियों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया में मदद करेगी और पात्र आवेदकों को समयबद्ध तरीके से अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराएगी।
कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों की मौजूदगी में नागरिकता प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाली एक महिला शरणार्थी ने भी अपनी बात रखी। उसने कहा, "मैं बांग्लादेश के बागेरहाट में रहती थी और 2006 में भारत आई थी। मैं इतने वर्षों तक डर के माहौल में रही। मैं प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को धन्यवाद देती हूं।"
भाषा अमित प्रशांत
प्रशांत
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