महानदी जल विवाद पर दिल्ली में हुई त्रिपक्षीय बैठक को लेकर बीजद और भाजपा में वाकयुद्ध
दिलीप
- 01 Aug 2026, 10:31 PM
- Updated: 10:31 PM
भुवनेश्वर, एक अगस्त (भाषा) ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी जल विवाद को लेकर शनिवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) के बीच तीखी बयानबाजी हुई।
यह विवाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के दावा किये जाने के बाद शुरू हुआ कि तीन महीने के भीतर इस मुद्दे का समाधान हो जाएगा।
माझी ने यह दावा 30 जुलाई को नयी दिल्ली में महानदी जल विवाद को लेकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल की अध्यक्षता में हुई त्रिपक्षीय बैठक में शामिल होने के बाद किया था। इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए थे।
नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजद ने 'ट्रिपल इंजन सरकार' (ओडिशा, छत्तीसगढ़ और केंद्र में भाजपा सरकार) पर विवाद का समाधान करने में विफल रहने का आरोप लगाया।
बीजद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवी प्रसाद मिश्रा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया, "तीन सरकारें होने के बावजूद राज्य की भाजपा सरकार महानदी जल विवाद का समाधान करने में विफल रही है। ओडिशा की भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है।"
वहीं, भाजपा की ओडिशा इकाई के महासचिव बिरंची नारायण त्रिपाठी ने एक अलग संवाददाता सम्मेलन में राज्य की पिछली बीजद सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि उसी के कारण महानदी जल विवाद पैदा हुआ। त्रिपाठी ने कहा, "महानदी के ऊपरी हिस्से में छत्तीसगढ़ सरकार ने तत्कालीन बीजद सरकार की अक्षमता के कारण सभी बैराज बनाए। अब जब मुख्यमंत्री माझी इस मुद्दे को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं, तो क्षेत्रीय दल राजनीतिक लाभ लेने के लिए शोर मचा रहा है।"
भाजपा नेता ने कहा, "2016-17 में जब छत्तीसगढ़ महानदी के ऊपरी हिस्से में बैराज बना रहा था, तब तत्कालीन बीजद सरकार के जल संसाधन सचिव ने कहा था कि इससे ओडिशा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बीजद के नरम रुख का फायदा उठाकर छत्तीसगढ़ ने ऐसे ढांचे बना दिए, जो अब ओडिशा में पानी के निर्बाध प्रवाह में बाधा बन रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदार कौन है?"
बीजद उपाध्यक्ष मिश्रा ने मुख्यमंत्री माझी से अपने उस दावे का आधार बताने को कहा कि तीन महीने में विवाद सुलझ जाएगा। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार को तुरंत बैठक में हुई चर्चा को सार्वजनिक करना चाहिए। भाजपा सरकार लोगों को गुमराह कर रही है, क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार ओडिशा की चिंताओं पर कोई ध्यान नहीं दे रही है।"
मिश्रा ने कहा, "ओडिशा के हितों से समझौता करके भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। चूंकि मुख्यमंत्री माझी स्वयं बैठक में शामिल हुए थे, इसलिए उनकी नैतिक जिम्मेदारी है कि वे नयी दिल्ली में हुई चर्चा और उसके नतीजों के बारे में जनता को जानकारी दें। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।"
बीजद विधायक एवं पूर्व मंत्री अरुण कुमार साहू एवं पार्टी के वरिष्ठ महासचिव भृगु बक्सीपात्र ने भी महानदी जल विवाद का समाधान करने में भाजपा सरकार की ''विफलता'' की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि ओडिशा में आई विनाशकारी बाढ़ की स्थिति पूरी तरह मानव निर्मित है।
बीजद ने एक बयान में आरोप लगाया कि महानदी के जल प्रबंधन को लेकर छत्तीसगढ़ ओडिशा के साथ सहयोग नहीं कर रहा है। पार्टी ने कहा कि बार-बार आग्रह के बावजूद छत्तीसगढ़ ने सरडीही बैराज के पास नया गेज (जल माप केंद्र) स्थापित करने से इनकार कर दिया है और वह ओडिशा सरकार की चिंताओं को लगातार नजरअंदाज कर रहा है।
बीजद ने आरोप लगाया, ''छत्तीसगढ़ की मनमानी कार्रवाइयों के कारण हीराकुंड जलाशय की सुरक्षा के लिए बनाए गए रूल कर्व नीति को प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रहा है।''
'रूल कर्व नीति' जलाशय प्रबंधन से जुड़ी एक तकनीकी नीति है, जिसके तहत किसी बांध या जलाशय में साल के अलग-अलग समय पर कितना पानी जमा रखा जाना चाहिए और कितना छोड़ा जाना चाहिए, इसका एक निर्धारित मानक तय किया जाता है।
भाषा अमित दिलीप
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