सुनेत्रा पवार पर कांग्रेस की टिप्पणी को लेकर सपकाल बोले, 'गूंगी गुड़िया' शब्द न अपमानजनक, न असंसदीय
नरेश
- 04 Aug 2026, 08:27 PM
- Updated: 08:27 PM
मुंबई, चार अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मंगलवार को अपनी पार्टी द्वारा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के लिए इस्तेमाल किए गए "गूंगी गुड़िया" शब्द का बचाव करते हुए कहा कि यह शब्द ना तो अपमानजनक है और ना ही असंसदीय।
सपकाल ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को आलोचना को सकारात्मक रूप से स्वीकार करना चाहिए।
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि यदि लोग आलोचना सहन नहीं कर सकते तो उन्हें राजनीति छोड़ देनी चाहिए।
सपकाल ने यहां गांधी भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 'गूंगी गुड़िया' शब्द का इस्तेमाल पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए भी किया गया था, जिन्होंने बाद में अपने काम से नेतृत्व क्षमता साबित की और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें "दुर्गा" कहा था। उन्होंने कहा, "सुनेत्रा पवार को भी अपने काम के जरिए अपना नेतृत्व साबित करना चाहिए।"
सपकाल ने कहा कि ये टिप्पणी राजनीतिक थी, व्यक्तिगत नहीं और सार्वजनिक जीवन में आलोचना को सकारात्मक रूप से लिया जाना चाहिए।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें राकांपा नेता धनंजय मुंडे ने बीड जिले की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर एक पत्रकार के सवाल से सुनेत्रा पवार को बचाने की कोशिश की थी।
वीडियो में मुंडे को पत्रकार के सवाल के बीच में हस्तक्षेप करते हुए देखा गया। सुनेत्रा पवार ने सवाल का जवाब नहीं दिया और मुंडे द्वारा संवाद खत्म होने की घोषणा के बाद वह वहां से चली गईं।
कांग्रेस ने उक्त वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा करते हुए उन्हें "गूंगी गुड़िया" कहा था।
सुनेत्रा पवार बीड जिले की प्रभारी मंत्री हैं, जहां मुंडे के करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड, मस्साजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या मामले में मुख्य आरोपी हैं।
मुंडे और पवार की प्रेस वार्ता का जिक्र करते हुए सपकाल ने कहा कि पवार के बगल में बैठे स्थानीय विधायक (मुंडे) ने कथित तौर पर सवाल पूछ रहे पत्रकार को चुप कराने की कोशिश की, जबकि उपमुख्यमंत्री ने न तो हस्तक्षेप किया और न ही जवाब दिया।
कांग्रेस की आलोचना को स्पष्ट करते हुए सपकाल ने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री अब तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप रही हैं और पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से बचती रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पवार ने अपनी पार्टी से जुड़े कई मुद्दों पर भी बयान नहीं दिया, जिनमें राकांपा प्रमुख अजित पवार की मौत से जुड़े विमान हादसे की जांच, इस मामले में कथित रूप से आपराधिक मामला दर्ज नहीं किए जाने और उनके (सपकाल) अनुसार भाजपा द्वारा उनसे वित्त विभाग वापस लिये जाने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इस बीच, राकांपा प्रवक्ता सूरज चव्हाण और कुछ अन्य लोग दक्षिण मुंबई स्थित कांग्रेस कार्यालय पहुंचे और "गूंगी गुड़िया" टिप्पणी के विरोध में नारेबाजी की। उस समय सपकाल कार्यालय में मौजूद थे। बाद में प्रदर्शनकारी वहां से चले गए।
सावंत ने राकांपा की प्रतिक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी पार्टी "गुंडागर्दी" के आगे नहीं झुकेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ राकांपा हिंसा का सहारा लेकर वैध राजनीतिक आलोचना को दबाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने एक बयान में आरोप लगाया कि यह "हमला" (प्रदर्शन) भाजपा के उसके सहयोगी दल पर प्रभाव को दर्शाता है और सवाल किया कि क्या यही वह उद्देश्य था जिसके लिए सत्तारूढ़ गठबंधन सत्ता में आया था।
कांग्रेस ने पुलिस की भी आलोचना करते हुए सवाल किया कि वह घटना को रोकने में विफल क्यों रही। पार्टी ने दावा किया कि विपक्ष के प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस अक्सर भारी सुरक्षा तैनात करती है।
सावंत के बयान में कहा गया, "राजनीति में आलोचना से बचा नहीं जा सकता। यदि आप आलोचना सहन नहीं कर सकते तो आपको राजनीति छोड़ देनी चाहिए। किसी भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया।"
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अजित पवार के परिवार के सदस्यों के परिसरों पर छापेमारी की थी, तब कथित आक्रामक प्रतिक्रिया क्यों नहीं दिखाई गई।
पार्टी ने कहा कि वह डरने वाली नहीं है और "गुंडागर्दी" के आगे नहीं झुकेगी तथा सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाती रहेगी।
सपकाल ने संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि व्यक्तियों द्वारा सरकारी कर्मचारी बनकर वेतन और भत्ते निकालने से जुड़े हालिया फर्जीवाड़े ने गृह विभाग में गंभीर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता को उजागर किया है। फडणवीस के पास गृह विभाग भी है।
उन्होंने इस कथित फर्जीवाड़े की तुलना अयोध्या के राममंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी से करते हुए दावा किया कि महाराष्ट्र के खजाने को भी इसी तरह "लूटा" गया है।
सपकाल ने मुख्यमंत्री से जवाब की मांग की कि बैंक खातों में सीधे पैसे भेजे जाने के बावजूद इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितताएं कैसे हुईं।
कांग्रेस नेता ने मुंबई के श्री सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की भी जांच की मांग की और सरकार से आग्रह किया कि वह इस मामले को "राममंदिर चढ़ावा मामले की तरह दबाने" की कोशिश न करे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की मुंबई में जेन जेड और जेन अल्फा के छात्रों के साथ प्रस्तावित बातचीत के बारे में पूछे जाने पर सपकाल ने कहा कि भागवत को बताना चाहिए कि आरएसएस का औपचारिक पंजीकरण क्यों नहीं हुआ है और संगठन को मिलने वाले चंदे का विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता।
उन्होंने कहा कि संगठन के इतिहास, राष्ट्रीय ध्वज और सामाजिक मुद्दों पर उसके रुख से जुड़े सवालों के जवाब भी दिए जाने चाहिए।
भाषा अमित नरेश
नरेश
0408 2027 मुंबई