परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में झारखंड जाऊंगा: अभिजीत दीपके
सुभाष
- 05 Aug 2026, 01:41 PM
- Updated: 01:41 PM
छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र), पांच अगस्त (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को कहा कि वह झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में झारखंड जाएंगे।
दीपके ने अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर में कॉजपा की कोर टीम की बैठक से पहले संवाददाताओं से कहा कि फिलहाल उनका युवा आंदोलन ''दबाव बनाने वाले समूह' के रूप में काम करेगा क्योंकि इस समय भारत को इसकी जरूरत है।
उन्होंने कहा कि बैठक में, मीडिया और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं पर लोगों के घटते भरोसे पर चर्चा की जाएगी ओर साथ ही एथनॉल मिश्रित ईंधन और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में नौकरी के अभ्यर्थी 29 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) तथा अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के स्वतंत्र पैनल से कराई जाए।
दीपके से जब पूछा गया कि क्या वह झारखंड में हो रहे इस आंदोलन का समर्थन करेंगे, तो उन्होंने कहा, ''हम निश्चित रूप से झारखंड जाएंगे। हम उनके साथ खड़े होंगे और आंदोलन में उनकी हर मांग का समर्थन करेंगे।''
कॉजपा के राजनीति में आने के सवाल पर दीपके ने कहा कि मीडिया उनकी पार्टी से ज्यादा उत्साहित नजर आ रहा है।
उन्होंने कहा, ''लोगों का न्यायपालिका, राजनीति, मीडिया और निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं से भरोसा उठता जा रहा है। हमारे आंदोलन को पूरे देश से समर्थन मिला। जैसे-जैसे आंदोलन आगे बढ़ा, उसका दायरा केवल शिक्षा से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इन संस्थाओं से जुड़े सवाल भी सामने आए। इसलिए इन संस्थाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाने वाले एक जन समूह की जरूरत है।''
दीपके ने कहा कि राजनीतिक दलों की स्थिति ''बहुत खराब'' हो गई है। उन्होंने कहा कि लोग सुबह एक पार्टी को वोट देते हैं, लेकिन शाम तक किसी और पार्टी की सरकार बन जाती है।
उन्होंने दोहराया, ''फिलहाल कॉजपा दबाव बनाने वाले एक समूह के रूप में काम करेगी, क्योंकि इस समय देश को एक दबाव समूह की ही जरूरत है।''
कॉजपा की कोर टीम की बैठक के बारे में दीपके ने कहा, ''नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन को पूरे देश से जबरदस्त समर्थन मिला। इससे हमारी जिम्मेदारी बढ़ गई है और लोगों की हमसे अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। इस बैठक में हम तय करेंगे कि संगठन का विस्तार किस तरह किया जाए और भविष्य की रूपरेखा भी तैयार करेंगे।''
कॉजपा के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आगे भी पार्टी के मार्गदर्शक बने रहेंगे और कॉजपा विभिन्न मुद्दों पर उनसे सलाह लेती रहेगी।
दास ने कहा कि वे राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षाओं संबंधी अन्य अनियमितताओं के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के हालिया प्रदर्शनों में शामिल विद्यार्थियों के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकियां वापस लेने की मांग भी करेंगे।
उन्होंने कहा, ''हम इस मुद्दे पर सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे हैं।''
दास ने यह भी कहा कि संगठन हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों को कानूनी और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी काम कर रहा है।
कॉजपा की कोर टीम की बैठक बाद में शुरू हुई, जो बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी। दीपके ने कहा, ''बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी हम कल देंगे।''
बैठक में दीपके और दास के अलावा कॉजपा के प्रतिनिधि अशुतोष रांका, रत्ना सिंह सहित अन्य सदस्य भी शामिल हुए।
युवाओं के नेतृत्व में कॉजपा द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर किया गया आंदोलन 25 जुलाई को समाप्त हुआ था। 26 दिन के अनशन के दौरान सोनम वांगचुक भी आंदोलन में शामिल हुए थे। इस दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक को लेकर जनता के आक्रोश को व्यक्त करने के लिए हजारों छात्र एकत्र हुए थे।
दीपके जून में अमेरिका से भारत लौटे थे और उन्होंने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के विरोध में आंदोलन का नेतृत्व किया। इस आंदोलन में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में युवा दिल्ली पहुंचे और उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी।
देशभर के 'जेन-जेड' युवाओं से मिले व्यापक समर्थन के बाद यह आंदोलन तेज हुआ और पिछले सप्ताह धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
कॉजपा का आंदोलन देश के कई शहरों तक फैल गया। हालांकि, कई स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसके बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बिहार में पुलिस ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन पर मामले दर्ज किए।
भाषा गोला सुभाष
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