बारिश से प्रभावित पुंछ में पहली प्राथमिकता पुनर्वास, आकलन के बाद विशेष पैकेज पर विचार : उमर
नरेश
- 05 Aug 2026, 04:01 PM
- Updated: 04:01 PM
जम्मू, पांच अगस्त (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि बादल फटने और अचानक आई बाढ़ से प्रभावित पुंछ और राजौरी के इलाकों में बचाव और राहत कार्यों के बाद सरकार की अब प्राथमिकता पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर है।
उन्होंने साथ ही संकेत दिया कि नुकसान का व्यापक आकलन करने के बाद ही विशेष राहत पैकेज के बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा।
भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के लिए उमर बुधवार सुबह पुंछ के सुरनकोट इलाके में पहुंचे। बारिश और भूस्खलन से पुंछ जिले के इस इलाके में 16 लोगों की मौत हो गई और छह अन्य लोग लापता हैं।
उन्होंने मुर्रा गांव से अपने दौरे की शुरुआत की, जहां वे एक ग्रामीण से मिले, जिसने 19 जुलाई को बादल फटने के कारण आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन में अपने परिवार के आठ सदस्यों को खो दिया था।
उमर ने सुरनकोट में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि बादल फटने से आई हालिया बाढ़ और भूस्खलन के बाद सबसे ज़रूरी काम बचाव कार्यों में तेज़ी लाना, लापता लोगों का पता लगाना और राहत कार्य करना था।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''अब पुनर्वास और पुनर्निर्माण का समय आ गया है। हमें उन लोगों का पुनर्वास करना है जिनके घर पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं और उन लोगों की भी मदद करनी है जिनके घर अब भी खड़े हैं, लेकिन उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है।''
उन्होंने कहा कि इस आपदा से न केवल रिहायशी मकानों को, बल्कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिनमें सड़कें, स्कूल, अस्पताल और अन्य सरकारी संपत्तियां शामिल हैं।
उमर ने कहा कि जमीनी हालात का जायजा लेने और प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद देने के उपाय तय करने के लिए सबसे अधिक प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद, वह पुंछ में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार ज़िला प्रशासन की ओर से भेजे गए किसी भी प्रस्ताव पर भी विचार करेगी।
उमर ने 2014 में आई भयावह बाढ़ के बाद किए गए राहत कार्यों का ज़िक्र करते हुए कहा कि उस समय पूरे जम्मू-कश्मीर में छह महीने का मुफ्त राशन दिया गया था। उन्होंने कहा कि अगर जिला प्रशासन सबसे अधिक प्रभावित इलाकों, विशेषकर उन जगहों पर जहां खड़ी फ़सलें बर्बाद हुई हैं के लिए ऐसा ही कोई प्रस्ताव देता है, तो उस पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नुकसान केवल पुंछ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी राजौरी में भी भारी नुकसान हुआ है।
उन्होंने कहा, ''मैं आज यहां खड़े होकर विशेष रूप से पुंछ के लिए किसी पैकेज की घोषणा नहीं कर सकता। मैं कल (बृहस्पतिवार को) राजौरी का दौरा करूंगा और उसके बाद हम श्रीनगर में समग्र स्थिति की समीक्षा करेंगे। यदि किसी विशेष राहत पैकेज की आवश्यकता हुई, तो हम निश्चित रूप से आवश्यक व्यवस्था करेंगे।''
उमर ने हालांकि स्पष्ट किया कि राहत पैकेजों की घोषणा तभी की जा सकती है, जब आकलन की प्रक्रिया और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी हो जाएं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
उन्होंने कहा,'' कोष आवंटित है और मंजूर भी हो चुके हैं। जैसे ही हमें लाभार्थियों के बैंक खातों की बाकी जानकारी मिलेगी, पैसे उनके खातों में जमा कर दिए जाएंगे।''
मुख्यमंत्री कार्यालय ने इससे पहले सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा था कि उमर ने सुरनकोट के मुर्रा का दौरा किया और हाल ही में बादल फटने की घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
पोस्ट में कहा गया, ''उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति एकजुटता व्यक्त की और उन्हें सरकार की ओर से हरसंभव सहायता और समर्थन का भरोसा दिलाया।''
सुरनकोट इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा, जहां 19 जुलाई की बारिश से जुड़ी घटनाओं में सबसे अधिक लोगों की जान गई। मूसलाधार बारिश के कारण बादल फटे, अचानक बाढ़ आयी और भूस्खलन हुआ, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही मची। कई घर और वाहन बह गए, सड़कें तथा अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और जिले भर में सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए।
उमर ने 19 जुलाई को जम्मू में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर भारी बारिश के बाद की स्थिति की समीक्षा की थी। उन्होंने पुंछ और उससे सटे राजौरी जिले में वर्षा संबंधी घटनाओं में जान गंवाने वालों के परिजनों को छह-छह लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की थी। राजौरी में इस आपदा में तीन लोगों की मौत हुई थी, जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता है।
भाषा
धीरज नरेश
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