मुझे गंभीरता से विचार करना पड़ेगा कि मैं इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं: विस अध्यक्ष महाना
पारुल
- 05 Aug 2026, 04:31 PM
- Updated: 04:31 PM
लखनऊ, पांच अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने मानसून सत्र के दूसरे दिन समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों के आचरण को लेकर गहरी निराशा जताते हुए बुधवार को कहा, "मुझे इस बात पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा कि मैं इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं।"
महाना ने कहा, "मैंने पिछले साढ़े चार वर्षों में जो कुछ भी किया, वह उचित था या नहीं, मैं इसका आत्मावलोकन करूंगा और शीघ्र निर्णय लूंगा।"
हालांकि, सपा विधायकों ने सदन से इस सत्र के लिए निलंबित किए गए पार्टी सदस्य सचिन यादव को बहाल करने और अन्य मांगों को लेकर बुधवार को भी हंगामा किया और आसन के करीब आ गए।
इसके चलते सदन की कार्यवाही पहले आधे घंटे के लिए, फिर 12 बजकर 20 मिनट तक के लिए और उसके बाद एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। एक बजे के बाद कार्यवाही फिर शुरू हुई, लेकिन हंगामे के चलते इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
महाना ने बुधवार को पीठ पर आसीन होते ही सभी सदस्यों से कहा, "पहले आप लोग मेरी बात सुन लें, फिर मैं कोई बात सुनूंगा।"
दरअसल, अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को लेकर सपा सदस्यों ने मंगलवार को जबरदस्त हंगामा किया और आसन के करीब आ गए। इस दौरान फिरोजाबाद जिले के जसराना से विधायक सचिन यादव ने एक पोस्टर लहराया, जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर थी।
हंगामे के बीच महाना ने यादव को पूरे सत्र के लिए सदन से बाहर करने का निर्देश दिया।
विपक्ष के रवैये से आहत महाना ने बुधवार को अपने संबोधन में कहा, "पिछले साढ़े चार वर्षों में मैंने विधायिका की गरिमा और संवैधानिक महत्ता को संरक्षित करने का प्रयास किया। कई दशकों से समाज में विधायिका और विधायकों के बारे में जो धारणा बन रही थी, मुझे उसे लेकर पीड़ा थी।"
उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं है कि कल (मंगलवार) से पहले सदस्य कभी आसन के करीब नहीं आए। आना उनका अधिकार है, लेकिन वे समय और परिस्थितियों के अनुसार अपनी बात कहकर वापस चले गए।"
महाना ने पूर्ववर्ती सपा सरकार में हुए एक प्रसंग की याद दिलाते हुए कहा, "मुझे याद है कि तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बारे में आपत्तिजनक टिप्पपी की थी, जिसका मैंने विरोध किया था। यह बात कार्रवाई में भी दर्ज है।"
उन्होंने कहा, "मेरे विचार से सदन के नेता और मुख्यमंत्री का सम्मान करना सदस्यों का संवैधानिक दायित्व है। सदन के माननीय सदस्य जो शपथ लेते हैं, उसमें भी यह बात निहित है कि वे सदन के नेता का सम्मान करेंगे।"
महाना ने कहा, "अगर हम पार्टी से ऊपर उठकर सदन के नेता का सम्मान नहीं करेंगे, तो यह संस्था तो निष्प्रभावी हो ही जाएगी, साथ ही सभी सदस्यों का मान-सम्मान भी प्रभावित होगा।"
उन्होंने कहा, "वाद-विवाद, सहमति-असहमति लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा बनी रहनी चाहिए। विधायी आचरण की परिधि को लांघना इस संस्था के लिए बेहद हानिकारक होगा।"
महाना ने कहा, "कल सदन में जो कुछ हुआ, उससे मैं बहुत दुखी और निराश हूं। मुझे पहली बार महसूस हुआ कि या तो मेरे प्रयास में कोई कमी रह गई या डॉ. बीआर आंबेडकर की बात सही है कि कमी संविधान में नहीं, बल्कि व्यक्तियों में होगी।"
उन्होंने सचिन यादव के मुख्यमंत्री का पोस्टर लहराने के मामले का जिक्र करते हुए कहा, "कल एक ऐसे सदस्य के आचरण ने मुझे दुखी किया, जिन्हें हम इस सदन का 'रोल माडल' कहते थे। कहीं से भी कोई आता था, तो मैं कहता था कि वह विधानसभा के 'रोल माडल' हैं। मेरे मना करने के बाद भी उन्होंने जैसा बर्ताव किया, जैसी भाषा का इस्तेमाल किया, उससे निश्चित रूप से मेरे मन को पीड़ा हुई है।"
महाना ने कहा कि उनके मना करने के बावजूद सदस्यों ने प्रतिबंधित कार्यवाही से जुड़ी जानकारी मीडियो को दी और सोशल मीडिया पर साझा की, जो उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, "अखिलेश यादव जिस समय मुख्यमंत्री थे, उस समय दो सदस्यों ने अपने कपड़े उतार दिए थे। तब मैंने कहा था कि दो सदस्यों ने कपड़े नहीं उतारे हैं, बल्कि सभी 403 सदस्यों के कपड़े उतरे हैं। इसके बाद भी इस तरह का आचरण है, तो मुझे गंभीरता से विचार करना पड़ेगा कि मैं इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं।"
महाना ने नियम 311 के तहत सदन की कार्यवाही रोककर राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा कराए जाने की नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय की मांग का जिक्र करते हुए कहा, "मैं आपकी बात सुनने को तैयार था। मैंने कहा था कि मैं इसे नियम 311 नहीं, 156 के तहत ले लूंगा। मैंने आपकी गरिमा का ख्याल रखा। लेकिन मेरे व्यवस्था देने से पहले ही विपक्षी सदस्य आसन के करीब आ गए।"
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नियम 311 का मतलब है कि जब कोई गंभीर मामला हो, तो सदन की कार्यवाही रोककर उस पर चर्चा कराई जाए और इस नियमावली में यह व्यवस्था है कि अध्यक्ष की सहमति से चर्चा कराई जाए।
उन्होंने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को देश की आस्था से जुड़ा अहम मुद्दा करार देते हुए कहा, "ऐसे मूल विषय पर हमारा जो अधिकार था, उसके तहत हम चर्चा चाह रहे थे।"
महाना ने पांडेय को विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा, "आपने अपने समय में नियम 311 को नियम 156 (कार्यस्थगन) में परिवर्तित किया था।"
इस पर पांडेय ने कहा, "मैंने ऐसा किया, लेकिन तब इतना महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं था। देश के सामने प्रभु के चढ़ावे में इतनी बड़ी चोरी हो गई और उस पर चर्चा न हो, इसलिए हम लोग सदन की कार्यवाही रोककर चर्चा की मांग कर रहे थे।"
कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने महाना के साढ़े चार साल के कार्यकाल की सराहना की, लेकिन उन्होंने सचिन यादव का निलंबन वापस लेने की मांग भी उठाई।
मोना ने कहा, "सचिन यादव पहली बार विधानसभा सदस्य बने हैं। उन्होंने राजनीति में कुछ ही समय पहले प्रवेश किया है। वह जो भी बात रख रहे थे, समूचे विपक्ष की बात थी।"
मोना ने कहा, "चंदा चोरी पर सबका अपना-अपना मत था। हमारी मांग सिर्फ चर्चा कराने की थी। हमारा अनुरोध है कि सचिन का निलंबन वापस लिया जाए।"
संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने महाना के साढ़े चार साल के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा, "हम आपको इस बात के लिए बधाई देते हैं कि आपने सदन का कुशलतापूर्वक संचालन किया। हम चाहते हैं कि सदन के जितने दिन भी बचे हैं, सदस्य विधायी आचरण का निर्वहन करें।"
सपा सदस्य संग्राम यादव ने कहा, "डॉ. लोहिया कहते थे कि लोकतंत्र चलता है लोक और लाज से। न जाने किन परिस्थितियों में लगातार सदन की अवधि कम की जा रही है, विपक्ष की लगातार अनदेखी की जा रही है, जितना दायित्व सरकार का सदन चलाने का है, उतना ही हमारा भी है।"
यादव ने कहा, "मुख्यमंत्री जी केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यमंत्री नहीं हैं, वह हम सबके मुख्यमंत्री हैं और भाषा एक तरफ से नहीं बिगड़ी है।"
उन्होंने कहा, "विधानसभा की कार्यवाही साढ़े चार साल अनवरत गति से चली है, क्या इसमें विपक्ष का सकारात्मक सहयोग नहीं रहा है।"
भाषा
आनन्द पारुल
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