छत्तीसगढ़ राज्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता मिशन को मंजूरी, पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे
पारुल
- 05 Aug 2026, 04:50 PM
- Updated: 04:50 PM
रायपुर, पांच अगस्त (भाषा) छत्तीसगढ़ में मंत्रिपरिषद ने 'छत्तीसगढ़ राज्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मिशन' को बुधवार को मंजूरी दे दी, जिस पर पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने यह जानकारी दी।
साव ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद ने 'छत्तीसगढ़ राज्य एआई मिशन' को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य राज्य में सुशासन, नयी प्रौद्योगिकी, कौशल विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। यह मिशन पांच वर्षों के लिए होगा, जिस पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
साव के मुताबिक, इस मिशन के तहत 100 एआई डेटा लैब बनाए जाएंगे, पांच उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे, 300 से अधिक एआई स्टार्टअप को सहायता दी जाएगी, छह लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को एआई का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सरकारी कामकाज को आसान और तेज बनाने के लिए 50 से अधिक एआई आधारित सेवाएं विकसित की जाएंगी।
साव के अनुसार, यह मिशन भारत सरकार के इंडिया एआई मिशन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को उत्तरदायी, नवाचार-आधारित और भविष्य उन्मुख डिजिटल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ में 'हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट' निर्माण संयंत्र की स्थापना के लिए भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) को रियायती दर पर भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।
बीईएमएल भारत सरकार का एक प्रतिष्ठित सार्वजनिक उपक्रम है। 'हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट' निर्माण संयंत्र की स्थापना से छत्तीसगढ़ को देश के औद्योगिक मानचित्र पर नयी पहचान मिलेगी और राज्य में आधुनिक भारी मशीन निर्माण उद्योग की शुरुआत होगी।
साव ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए 'वर्क्स एंड अकाउंट मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम' लागू करने की स्वीकृति दे दी है।
इस प्रणाली के जरिये कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-खरीदारी, ई-खाता, बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन और गुणवत्ता निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएं एकीकृत डिजिटल मंच पर संचालित होंगी।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के अंतर्गत बारहमासी सड़कों के निर्माण के लिए जारी दिशा-निर्देशों में संशोधन को भी मंजूरी प्रदान की गई।
उन्होंने बताया कि संशोधनों के तहत ग्रामीण आंतरिक गलियों में सीसी सड़क, नाली और सड़क के निर्माण से पहले मनरेगा से मिट्टी कार्य की अनिवार्यता समाप्त की गई है।
साव ने बताया कि योजना की पात्रता का दायरा बढ़ाकर ऐसे सभी ग्रामीण मार्गों को शामिल किया गया है, जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना या अन्य योजनाओं में शामिल नहीं हैं।
उन्होंने बताया कि आवश्यकता अनुसार नाबार्ड ऋण, पर्यावरण एवं अधोसंरचना विकास मद, खनिज न्यास मद सहित अन्य स्रोतों से भी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
साव ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने वित्त विभाग के उस प्रस्ताव को भी स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत 'छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047' के क्रियान्वयन के लिए अंजोर लाइट (लिंक्ड इंम्लीमेंटेशन एंड गाइडेंस फॉर होलिस्टिक ट्रेकिंग) परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से 15 करोड़ रुपये का पूर्णतः अनुदान प्राप्त किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह तीन साल (एक दिसंबर 2026 से 30 नवंबर 2029) की बहु-क्षेत्रीय परियोजना है, जिसमें राज्य या भारत सरकार का कोई वित्तीय अंशदान नहीं होगा।
साव ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने राज्य योजनाओं के लिए एकल नोडल एजेंसी मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं की राशि का अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ राज्य ऊर्जा उत्पादन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीजीसीएल) को आमजन और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के उदेश्य से 200 करोड़ रुपये तक के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर/बॉन्ड जारी कर शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।
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