संसद ने विनियोग विधेयक को मंजूरी दी
अविनाश
- 06 Aug 2026, 06:18 PM
- Updated: 06:18 PM
नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) संसद ने बृहस्पतिवार को विनियोग विधेयक को मंजूरी दे दी जिसके तहत सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में व्यय हुए 54,067 करोड़ रूपये के अतिरिक्त खर्च के लिए संसद से मंजूरी मांगी है।
तीन बार के स्थगन के बाद अपराह्न दो बजकर 45 मिनट पर राज्यसभा की बैठक शुरू होने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विनियोग (संख्यांक 3) विधेयक को चर्चा और लौटाने के लिए पेश किया।
विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा के दौरान कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा के दौरान सदस्यों ने अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाये।
चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सरकार अनुदान की अनुपूरक मांगें 31 मार्च 2023 को समाप्त हुए वर्ष में अतिरिक्त खर्च के लिए लायी है।
विधेयक का उद्देश्य भारत की संचित निधि से उन खर्चों के लिए धन निकालने की खातिर मंजूरी देना है, जो व्यय 31 मार्च 2023 को खत्म हुए वित्त वर्ष के दौरान कुछ खास सेवाओं पर और उस वर्ष के लिए मंजूर रकम से अधिक किए गए थे।
सीतारमण ने कहा कि इसे वित्त वर्ष 2022-23 में हुए अतिरिक्त खर्च के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त खर्च केवल दो मद में हुआ जिनका लोक लेखा समिति (पीएसी) ने इस साल अप्रैल में लोकसभा में पेश अपनी 39वीं रिपोर्ट में उल्लेख किया है।
उन्होंने कहा कि पीएसी की अध्यक्षता हमेशा विपक्ष के नेता करते हैं और इस समिति ने वित्त वर्ष 2022-23 के सारे खर्चों पर विचार करने के बाद इस बात को उजागर किया कि अतिरिक्त खर्च हुआ है।
सीतारमण ने कहा कि इनमें से एक अतिरिक्त व्यय रेलवे मंत्रालय से जुड़े एक अदालती आदेश के कारण हुआ, जो 196.44 करोड़ रूपये था। उन्होंने कहा कि इसके अलावा दूसरा बड़ा व्यय 53,871 करोड़ रूपये था, जो ऋण अदायगी से संबंधित है।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के प्रबंधन के कारण यह जो ऋण अदायगी के लिए अतिरिक्त व्यय किया गया है, इसका कोई राजकोषीय प्रभाव नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार पहली बार अतिरिक्त व्यय के लिए संसद में नहीं आयी है तथा पिछले कुछ वित्तीय वर्ष के बजट से जुड़े अतिरिक्त खर्च के वास्ते सदन में आयी थी।
वित्त मंत्री के जवाब के बाद सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से लौटा दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।
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