सुधारों की रफ्तार बढ़ाने, कारोबार सुगमता को बेहतर करने की जरूरत : मारुति चेयरमैन भार्गव
अजय
- 09 Aug 2026, 12:39 PM
- Updated: 12:39 PM
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) के चेयरमैन आर सी भार्गव ने केंद्र और राज्य सरकारों से आर्थिक सुधारों की रफ्तार तेज करने तथा कारोबार सुगमता की स्थिति बेहतर करने के प्रयास बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से ऐसे सुधारों और कार्यक्रमों का समर्थन करने को कहा है, जो देश में संपत्ति और रोजगार के नए अवसर पैदा करते हैं।
कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में शेयरधारकों को दिए संदेश में भार्गव ने कहा कि सरकार और विपक्ष को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सुधारों से पैदा होने वाले अतिरिक्त संसाधनों का इस्तेमाल अधिक न्यायपूर्ण और समान समाज के निर्माण में किया जाए।
भार्गव के अनुसार, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के बाद देश के वाहन उद्योग की वृद्धि की संभावनाएं बेहतर हुई हैं। मारुति का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2030-31 तक भारत का कार बाजार 61 लाख से 63 लाख इकाई सालाना तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में छोटी कारों की मांग पिछले पांच साल की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ सकती है।
उन्होंने बताया कि 22 सितंबर, 2025 से नई जीएसटी दरें लागू होने के बाद वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में मारुति सुजुकी की खुदरा बिक्री में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मार्च, 2026 के अंत में कंपनी के पास करीब 1.9 लाख लंबित बुकिंग थीं। इसका प्रमुख कारण मांग वाले मॉडल के लिए उत्पादन क्षमता का पर्याप्त नहीं होना था।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी की बिक्री 38 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पूरे उद्योग की वृद्धि 28 प्रतिशत रही। इसी अवधि में छोटी कारों की बिक्री में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
भार्गव ने कहा कि कंपनी अब अपनी नई उत्पादन लाइन को अधिक लचीला बना रही है, ताकि मांग के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सके। इससे बाजार में मांग बढ़ने पर कंपनी तेजी से उत्पादन बढ़ा सकेगी।
स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र पर भार्गव ने कहा कि भारत को शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने के लिए किसी एक प्रौद्योगिकी पर निर्भर रहने के बजाय कई प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करना होगा। उन्होंने बायोगैस को महत्वपूर्ण विकल्प बताते हुए कहा कि इसे स्थानीय संसाधनों से बड़े पैमाने पर तैयार किया जा सकता है। इससे आयातित सीएनजी पर निर्भरता कम होगी और स्वच्छ एवं नवीकरणीय ईंधन उपलब्ध कराया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि बायोगैस उत्पादन से जैविक खाद जैसे उपयोगी उप-उत्पाद भी मिलेंगे। इससे मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि उत्पादकता में सुधार हो सकता है। साथ ही पराली जलाने की समस्या कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है।
मारुति सुजुकी पिछले दो साल से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा के साथ इस दिशा में काम कर रही है। कंपनी के निदेशक मंडल ने पहले चरण में चार बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के लिए 561 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है।
भार्गव ने कहा कि इन संयंत्रों से प्राप्त अनुभव के आधार पर कंपनी भविष्य में बायोगैस के उत्पादन और वितरण में बड़े पैमाने पर निवेश करने की योजना बना सकती है।
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