मांग व मूल्य बाधाएं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए अहम चुनौतियां: आर्थिक सर्वेक्षण
अविनाश नरेश
- 22 Jul 2024, 06:31 PM
- Updated: 06:31 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) संसद में सोमवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2023-24 में कहा गया है कि सीमित मांग और मूल्य निर्धारण जैसी बाधाएं देश में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण में बाधा डालने वाली प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2023-24 पेश किया।
इसमें कहा गया है कि भारत ने अपने रॉकेट बेड़े में दो और उपग्रह प्रक्षेपण यान- मार्क-3 (एलवीएम-3) और लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) शामिल किए हैं। रॉकेट बेड़े में ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान और भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान पहले से शामिल हैं।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि 2020 में घोषित अंतरिक्ष क्षेत्र संबधी सुधारों की भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी भागीदारी बढ़ाने में अहम भूमिका रही है।
इसमें कहा गया है कि अंतरिक्ष अन्वेषण मिशनों की एक श्रृंखला संचालित की गई है जिनमें मंगल ऑर्बिटर मिशन (2014), एस्ट्रोसैट (2015), चंद्रयान-2 ऑर्बिटर (2019), चंद्रयान-3 (2023) और आदित्य - एल1 मिशन (2023) शामिल हैं।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि स्वदेशी उपग्रह नौवहन प्रणाली यानी एनएवीआईसी श्रृंखला 2016 में पूरी हो गई और चालू हो गई।
इसमें कहा गया है कि प्रमुख तकनीकी क्षेत्र जिनमें विकास संबंधी अंतर मौजूद हैं, उनमें कार्बन फाइबर की प्राप्ति के लिए स्वदेशी क्षमता का विकास, अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए समर्पित सेमीकंडक्टर, प्रमुख मिश्र धातु तत्वों की उपलब्धता शामिल है।
समीक्षा में कहा गया है कि पिछले कुछ साल में, अंतरिक्ष क्षेत्र ने अंतरिक्ष अन्वेषण और जमीनी बुनियादी ढांचे के लिए उपयोग में आने वाले रॉकेट, उपग्रह और अंतरिक्ष यान के निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति देखी है।
इसमें कहा गया है कि "वर्तमान में, भारत के पास 55 चालू अंतरिक्ष संपत्ति हैं जिनमें 18 संचार उपग्रह, नौ नौवहन उपग्रह, पांच वैज्ञानिक उपग्रह, तीन मौसम संबंधी उपग्रह और 20 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह शामिल हैं।
इसमें यह भी कहा गया है कि अंतरिक्ष गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ 51 समझौता ज्ञापनों और 34 संयुक्त परियोजना कार्यान्वयन योजनाओं पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
भाषा अविनाश