रंगमंच समूहों ने दिल्ली में प्रस्तुति के लिए एमसीडी के नए नियमों की आलोचना की
नेत्रपाल संतोष
- 09 Aug 2024, 09:05 PM
- Updated: 09:05 PM
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) रंगमंच से जुड़े लोगों ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के नए नियमों की आलोचना की जिनकी वजह से कला प्रदर्शन से जुड़े समूहों को प्रत्येक प्रस्तुति के लिए 1,000 रुपये के लाइसेंस शुल्क के अलावा एक लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
राष्ट्रीय राजधानी में भोजन, आवास और बोर्डिंग प्रतिष्ठानों के लिए हाल में शुरू किया गया एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल नृत्य, रंगमंच और संगीत कार्यक्रमों के आयोजकों से लाइसेंस शुल्क के रूप में 1,000 रुपये देने के अलावा नगर निगम, दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति और दिल्ली पुलिस से प्राप्त मंजूरी पत्र जमा करने के लिए भी कहता है।
रंगमंच निर्देशकों और समूहों ने इसे ‘‘अतार्किक’’ एवं ‘‘अनैतिक’’ नियम करार दिया तथा मांग की कि यह खर्च सभागारों द्वारा वहन किया जाना चाहिए।
नियमों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का प्रयास करार देते हुए अस्मिता रंगमंच समूह के निर्देशक अरविंद गौड़ ने कहा कि इससे उनके जैसे समूह पर लगभग 40,000-45,000 रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा जो एक वर्ष में लगभग 45 शो आयोजित करता है।
उन्होंने कहा कि पहले रंगमंच समूहों को दिल्ली पुलिस लाइसेंस विभाग से 50 रुपये के फॉर्म के माध्यम से लाइसेंस के लिए आवेदन करना पड़ता था और 20 रुपये का भुगतान ऑनलाइन करना पड़ता था।
गौड़ ने कहा कि यह प्रक्रिया ‘‘बाधा रहित’’ थी।
नए नियमों के तहत स्टेज शो के लिए कलाकारों को दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा से पुलिस स्वीकृति प्रमाणपत्र (पीसीसी) प्राप्त करना भी आवश्यक है।
नटसम्राट रंगमंच समूह के श्याम कुमार ने कहा कि सभी जरूरी अनुमति और लाइसेंस शुल्क ऑडिटोरियम की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
आवरण रंगमंच समूह के निर्देशक राजेश तिवारी ने कुमार की मांगों को दोहराते हुए कहा कि इससे टिकटों की कीमत पर असर पड़ेगा, जिसके परिणामस्वरूप नाटक देखने के लिए कम लोग आएंगे।
तिवारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यह हमारी ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि ऑडिटोरियम मालिकों की ज़िम्मेदारी है, जिन्हें हम प्रत्येक शो के लिए 60-70,000 रुपये का भुगतान करते हैं। अगर मैं एक वर्ष में 50 नाटकों का मंचन करता हूं, तो मुझे उन्हें 50,000 रुपये का भुगतान करना होगा। लागत को पूरा करने के लिए मुझे टिकटों की कीमत बढ़ानी पड़ेगी जिससे दर्शकों की संख्या में गिरावट आ सकती है।’’
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