सत्ता के दो केंद्र आपदा का कारण बनते हैं: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा
देवेंद्र संतोष
- 14 Dec 2024, 06:21 PM
- Updated: 06:21 PM
(विजय जोशी और सुमीर कौल)
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 14 दिसंबर (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश में दोहरे शासन मॉडल को ‘‘आपदा को आमंत्रण’’ करार दिया है। साथ ही उन्होंने केंद्र से अपना वादा निभाने और जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किये जाने का आग्रह किया है।
अक्टूबर में पदभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले साक्षात्कार में अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बार-बार किए गए वादों का हवाला देते हुए राज्य का दर्जा बहाल करने की केंद्र की प्रतिबद्धता को लेकर उम्मीद जताई।
मुख्यमंत्री की यह स्पष्टवादिता जम्मू-कश्मीर में जटिल राजनीतिक परिदृश्य को रेखांकित करती हैं।
अब्दुल्ला ने समाचार एजेंसी के मुख्यालय में ‘पीटीआई’ के वरिष्ठ संपादकों से कहा, ‘‘मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि किसी भी जगह सत्ता के दो केंद्र आपदा को आमंत्रण का कारण बनते हैं।... अगर कई सत्ता केंद्र हैं तो कोई भी संगठन ठीक से काम नहीं करता.... यही कारण है कि हमारे खेलों की टीम में एक कप्तान होता है। आपके पास दो कप्तान नहीं होते।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह, भारत सरकार में दो प्रधानमंत्री या सत्ता के दो केंद्र नहीं हैं। और भारत के ज्यादातर हिस्सों में एक निर्वाचित मुख्यमंत्री होता है, जिसे निर्णय लेने के लिए अपने मंत्रिमंडल के साथ अधिकार प्राप्त होता है।’’
उन्होंने दिल्ली का उदाहरण दिया जहां सरकार उपराज्यपाल के साथ सत्ता साझा करती है जोकि अच्छा अनुभव नहीं रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता के दो केंद्र कभी सफल नहीं हो सकते।’’
अब्दुल्ला ने कहा कि दिल्ली आखिरकार एक छोटा शहरी राज्य है, जबकि जम्मू-कश्मीर एक बड़ा और रणनीतिक क्षेत्र है जो चीन और पाकिस्तान की सीमा से लगा हुआ है, जिससे एकीकृत कमान की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दो महीनों में जब से मैं मुख्यमंत्री बना हूं, मुझे अभी तक एक भी ऐसा उदाहरण नहीं मिला है, जहां जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश होने से कोई फायदा हुआ हो। एक भी नहीं। केंद्रशासित प्रदेश होने की वजह से जम्मू-कश्मीर में शासन या विकास के (फायदे का) एक भी उदाहरण देखने को नहीं मिला है।’’
संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद संसद के एक अधिनियम के तहत अगस्त, 2019 में जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पुनर्गठित किया गया था।
केंद्र शासित प्रदेश का शासन उपराज्यपाल को सौंप दिया गया था। एक साल पहले 11 दिसंबर, 2023 को उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को सितंबर तक विधानसभा चुनाव कराने का निर्देश दिया था और केंद्र को बिना कोई समय सीमा दिए जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने को कहा था।
जम्मू-कश्मीर में सितंबर में विधानसभा चुनाव हुए थे जिसमें अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) ने 90 सीट में से 41 सीट जीती। उसकी सहयोगी कांग्रेस पार्टी ने छह सीट जीती। भाजपा ने 28 सीट पर जीत दर्ज की थी।
अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में केवल उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के कारण ही चुनाव हो सके, लेकिन "दुर्भाग्यवश, यह हमारे लिए बड़े खेद का विषय है कि राज्य के दर्जे के सवाल पर उच्चतम न्यायालय का रुख मेरी अपेक्षा से अधिक अस्पष्ट रहा।"
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य का दर्जा बहाल करने का काम जितनी जल्दी हो सके उतना अच्छा है, लेकिन यह उतना भी अच्छा नहीं है। यदि उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए जितनी जल्दी हो सके, कहा होता, तो मैं आज यहां आपके साथ नहीं बैठा होता। क्योंकि ‘जितनी जल्दी हो सके’ का वह समय शायद नहीं आता।’’
अब्दुल्ला ने स्वीकार किया कि जम्मू-कश्मीर के ‘हाइब्रिड’ राज्य बने रहने की स्थिति में उनके पास एक योजना है। उन्होंने कहा, "यदि मेरे पास योजना न हो तो यह मूर्खता होगी।"
उन्होंने कहा, "स्पष्ट है, मेरे दिमाग में एक समय-सीमा भी है। लेकिन आप मुझे इस बात को फिलहाल अपने तक ही रखने की अनुमति दें, क्योंकि मैं यह विश्वास करना चाहूंगा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए वादे पूरे किए जाएंगे।’’
अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘तथ्य यह है कि लोग वोट देने के लिए निकले, वे किसी कारण से निकले।’’ उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि यह भाजपा शासित केंद्र सरकार का राज्य का दर्जा देने का वादा था जिसने मतदाताओं को आकर्षित किया।
उन्होंने कहा, ‘‘जब चुनाव प्रचार के दौरान आपने लोगों से बार-बार कहा कि जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। तब आपने यह नहीं कहा कि अगर भाजपा सरकार बनाती है तो राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा या अगर जम्मू से कोई मुख्यमंत्री होगा तो राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं है। आपने कहा था कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। बस इतना ही। इसलिए अब ऐसा किया जाना चाहिए।’’
अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने का अंतिम निर्णय केवल दो व्यक्तियों प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा लिया जाना है।
यह पूछे जाने पर कि नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए सरकार को प्रभावित करने के लिए राजग के सहयोगियों का इस्तेमाल कर सकती है, उन्होंने कहा, ‘‘अंतत: प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को बैठकर यह निर्णय करना होगा कि क्या यह किया जाना चाहिए और यह कब किया जाना चाहिए।’’
मौजूदा सरकारी व्यवस्था को "सीखने का अनुभव" बताते हुए अब्दुल्ला ने निर्वाचित प्रतिनिधियों और नौकरशाहों के लिए इसे चुनौतीपूर्ण बदलाव करार दिया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पुलिस, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का जिम्मा संभालते हैं, जबकि अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां निर्वाचित सरकार के पास होती हैं।
अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘हम प्रशासनिक सीमाओं को लेकर स्पष्टता लाने के लिए नियमों की पुनः जांच करने की प्रक्रिया में हैं।" उन्होंने शासन तंत्र को सुव्यवस्थित करने के लिए जारी प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।
भाषा देवेंद्र