विश्वकप से ब्राजील के बाहर होने से 'मिनी ब्राजील' में मायूसी, केप वर्दे के प्रदर्शन से जगी उम्मीद
मोना
- 07 Jul 2026, 08:32 PM
- Updated: 08:32 PM
(ब्रजेन्द्र नाथ सिंह)
भोपाल, सात जुलाई (भाषा) फीफा विश्व कप फुटबॉल प्रतियोगिता से पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील के बाहर होने के बाद 'मिनी ब्राजील' के नाम से मशहूर मध्यप्रदेश के शहडोल जिला स्थित विचारपुर गांव के खिलाड़ी बेहद मायूस हैं।
हालांकि, केप वर्दे जैसे छोटे देश के प्रदर्शन ने इन खिलाड़ियों में यह उम्मीद भी जगाई है कि अपना देश भी एक दिन फुटबॉल के इस महाकुंभ में पदार्पण करेगा।
अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित न्यूजर्सी स्टेडियम में रविवार को खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में एर्लिंग हालैंड के दो गोल की बदौलत नॉर्वे ने बड़ा उलटफेर करते हुए ब्राजील को 2-1 से पराजित कर दिया।
आदिवासी बहुल विचारपुर में फुटबॉल को लेकर इतना जुनून है कि यहां के बच्चे रात-रात भर जागकर स्थानीय सामुदायिक भवन में विश्व कप देख रहे हैं और टीम तथा खिलाड़ियों की खूबियां, उनकी तकनीक और रणनीति पर कोच तथा वरिष्ठ खिलाड़ियों से चर्चा करते हैं।
विश्व कप आरंभ होने के बाद फुटबॉल कोच और सहायक संचालक (खेल) रईस अहमद खान की पहल पर सामुदायिक भवन में 75 इंच का एक टेलीविजन लगाया गया जिससे कि यहां के बच्चे इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता को देख सकें।
खान ने 'पीटीआई-भाषा' से फोन पर बातचीत में कहा कि ब्राजील के विश्व कप से बाहर होने के बाद पूरा विचारपुर बहुत मायूस हो गया है।
उन्होंने कहा, ''बहुत दुखी हैं हम सभी। उस दिन किस्मत ब्राजील के साथ नहीं थी। अफसोस इस बात का है कि ब्राजील की टीम अच्छा खेल रही थी लेकिन वह मौकों को भुनाने में विफल रही जबकि नॉर्वे ने भुना लिया।''
उन्होंने कहा कि ब्राजील की टीम पेनल्टी भी चूक गई। उन्होंने कहा कि यदि वह गोल हो गया होता तो पूरे मैच का रुख बदल सकता था। उन्होंने नेमार जैसे खिलाड़ी को स्थानापन्न खिलाड़ी के रूप में आखिरी कुछ मिनटों के लिए भेजे जाने को भी ब्राजील की हार की एक वजह बताया।
कोच ने बताया कि ब्राजील की हार के बाद उन्होंने यहां के निराश युवा खिलाड़ियों को समझाया कि कोई टीम चाहे कितनी भी मजबूत क्यों ना हो, अगर मौके पर चूक जाए तो उसका वही हश्र होता है जो ब्राजील का हुआ।
उन्होंने खिलाड़ियों से कहा, ''इसलिए मौका मिले तो उसका भरपूर लाभ उठाओ, उसे गंवाओ मत।''
राष्ट्रीय स्तर की अंडर-19 फुटबॉल में मध्यप्रदेश के लिए खेल चुके और पिछले साल जर्मनी में प्रशिक्षण हासिल करने वाले बीरेन बैगा ने कहा कि ब्राजील की टीम बहुत अच्छी थी और अच्छा खेल भी रही थी लेकिन अफसोस है कि वह हार गई।
उन्होंने कहा, ''हम सभी उदास हो गए। ब्राजील को कई मौके भी मिले लेकिन वह चूक गई।''
बैगा के साथ ही जर्मनी से प्रशिक्षण लेकर लौटीं सुहानी कोल ब्राजील की हार से इतनी मायूस थीं कि पीटीआई-भाषा से बातचीत के दौरान उनकी आंखें भर आईं।
उन्होंने कहा, ''हम लोग ब्राजील का बहुत अधिक समर्थन करते हैं। नेमार का आखिरी विश्व कप था। हम लोगों को लग रहा था कि इस बार ब्राजील की टीम चैंपियन बनेगी लेकिन हार गई इसलिए बहुत बुरा लग रहा है।''
उन्होंने कहा कि केप वर्दे जैसे छोटे से देश ने पहली बार विश्व कप खेला और इतना शानदार प्रदर्शन किया।
कोल ने कहा, ''हमारा भारत अभी तक नहीं पहुंच पा रहा है जिसका मन में हमेशा अफसोस होता है।''
बैगा और कोल दोनों ने कहा कि भले ही केप वर्डे की टीम बाहर हो गई लेकिन उसने यह उम्मीद तो जगा दी है कि निकट भविष्य में एक दिन भारत भी विश्व कप में अपना जलवा बिखेरेगा।
कोच खान ने कहा कि जब केप वर्दे जैसे छोटे से देश के खिलाड़ी इतना अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं तो भारत क्यों नहीं कर सकता।
केप वर्दे पश्चिम अफ्रीका का छोटा सा द्वीप देश है जिसकी आबादी महज पांच लाख से कुछ अधिक है।
केप वर्दे की टीम पहली बार विश्व कप में खेली। फीफा रैंकिंग में वह 64वें स्थान पर है जो दूसरे नंबर की टीम अर्जेंटीना से कड़े मुकाबले में हार के बाद विश्व कप से बाहर हो गई। इससे पहले उसने स्पेन और उरुग्वे जैसे देशों को ड्रॉ पर रोककर नॉकआउट में जगह बनाई।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल 2025 में 'मन की बात' कार्यक्रम में विचारपुर गांव को 'मिनी ब्राजील' बताया था जिसके बाद यह चर्चा के केंद्र में आया और फिर यहां के चार खिलाड़ियों ने जर्मनी में प्रशिक्षण हासिल किया।
खान ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस उल्लेख के बाद विचारपुर में काफी विकास हुआ है लेकिन अब भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक जरूरत यहां अत्याधुनिक सुविधाओं वाले स्टेडियम की है।
भाषा ब्रजेन्द्र जितेंद्र सुधीर
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