ईंधन, खाद्य कीमतों में तेजी से थोक मुद्रास्फीति मई में बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर
अजय
- 15 Jun 2026, 04:39 PM
- Updated: 04:39 PM
नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) देश में थोक मुद्रास्फीति मई में बढ़कर 9.68 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 8.26 प्रतिशत थी। ईंधन व बिजली, विनिर्मित उत्पादों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही।
थोक मूल्य सूचकांक (डूब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति का मई का यह आंकड़ा 2022-23 आधार वर्ष वाली वर्तमान श्रृंखला में अब तक का सबसे अधिक स्तर है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने आधार वर्ष को 2011-12 से संशोधित कर 2022-23 करने के बाद थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े सोमवार को जारी किए। नौ साल में पहली बार आधार वर्ष बदला गया है।
मंत्रालय ने उत्पादन मूल्य सूचकांक (पीपीआई) को पहली बार जारी किया है ताकि उत्पादन और कच्चे माल से लेकर तैयार वस्तुओं तक की कीमतों पर नजर रखी जा सके।
ईंधन और बिजली श्रेणी में थोक मुद्रास्फीति मई में बढ़कर 30.33 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 24.89 प्रतिशत थी। कच्चे पेट्रोलियम की महंगाई दर मई में 61.51 प्रतिशत रही, जबकि अप्रैल में यह 56.31 प्रतिशत थी।
थोक मुद्रास्फीति में यह तेज वृद्धि पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी अवरोध के कारण हुई जहां से भारत अपने अधिकतर कच्चे तेल का आयात करता है। इसका असर खाद्य कीमतों पर भी पड़ा।
खाद्य वस्तुओं में मुद्रास्फीति मई में 3.60 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 2.43 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पादों में महंगाई दर बढ़कर 7.48 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 6.68 प्रतिशत थी।
रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुख्य अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव में कमी के बाद वैश्विक ऊर्जा और जिंस कीमतों में हालिया नरमी से जून में मंहगाई से राहत मिलने की उम्मीद है।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष में तनाव कम होने की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के चलते जून में थोक मुद्रास्फीति मामूली रूप से घटकर 9.3 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि, इसे पश्चिम एशिया संकट से पहले के 2.5 प्रतिशत से नीचे के स्तर पर पहुंचने में अभी समय लग सकता है।
खुदरा या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई भी मई में पिछले 16 महीन के उच्च स्तर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई। अप्रैल में यह 3.48 प्रतिशत थी।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है। सरकार ने कुल महंगाई दर को दोनों ओर दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत बनाए रखने का लक्ष्य दिया है।
इस महीने की शुरुआत में आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह बताई गई जिसका असर खुदरा पेट्रोल और डीजल कीमतों पर पड़ा।
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण मई के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी।
भाषा निहारिका अजय
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