दिल्ली में 10 साल में एकत्रित पर्यावरण क्षतिपूर्ति कोष का केवल 43 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल हुआ
जोहेब
- 24 Apr 2026, 08:31 PM
- Updated: 08:31 PM
नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने पिछले एक दशक में एकत्र किये गये पर्यावरण क्षतिपूर्ति कोष का लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल किया है।
सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत दायर आवेदन के जवाब में जारी किए गए ब्योरे से यह जानकारी सामने आयी।
प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर लगाये गये जुर्माने से एकत्र यह निधि मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजधानी में पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति सुधारने और प्रदूषण के निवारण के लिए इस्तेमाल की जाती है।
पर्यावरण कार्यकर्ता अमित गुप्ता द्वारा दायर आरटीआई से पता चला है कि 2015-16 से 2025-2026 के बीच 158.88 करोड़ रुपये एकत्र किये गये, जबकि इस अवधि में केवल 68.07 करोड़ रुपये खर्च किये गये।
आरटीआई आवेदन के जवाब में साझा किये गये वर्षवार आंकड़ों से पता चलता है कि 2025-26 (फरवरी तक) में निधि संग्रह 36.53 करोड़ रुपये के साथ उच्चतम स्तर पर था, जबकि व्यय 2024-25 में 35.93 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्षों की तुलना में तीव्र वृद्धि को दर्शाता है।
आंकड़ों के अनुसार 2015-16 में 3.58 करोड़ रुपये एकत्र किये गये जबकि केवल 71 लाख रुपये खर्च हुए। वहीं 2016-17 में 16.74 करोड़ रुपये एकत्र किये गये और 1.29 करोड़ रुपये इस्तेमाल हुए। वर्ष 2017-18 में 3.42 करोड़ रुपये एकत्र हुए और 2.55 करोड़ रुपये खर्च किये गये और 2018-19 में 5.60 करोड़ रुपये एकत्र किये गये और केवल 1.34 करोड़ रुपये इस्तेमाल हुए।
आंकड़ों के अनुसार 2019-20 में निधि संग्रह बढ़कर 19.84 करोड़ रुपये हो गया और खर्च की गई राशि 1.39 करोड़ रुपये रही, जबकि 2020-21 में 9.17 करोड़ रुपये एकत्र किये गये और 2.90 करोड़ रुपये इस्तेमाल हुए।
वर्ष 2021-22 के आंकड़ों के अनुसार 16.84 करोड़ रुपये एकत्र किए गए और 1.23 करोड़ रुपये खर्च हुए जबकि 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार 19.14 करोड़ रुपये एकत्र हुए और 1.45 करोड़ रुपये इस्तेमाल किए गए।
आरटीआई आंकड़ों से यह भी पता चला कि 2023-24 में 11.32 करोड़ रुपये एकत्र किये गये जिनमें से 7.84 करोड़ रुपये खर्च हुए। वर्ष 2024-25 में 16.63 करोड़ रुपये एकत्र हुए और 35.93 करोड़ रुपये इस्तेमाल किए गए।
आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में फरवरी तक 36.53 करोड़ रुपये एकत्र हुए जबकि 11.38 करोड़ रुपये खर्च किये गये।
आरटीआई के जवाब में डीपीसीसी ने उन विशिष्ट कार्यों या परियोजनाओं का विवरण नहीं दिया जिन पर धनराशि खर्च की गई।
गुप्ता ने दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवंटित धनराशि के कम इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा, ''इतनी बड़ी राशि इस्तेमाल क्यों नहीं हो रही? पैसा कहां रखा है? जमीनी स्तर पर पर्यावरण के लिहाज से वास्तव में क्या काम किया गया है?''
उन्होंने कहा, ''यह शहर लगातार देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है, फिर भी आवंटित या एकत्र की गई धनराशि का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल नहीं हुआ। यह पैसों की कमी का सवाल नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण और कोई योजना नहीं होने का सवाल है।''
भाषा
देवेंद्र जोहेब
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2404 2031 दिल्ली