राकांपा नेता की हत्या मामले में अमित जोगी की उम्रकैद की सजा पर उच्चतम न्यायालय की रोक
पवनेश
- 23 Apr 2026, 06:23 PM
- Updated: 06:23 PM
नयी दिल्ली, 23 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को राकांपा नेता रामावतार जग्गी की 2003 में हुई हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता रामावतार जग्गी की 4 जून 2003 को रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2 अप्रैल को अमित जोगी को दोषी करार दिया और उन्हें मामले में उम्रकैद की सजा काटने के लिए तीन सप्ताह के भीतर जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।
निचली अदालत ने 31 मई 2007 को फैसला सुनाया था कि अभियोजन पक्ष ने 28 आरोपियों के खिलाफ आरोप सफलतापूर्वक साबित कर दिए हैं।
हालांकि, अदालत ने अमित जोगी को उन पर लगे आरोपों से बरी कर दिया था।
अमित जोगी अपने (दिवंगत) पिता द्वारा स्थापित जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने अमित जोगी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और कपिल सिब्बल की दलीलों पर गौर करते हुए मामले में उनकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगा दी।
वहीं, पीड़ित परिवार के सदस्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और गोपाल शंकरनारायणन ने बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध किया।
उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाते हुए, शीर्ष अदालत ने अमित जोगी की याचिका पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस भी जारी किया है।
जोगी ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
सीबीआई की अपील पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद पिछले महीने उच्च न्यायालय ने मामले की कार्यवाही फिर से शुरू की थी।
मामले की प्रारंभिक जांच राज्य पुलिस ने की थी, जिसे बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने अमित जोगी सहित कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।
पिछले साल नवंबर में, शीर्ष अदालत ने कहा था कि हालांकि सीबीआई ने अर्जी काफी देरी से दायर की, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि ''प्रतिवादी अमित जोगी के खिलाफ आरोप बेहद गंभीर हैं, जिनमें प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल के एक सदस्य की हत्या की साजिश शामिल है।''
जग्गी राकांपा की प्रदेश इकाई के तत्कालीन प्रमुख वी सी शुक्ला के करीबी थे।
भाषा सुभाष पवनेश
पवनेश
2304 1823 दिल्ली