पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने कठुआ दुष्कर्म-हत्या मामले के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज की
अविनाश
- 24 Apr 2026, 07:42 PM
- Updated: 07:42 PM
चंडीगढ़, 24 अप्रैल (भाषा) पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 2018 में घुमंतू समुदाय की लड़की के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या मामले के मुख्य आरोपी शुभम संगरा की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
अदालत ने अर्जी खारिज करते हुए टिप्पणी की कि उसके द्वारा किया गया अपराध ''समाज की सामूहिक अंतरात्मा और न्यायालय की न्यायिक अंतरात्मा को झकझोर देता है''।
न्यायमूर्ति शालिनी सिंह नागपाल की एकल पीठ ने बृहस्पतिवार को अर्जी खारिज करते हुए टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया शुभम की संलिप्तता प्रतीत होती है। फैसला शुक्रवार को उपलब्ध कराया गया।
उच्च न्यायालय के फैसले के मुताबिक आरोपी की 2018 में आठ वर्षीय बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के जघन्य अपराध में मुख्य भूमिका प्रतीत होती है।
एकल पीठ ने जमानत देने से इनकार करते हुए टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता द्वारा कथित तौर पर किए गए कृत्य ''ऐसे हैं जो समाज की सामूहिक अंतरात्मा और अदालत की न्यायिक अंतरात्मा को झकझोर देते हैं।''
उच्च न्यायालय ने हालांकि, सुनवाई अदालत को मुकदमे की कार्यवाही में तेजी लाने और इसे एक वर्ष की अवधि में निस्तारित करने का निर्देश देते हुए कहा, ''शीघ्र सुनवाई के अधिकार को भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार के एक पहलू के रूप में मान्यता प्राप्त है।''
आरोपी शुभम के अधिवक्ता पद्मकांत द्विवेदी ने दलील दी कि उनका मुवक्किल 19 जनवरी, 2018 से हिरासत में है और सुनवाई अदालत में 309 गवाहों में से केवल 41 से ही जिरह हो पाई है।
उन्होंने कहा, ''26 वर्षीय युवक की लंबी कारावास अवधि के मद्देनजर उसे जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए। ''
अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल देव सिंह ने अधिवक्ता मनबीर सिंह बसरा की सहायता से बचाव पक्ष की दलीलों का खंडन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता मुख्य आरोपी है जिसने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर अपराध को अंजाम देने में ''मुख्य भूमिका'' निभाई थी।
बसरा ने आठ वर्षीय बच्ची के साथ हुए अपराध का विस्तृत वर्णन पीठ के समक्ष किया।
शुभम ने पिछले साल अंतरिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, जिसे उसने अंतिम समय में वापस ले लिया था।
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई को कठुआ से पंजाब के पठानकोट स्थानांतरित कर दी थी।
उच्चतम न्यायालय ने 2022 में एक अलग आदेश में कहा कि अपराध के समय शुभम नाबालिग नहीं था और उस पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाया जाना चाहिए। न्यायालय ने जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय के 27 मार्च, 2018 के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें शुभम को नाबालिग माना गया था।
पाठनकोट की सत्र अदालत में इस समय मामले की सुनवाई हो रही है और आरोप तय करने के लिए दलीलें सुनी जा रही हैं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दाखिल आरोप पत्र के मुताबिक बच्ची का 10 जनवरी 2018 को अपहरण कर लिया गया, बंधक बनाकर उसके साथ बलात्कार किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। इस जघन्य अपराध ने पूरे देश को झकझोर दिया। शुभम समेत आठ लोगों को मामले में आरोपी बनाया गया है।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश
2404 1942 चंडीगढ़