कराची में 'सिंगल-स्क्रीन' सिनेमाघरों की वापसी; तीन नए हॉल जल्द खुलेंगे
अविनाश
- 30 Apr 2026, 11:29 AM
- Updated: 11:29 AM
कराची, 30 अप्रैल (भाषा) पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में बंद होते 'सिंगल-स्क्रीन' सिनेमाघरों के दौर के बीच तीन नए हॉल खुलने जा रहे हैं, जिससे शहर के सुस्त पड़े फिल्म उद्योग में नयी जान आने की उम्मीद है।
1980 के दशक में करीब 140 'सिंगल-स्क्रीन' सिनेमाघर वाले इस महानगर में अब इनकी संख्या घटकर 30 से भी कम रह गई है, जो सिने प्रेमियों के लिए लंबे समय से चिंता का विषय रही है।
हालांकि, अब स्थिति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। शॉपिंग मॉल या आवासीय इमारतों के लिए सिनेमाघरों को तोड़ने की प्रवृत्ति के विपरीत, शहर में तीन नए 'सिंगल-स्क्रीन' हॉल खोले जा रहे हैं।
इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे गायक, अभिनेता और उद्यमी नदीम जाफरी ने बताया कि यह पहल 'रक्षा आवास प्राधिकरण' के सहयोग से की जा रही है। उन्होंने कहा कि दो सिनेमाघर लगभग तैयार हैं, जबकि तीसरे पर काम शुरू हो चुका है।
जाफरी ने स्वीकार किया कि ये सभी सिनेमाघर 'डीएचए' क्षेत्र में होंगे, लेकिन इसे एक सकारात्मक शुरुआत बताते हुए उन्होंने कहा, "उम्मीद है कि इन नए सिनेमाघरों से शहर के सांस्कृतिक और मनोरंजन परिदृश्य को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी।"
पिछले करीब 30 वर्षों में स्थानीय फिल्म उद्योग में गिरावट और भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध के कारण कई सिनेमाघर बंद हो गए, जिससे कारोबारियों के लिए टिके रहना मुश्किल हो गया।
हाल के वर्षों में कुछ मल्टीप्लेक्स जरूर खुले, लेकिन उनके टिकट 1500 से 1800 रुपये तक महंगे होने के कारण आम लोगों की पहुंच से बाहर हैं, जबकि 1990 के दशक तक 'सिंगल-स्क्रीन' सिनेमाघरों में टिकट 100-150 रुपये में मिल जाता था।
'आर्ट काउंसिल ऑफ पाकिस्तान' के सचिव ऐजाज फारुकी ने कहा कि हाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन के दौरान सिनेमा पर चर्चा में कलाकारों और फिल्मकारों ने कहा कि आम लोगों के लिए सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव को कम करने का माध्यम भी है।
पाकिस्तान के वरिष्ठ अभिनेता मुस्तफा कुरैशी ने कहा कि फिल्में लोगों के लिए भावनात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम होती हैं और इनके अभाव में लोग अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए अन्य, कभी-कभी खतरनाक रास्ते अपना सकते हैं।
वितरक और निर्माता नदीम मांडवीवाला ने कहा कि कराची में कभी 100 से अधिक सिनेमाघर थे, जिनमें निशात सिनेमा, प्रिंस सिनेमा और बैम्बीनो सिनेमा जैसे प्रमुख थे, जो अब बंद हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि कम स्थानीय फिल्मों और हॉलीवुड फिल्मों के महंगे आयात ने भी इस स्थिति को प्रभावित किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि 2019 के बाद भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध ने उद्योग को बड़ा झटका दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि लोग अब भी सिनेमाघरों में फिल्म देखने का अनुभव पसंद करते हैं।
फिल्म समीक्षक उमैर अल्वी ने कहा कि सिनेमा व्यवसाय को बचाने के लिए सरकारी पहल के जरिए स्थानीय फिल्म उद्योग को पुनर्जीवित करना आवश्यक है।
उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि जब तक आम दर्शकों के लिए सुलभ सिनेमाघर नहीं बनते, तब तक सिनेमा की असली वापसी संभव नहीं है।
भाषा मनीषा अविनाश
अविनाश
3004 1129 कराची