प्रारंभिक परीक्षा में चेहरा मिलान प्रोटोकॉल सफलतापूर्वक लागू किया गया : यूपीएसएसी
रंजन
- 04 Jun 2026, 06:31 PM
- Updated: 06:31 PM
नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने हाल में संपन्न सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 में चेहरा मिलान प्रोटोकॉल सफलतापूर्वक लागू किया। यूपीएससी की ओर से बृहस्पतिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।
बयान में कहा गया है कि चेहरा मिलान प्रोटोकॉल यह सुनिश्चित करता है कि फॉर्म भरते समय अभ्यर्थी ने जो तस्वीर अपलोड की थी, वह परीक्षा देने के लिए एडमिट कार्ड के साथ पहुंचे व्यक्ति से मेल खाए।
इसमें कहा गया है कि चेहरा मिलान प्रोटोकॉल ने परीक्षा केंद्रों पर मौजूद पर्यवेक्षकों को मोबाइल फोन आधारित सत्यापन के जरिये अभ्यर्थियों का वास्तविक समय में लाइव प्रमाणीकरण करने में सक्षम बनाया, जिससे निर्बाध पहचान पुष्टि सुनिश्चित हुई और अभ्यर्थियों के स्थान पर किसी और के परीक्षा देने की गुंजाइश समाप्त हो गई।
बयान के मुताबिक, यूपीएससी ने 24 मई को आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 के दौरान ने देशभर के सभी 2,072 परीक्षा केंद्रों पर वास्तविक समय में चेहरा मिलान प्रोटोकॉल का अभ्यास किया।
आंकड़ों के अनुसार, सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 के लिए कुल 8,19,732 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से लगभग 5.49 लाख (67 प्रतिशत) परीक्षा में शामिल हुए।
बयान में कहा गया है कि यूपीएससी ने अपना चेहरा मिलान एप्लीकेशन इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी) के तकनीकी सहयोग से विकसित और कार्यान्वित किया है।
इसमें कहा गया है कि यूपीएससी ने एक ऐसी व्यवस्था शुरू की है, जिसके तहत किसी भी अभ्यर्थी को चेहरे के मिलान की प्रक्रिया से सफलतापूर्वक गुजरने के बाद ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति दी जाती है।
बयान के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत यूपीएससी ने एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार की है, जिसे उन सभी राज्यों, जिलों और परीक्षा केंद्रों के साथ साझा किया गया है, जहां परीक्षा प्रस्तावित है।
इसमें कहा गया है, "पर्यवेक्षकों को कई चरणों में प्रशिक्षण दिया गया। चेहरा मिलान एप्लीकेशन की खूबी यह है कि इसके लिए किसी महंगे हार्डवेयर की जरूरत नहीं पड़ती। यह किसी भी एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर काम करता है। पर्यवेक्षकों ने इसे अपने मोबाइल फोन पर इस्तेमाल किया, जिससे हार्डवेयर की लागत घटी और व्यवस्था संबंधी बोझ भी कम हुआ।"
बयान के अनुसार, इस एप्लीकेशन से प्रत्येक अभ्यर्थी के चेहरे का मिलान करने में लगभग 6-8 सेकेंड लगे, जिससे परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों का सुचारु प्रवेश सुनिश्चित किया जा सका और वहां लंबी कतारें लगने की समस्या दूर हुई।
इसमें कहा गया है कि एप्लीकेशन की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 7,000 से अधिक पर्यवेक्षकों ने एक साथ इसका इस्तेमाल किया और व्यस्त प्रवेश समय में इसने हर मिनट लगभग 12,000 अभ्यर्थियों के चेहरे का सफलतापूर्वक मिलान किया।
यूपीएससी के अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि नया कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि अभ्यर्थी की जगह कोई और परीक्षा न दे पाए। उन्होंने बताया कि यह एप्लीकेशन एनईजीडी की मदद से पूरी तरह से यूपीएससी के भीतर ही तैयार किया गया है।
भाषा पारुल रंजन
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