दिल्ली के असोला भाटी अभयारण्य में तेंदुओं की गतिविधियां बढ़ी, हर रोज देखे जा रहे
रंजन
- 12 Jun 2026, 07:56 PM
- Updated: 07:56 PM
(तस्वीरों सहित)
(वर्षा सागी)
नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) दिल्ली के असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी ने वन अधिकारियों को खासा उत्साहित किया है, अब यहां आए दिन तेंदुए देखे जा रहे हैं और कैमरा ट्रैप में लगातार तेंदुओं के जोड़े रिकॉर्ड हो रहे हैं, जिसे अधिकारी अभयारण्य में बेहतर होते प्राकृतिक आवास और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मान रहे हैं।
अधिकारियों का अनुमान है कि असोला भाटी क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या 2022 के लगभग 12-14 से बढ़कर अब करीब 16 हो गई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा 'कैमरा ट्रैप' रिकॉर्ड और क्षेत्रीय अवलोकन पर आधारित है और विस्तृत गणना के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकती है।
वन्यजीव अधिकारियों को जिस बात ने सबसे ज्यादा उत्साहित किया है, वह है अभयारण्य के भीतर जलाशयों के पास तेंदुओं के जोड़ों का बार-बार दिखना।
अधिकारियों ने कहा कि ऐसे नजारे बेहद दुर्लभ हैं क्योंकि तेंदुए आमतौर पर एकांतप्रिय होते हैं और वे आमतौर पर केवल प्रणय काल, प्रजनन के दौरान या फिर शावकों के पालन-पोषण के समय ही साथ दिखाई देते हैं।
वन विभाग के एक अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''कुछ साल पहले तेंदुए इतनी बार दिखना असामान्य था। आज हमारे 'कैमरा ट्रैप' लगभग हर रोज उन्हें रिकॉर्ड कर रहे हैं। तेंदुओं के जोड़े भी बार-बार दिख रहे हैं, जो काफी महत्वपूर्ण है।''
वन्यजीवों की आबादी में बढ़ोतरी सिर्फ तेंदुओं तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि चीतल और जंगली सूअर भी काफी देखे जा रहे हैं, जबकि मोर तो इतने हैं कि अब वे अभयारण्य के कई हिस्सों में आम तौर पर दिख जाते हैं।
एक अधिकारी ने कहा, ''मोर अब लगभग हर जगह दिखते हैं। उनकी आबादी काफी बढ़ी है और कुछ रास्तों पर तो वे पूरे झुंड में नजर आते हैं।''
अधिकारियों के मुताबिक वन्यजीव गतिविधि में यह वृद्धि अभयारण्य के भीतर व्यापक पारिस्थितिक सुधार का संकेत है। कई प्रजातियों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि भोजन, पानी और आश्रय अब परिदृश्य में अधिक सुलभ होते जा रहे हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मोर, फ्रैंकोलिन और हिरण जैसी प्रजातियां आवास की गुणवत्ता के महत्वपूर्ण संकेतक होती हैं।
उन्होंने कहा, ''कुछ प्रजातियां ऐसी होती हैं जिन्हें हम संकेतक प्रजाति कहते हैं। उनकी मौजूदगी से हम समझ सकते हैं कि आवास बेहतर हो रहा है या बिगड़ रहा है। मोर, फ्रैंकोलिन और हिरण जैसी प्रजातियों की बढ़ोतरी बताती है कि आवास की स्थिति सुधर रही है।''
अधिकारी इस बदलाव का श्रेय पिछले कई वर्षों में किए गए आवास प्रबंधन उपायों को देते हैं। अभयारण्य में 200 से अधिक जलकुंड बनाए और संधारित किए गए हैं, जिससे वन्यजीवों को साल भर पानी मिलता रहता है।
साथ ही कई साल पहले किए गए वृक्षारोपण अब घने हरे-भरे क्षेत्र में तब्दील हो चुके हैं और अनेक पेड़ घना छत्र बना चुके हैं।
अधिकारियों ने बताया कि चीतल और जंगली सूअर की संख्या काफी बढ़ी है, जिससे तेंदुओं जैसे शिकारियों के लिए अभयारण्य के भीतर रहने के अनुकूल हालात बने हैं।
ऐतिहासिक रूप से तेंदुए असोला भाटी क्षेत्र को हरियाणा के अरावली के जंगलों और दिल्ली को जोड़ने वाले एक बड़े गलियारे के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। यह आवाजाही जारी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि हाल के 'कैमरा ट्रैप' रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि कुछ जानवर अब अभयारण्य में अधिक समय बिताने लगे हैं।
भाषा
खारी रंजन
रंजन
1206 1956 दिल्ली