ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में रक्षा मंत्री के भाषण पर सवाल उठाने वाली बातें पूरी तरह गलत : सरकार
नेत्रपाल
- 27 Jun 2026, 10:42 PM
- Updated: 10:42 PM
नयी दिल्ली, 27 जून (भाषा) सरकार ने शनिवार को कहा कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में जुलाई 2025 में संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भाषण को "गलत तरीके से पेश" करने की कोशिश की गई और उनके भाषण के एक हिस्से को "चुनिंदा" तौर पर उद्धृत करके यह "गलत मतलब" निकाला गया कि उन्होंने दावा किया था कि "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक की जान नहीं गई"।
रक्षा मंत्रालय ने कहा, "ये बातें जानबूझकर गुमराह करने वाली और तथ्यों के लिहाज से गलत हैं"।
मंत्रालय ने कहा कि मंत्री की टिप्पणी उस "खास और शरारतपूर्ण विमर्श" के संदर्भ में थी, जिसमें कहा गया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपने पायलट खो दिए थे।
रक्षा मंत्रालय का यह बयान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के उस आरोप के बाद आया है, जिसमें उन्होंने सरकार पर 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान छह सैन्यकर्मियों के सर्वोच्च बलिदान को ''छिपाने'' का आरोप लगाया था।
'एक्स' पर एक पोस्ट में, उन्होंने रक्षा मंत्री का संसद में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर बयान देते हुए एक वीडियो भी साझा किया और दावा किया कि या तो मंत्री को उस समय छह सैनिकों की "शहादत" के बारे में पता नहीं था या उन्होंने "संसद को गुमराह करने का फैसला किया"।
रक्षा मंत्रालय ने बिना किसी का नाम लिए अपने बयान में कहा कि "सोशल मीडिया मंचों पर कुछ पोस्ट" में पिछले साल 28 जुलाई को संसद में रक्षा मंत्री के दिए गए भाषण को "गलत तरीके से पेश" करने की कोशिश की गई है। इसमें कहा गया कि "उन्होंने भाषण के एक अलग-थलग हिस्से को चुनकर गलत तरीके से यह दिखाने की कोशिश की कि रक्षा मंत्री ने दावा किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक की जान नहीं गई।"
बयान में कहा गया कि जिन लोगों ने रक्षा मंत्री के संसदीय भाषण से "विवाद खड़ा करने" की कोशिश की है, उन्होंने ऐसा "जानबूझकर उनकी बातों के पूरे संदर्भ को नज़रअंदाज़ करके" किया है।
मंत्रालय के अनुसार, "यह याद रखना जरूरी है कि रक्षा मंत्री के भाषण के समय, मीडिया के कुछ वर्गों और सोशल मीडिया पर एक बेहद प्रचलित और प्रभावी धारणा फैली हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय पायलट लापता हो गए थे।"
इसने कहा, "यह धारणा पूरी तरह से झूठी थी, फिर भी इसे ऑपरेशन की सफलता को कम करने और जनता का मनोबल गिराने के स्पष्ट इरादे से आक्रामक रूप से फैलाया जा रहा था।"
मंत्रालय ने कहा कि रक्षा मंत्री ने इसी "खास और शरारती विमर्श" के संदर्भ में यह बयान दिया था।
बयान में कहा गया, "इसलिए, उनकी बातें उस झूठ का एक लक्षित और संदर्भ-विशेष जवाब थीं, जो उस समय खतरनाक रूप से फैल रहा था।"
भाषा
प्रशांत नेत्रपाल
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