संसद मार्च के बाद जंतर-मंतर से कॉजपा का मंच हटाया गया
नेत्रपाल
- 20 Jul 2026, 09:48 PM
- Updated: 09:48 PM
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) संसद मार्च पर पुलिस की कार्रवाई के कुछ घंटे बाद सोमवार शाम तक जंतर-मंतर स्थित कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का प्रदर्शन स्थल पूरी तरह खाली करा दिया गया। मंच हटा दिया गया, तंबू उखाड़ दिए गए और सड़क पर बिखरे जूते-चप्पल दिनभर की घटनाओं की गवाही देते नजर आए।
जंतर-मंतर जाने वाले मार्ग को दोनों ओर से बंद कर दिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन और संबोधनों का केंद्र रहा मंच, काली तिरपाल, छात्र शिविर, तंबू, बैनर, पोस्टर, कालीन और गद्दे हटा दिए गए। मौके पर केवल सफाईकर्मी, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान मौजूद थे।
हालांकि, प्रदर्शन स्थल से करीब 200 मीटर दूर एक हजार से अधिक प्रदर्शनकारी सड़क पर डटे रहे। मंच हटाए जाने के बाद उन्होंने लाउडस्पीकर लगे एक टेंपो से एक-दूसरे को संबोधित किया और नारेबाजी की।
कॉजपा के स्वयंसेवकों ने कहा कि वे फिर से मंच बनाएंगे। वहीं, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत जंतर-मंतर के अलावा कहीं और प्रदर्शन की अनुमति नहीं है।
दिनभर की घटनाओं के बाद प्रदर्शनकारियों में अलग-अलग भावनाएं देखने को मिलीं। कुछ लोग इस बात से निराश थे कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पूरी नहीं हुई, जबकि कई अन्य ने कहा कि लाठीचार्ज और प्रदर्शन स्थल हटाए जाने से उनका आंदोलन जारी रखने का संकल्प और मजबूत हुआ है।
बांह पर पट्टी बांधे 25 वर्षीय प्रदर्शनकारी अनुष्का ने कहा, ''हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लेकर आए थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। हममें से कई लोगों पर लाठियां बरसाई गईं।''
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान पुलिस ने पहले रास्ते खोले और फिर बंद कर दिए, जिसके बाद कई स्तर के अवरोधकों के सामने उन्हें रोक दिया गया।
प्रदर्शनकारी हेलेन (55) ने आरोप लगाया, ''लोगों के सिर और हाथों पर लाठियां मारी गईं। बच्चे जमीन पर पड़े थे, फिर भी उन्हें पीटा गया।''
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पुलिस कार्रवाई में तीन से चार लोगों की हड्डियां टूटीं और कई अन्य घायल हुए।
नोएडा की कॉजपा स्वयंसेवक मनु सिंह ने दावा किया कि उनके पैर की हड्डी टूट गई और हाथ में चोट आई है।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मेट्रो स्टेशन पर भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें लगभग 20 मिनट तक बाहर नहीं निकलने दिया गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इलाके में पानी की आपूर्ति रोक दी गई थी और प्रदर्शन स्थल पर पानी लाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। ऐसे में कुछ युवा स्वयंसेवक बाहर से पानी लाकर सभी में बांट रहे थे।
वहीं, एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "कुछ बच्चे दौड़कर पानी लाते थे और फिर सभी लोग उसी में से थोड़ा-थोड़ा पीते थे।"
प्रदर्शनकारियों ने यह आरोप भी लगाया कि इलाके में इंटरनेट जैमर लगाए गए थे, जिससे विरोध प्रदर्शन के दौरान संचार और सूचना तक पहुंच बाधित हुई।
इसके बावजूद कई प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अब आंदोलन खत्म करना पिछले एक महीने की मेहनत को व्यर्थ करना होगा।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "अगर अब पीछे हटे तो फिर वहीं से शुरुआत करनी पड़ेगी। हम इतने मजबूत पहले कभी नहीं थे।"
अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि मंच दोबारा बनाया जा सकता है, लेकिन घायल लोगों का मनोबल वापस लाना आसान नहीं होगा।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि संबोधन के दौरान वक्ताओं को रोका गया और माइक्रोफोन तोड़ दिए गए।
कॉजपा ने पहले छह जून को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय प्रदर्शन किया था। इसके बाद 20 जून से शुरू हुआ धरना 20 जुलाई तक जारी रहा।
इससे पहले सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी संसद मार्ग के निकट एकत्र हुए और परीक्षा में कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद झड़प हुई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया गया।
कॉजपा ने दावा किया था कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ प्रतिनिधिमंडल की बातचीत के बाद उनकी एक प्रमुख मांग पर सहमति बनी है।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा।
भाषा
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