प्रधानमंत्री आवास के निकट कांग्रेस का धरना, 'बलपूर्वक' उठाए गए राहुल, प्रियंका और अन्य नेता
पवनेश
- 21 Jul 2026, 09:40 PM
- Updated: 09:40 PM
नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य कांग्रेस नेताओं ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए मंगलवार को उनके आवास के निकट धरना दिया, हालांकि पुलिस ने उन्हें 'बलपूर्वक' हटा दिया।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा राहुल गांधी से मिलकर बातचीत के बाद जब धरना समाप्त नहीं हुआ, तो पुलिस ने राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी, और कई अन्य नेताओं को 'बलपूर्वक' हिरासत में लिया और उन्हें बस में बैठाकर ले गई। पुलिस द्वारा उठाए जाने के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जोरदार प्रतिरोध भी किया।
हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि सरकार चाहे कुछ भी कर ले, इंसाफ की लड़ाई नहीं रुकने वाली है।
उन्होंने कहा, ''मोदी जी, हर ज़ोर आज़मा लो, सारी ताकत लगा लो - छात्रों के इंसाफ की ये लड़ाई अब रोके न रुकेगी।''
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी को 'बलपूर्वक' और 'घसीटते हुए' उठाया गया, जिससे उन्हें नाक में चोट भी आई।
हिरासत में लिए जाते समय प्रियंका गांधी ने 'नरेन्द्र मोदी कायर हैं' का नारा भी लगाया।
हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी को मॉडल टाउन इलाके में छत्रसाल स्टेडियम ले जाया, जबकि पुलिस प्रियंका गांधी को मंदिर मार्ग थाने ले गई।
बाद में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी भी मंदिर मार्ग थाने पहुंचीं और प्रियंका गांधी से मुलाकात की।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दे रहे कांग्रेस और विपक्षी दलों के सांसदों को पुलिस ने ''घसीटकर'' हिरासत में लिया तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी बलपूर्वक वहां से ले जाया गया।
खरगे ने कहा कि ''तानाशाह सरकार डर कर कांप रही है'' और सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर करोड़ों बच्चों का भविष्य बिगाड़ दिया।
उन्होंने दावा किया कि 150 से अधिक पेपर लीक हुए और 25 बच्चों की जान चली गई और जब छात्र न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे तो उन पर लाठीचार्ज किया गया और डंडे बरसाए गए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि संसद के गेट बंद कर सांसदों को ''कैद'' किया गया, साझा विपक्ष की चर्चा की मांग नहीं मानी गई और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त नहीं किया गया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया, ''तानाशाही का दूसरा नाम अमितशाही है।''
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) की नेता सुप्रिया सुले भी इस धरना में शामिल हुए।
संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद राहुल गांधी, खरगे, प्रियंका गांधी और कई अन्य सांसद अचानक से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए '7 लोक कल्याण मार्ग' के निकट पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए।
धरने में शामिल नेताओं ने 'प्रधानमंत्री इस्तीफा दो', 'गुंडागर्दी नहीं चलेगी' तथा 'छात्रों को न्याय दो' जैसे नारे लगाए।
धरना शुरू होने के कुछ देर बाद ही लोकसभा सदस्य चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, शशिकांत सेंथिल और अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया।
धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने हाथों में 'हथकड़ियां' पहनकर छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का सांकेतिक विरोध किया।
इससे पहले, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और गृह सचिव गोविंद मोहन मौके पर पहुंचे तथा राहुल गांधी से धरना समाप्त करने का आग्रह किया।
इस मुलाकात के बाद सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी को नीट के मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए आश्वासन दिया गया, लेकिन फिर उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी रख दी।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का रवैया लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
सिंह के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार नीट और उससे जुड़े आंदोलन के सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार हो जाती है, तो वह धरना समाप्त कर देंगे।
उन्होंने दावा किया कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व से अनुमति लेने के बाद राहुल गांधी को यह आश्वासन दिया गया कि सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है।
सिंह ने आरोप लगाया कि इसके बाद राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी रख दी और कहा कि अब उनकी दो मांगें हैं।
सिंह ने कहा कि जब राहुल गांधी को याद दिलाया गया कि उन्होंने पहले केवल संसद में चर्चा की मांग की थी, तो उन्होंने जवाब दिया कि अब उनकी मांगें बदल गई हैं।
धरना शुरू होने के कुछ देर बाद राहुल गांधी ने छात्रों को न्याय दिलाने के इच्छुक लोगों से धरने में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है और सरकार को इस मामले में जवाबदेही लेनी चाहिए।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि सरकार न तो घटना की जवाबदेही लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर चर्चा की अनुमति दे रही है।
प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि विपक्ष सदन में इस मुद्दे पर चर्चा करना चाहता है, लेकिन उसे बोलने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
इससे पहले, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात की थी।
धरने में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, पवन खेड़ा और कई अन्य सांसद एवं नेता शामिल हुए।
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