व्यापार समझौतों के खिलाफ बुधवार को देशव्यापी प्रदर्शन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा
दिलीप
- 21 Jul 2026, 08:33 PM
- Updated: 08:33 PM
नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और अन्य व्यापार समझौतों के विरोध में बुधवार को देशव्यापी प्रदर्शन करने की घोषणा की है। साथ ही, उसने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर केंद्र सरकार को इन समझौतों पर हस्ताक्षर करने से रोकने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
किसान संगठन ने राष्ट्रपति को लिखे खुले पत्र में उनसे अनुरोध किया है कि वह ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने, पहले से किए गए सभी एफटीए निरस्त करने और देश की अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भरता तथा संप्रभुता पर इनके प्रभाव को लेकर संसद में चर्चा सुनिश्चित करने'' का निर्देश दें।
एसकेएम ने पत्र में दावा किया है, ''इन एफटीए पर गोपनीय तरीके से और कॉरपोरेट दबाव में वार्ता की गई और ये भारत के राष्ट्रीय हित के साथ गंभीर विश्वासघात है...यह आर्थिक उपनिवेशीकरण का खाका है।''
संगठन ने दावा किया कि इन समझौतों से करोड़ों छोटे और सीमांत किसान प्रभावित होंगे तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
संगठन का दावा है कि प्रस्तावित व्यापार समझौतों से अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के सदस्य देशों जैसे देशों के सब्सिडी वाले कृषि एवं औद्योगिक उत्पाद भारतीय बाजार में आएंगे, जिससे घरेलू उत्पादकों को नुकसान होगा।
एसकेएम ने यह भी मांग की कि एफटीए वार्ता से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और उन पर संसद में चर्चा हो। उसने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाले समझौतों को संसदीय पड़ताल के बिना अंतिम रूप नहीं दिया जाना चाहिए।
उसने यह भी आरोप लगाया कि इन समझौतों के कारण सब्सिडी वाले डेरी उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, खाद्य तेल और अन्य कृषि जिंस का आयात बढ़ सकता है, जिससे घरेलू कीमतें गिरेंगी और किसानों की आय प्रभावित होगी।
देशव्यापी कार्यक्रम की घोषणा करते हुए एसकेएम ने मंगलवार को कहा कि किसान 22 जुलाई को ''एफटीए के खिलाफ किसान संकल्प दिवस'' के रूप में मनाएंगे। उसने कहा कि इस दौरान गांवों में जनसभाएं आयोजित की जाएंगी और किसान 2020-21 के आंदोलन की तर्ज पर इन समझौतों को निरस्त किए जाने तक देशव्यापी आंदोलन जारी रखने का संकल्प लेंगे।
किसान संगठनों के इस संयुक्त मंच ने सोमवार को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की भी निंदा की तथा घोषणा की कि किसान 22 जुलाई को विरोध स्वरूप प्रधानमंत्री मोदी के पुतले फूंकेंगे।
एसकेएम ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने और परीक्षा संबंधी समस्याओं के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग का भी समर्थन किया।
एसकेएम ने कहा कि राज्य समन्वय समितियों और उसके घटक संगठनों ने देशव्यापी अभियान के तहत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सांसदों के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करने, प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले फूंकने तथा दोपहर 12 बजे से अपराह्न तीन बजे तक टोल प्लाजा को शुल्क-मुक्त रखने की योजना बनाई है।
भाषा अमित दिलीप
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