जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए राज्य का दर्जा बहाल होना जरूरी: उमर अब्दुल्ला
सुरेश
- 21 Jul 2026, 10:09 PM
- Updated: 10:09 PM
श्रीनगर, 21 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करना क्षेत्र के संवैधानिक अधिकारों की पुनर्बहाली का बुनियादी आधार है।
उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली में नेशनल कॉन्फ्रेंस के विरोध-प्रदर्शन में शामिल नहीं होने को लेकर राजनीतिक विरोधियों पर तीखा हमला बोला और इस आरोप को भी खारिज किया कि उन्होंने कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश की थी।
जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा सोमवार को आयोजित विरोध-प्रदर्शन के एक दिन बाद यहां संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने आंदोलन से दूर रहने और इस पहल की सोशल मीडिया पर आलोचना करने के लिए विपक्षी दलों पर निशाना साधा।
जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए अब्दुल्ला ने अपनी शुरुआती टिप्पणी में कहा, ''जैसा कि कहा गया है, 'गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले'।''
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का नाम लिये बिना उन्होंने अतीत की राजनीतिक घटनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पहले भी राजनीतिक जोड़-तोड़ के जरिये राज्य विधानसभा के जनादेश को कमजोर किया गया और वर्ष 2000 में एक राजनीतिक दल के उभरने का उद्देश्य भी आंतरिक स्वायत्तता की कोशिशों को कमजोर करना था।
उन्होंने कहा, ''वर्ष 2000 में अस्तित्व में आया दल आज भी यहां के लोगों की आवाज को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है...और आज हम फिर वैसी ही स्थिति देख रहे हैं।''
अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष के रूप में मीडिया से बात कर रहे हैं।
राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन में शामिल नहीं होने पर क्षेत्रीय दलों पर निशाना साधते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि वे ''भाजपा और केंद्र सरकार को नाराज नहीं करना चाहते थे''।
उन्होंने कहा, ''वे अपने घरों में बैठे रहे और केवल ट्वीट करते रहे। बाहर बारिश हो रही थी और वे रजाई ओढ़कर सोशल मीडिया के जरिये अपना अभियान चलाते रहे।''
उन्होंने कहा, ''जम्मू-कश्मीर के लोग अब समझ चुके हैं कि कौन लोग सड़कों पर उतरे, जनता के अधिकारों, उनके सम्मान की बहाली और जम्मू-कश्मीर के हित के लिए लड़ने और संघर्ष करने को तैयार हैं और कौन लोग केवल अपने मोबाइल फोन के जरिये राजनीति कर रहे हैं।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में हुआ विरोध-प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों के लिए खुला निमंत्रण था, क्योंकि राज्य का दर्जा बहाल कराना किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का साझा मुद्दा है।
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर सोमवार को दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती के कारण पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन स्थल की ओर जाने से रोक दिया था।
विपक्ष की आलोचना पर निराशा जताते हुए उन्होंने कहा कि लोगों के साझा अधिकारों के लिए एकजुट होने के बजाय उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे संबंधी नेशनल कॉन्फ्रेंस के रुख का मखौल उड़ाने और उसपर सवाल उठाने में लगे रहे।
उन्होंने कहा, ''मुझे निश्चित रूप से इस बात का दुख है कि जो लोग खुद को जम्मू-कश्मीर के लोगों का शुभचिंतक बताते हैं, वे ऐसे मौकों पर अपनी सहानुभूति भूल जाते हैं। और फिर कहते हैं कि पहले जाइए और अनुच्छेद 370 की बात कीजिए।''
राजनीतिक विरोधियों द्वारा राज्य का दर्जा बहाल करने से पहले अनुच्छेद 370 को तत्काल बहाल करने की मांग पर प्रतिक्रिया जताते हुए अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि पूर्ण अधिकारों वाले राज्य के बिना ऐसी मांग का व्यावहारिक औचित्य क्या है।
उन्होंने कहा, ''मैं उनसे, खासकर उनमें जो खुद को पढ़ा-लिखा बताते हैं, पूछना चाहता हूं कि राज्य का दर्जा नहीं होगा तो अनुच्छेद 370 का क्या मतलब रह जाएगा? राज्य का दर्जा नहीं होगा तो अनुच्छेद 371 का क्या अर्थ होगा?''
उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस उस सरकार से, जिसने विशेष दर्जा समाप्त किया था, उसी से उसकी बहाली के झूठे सपने दिखाकर लोगों को गुमराह करने में विश्वास नहीं करती।
उन्होंने कहा कि विशेष दर्जा यह तय करता है कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच शक्तियों का बंटवारा किस प्रकार होगा।
उन्होंने कहा, ''जम्मू-कश्मीर को जो भी विशेष दर्जा मिले, चाहे वह अनुच्छेद 370 के तहत हो या किसी अन्य व्यवस्था के तहत, मूल सवाल केंद्र और जम्मू-कश्मीर के बीच शक्तियों के बंटवारे का है। केंद्र और किसी केंद्र शासित प्रदेश के बीच शक्तियों का बंटवारा नहीं हो सकता, क्योंकि किसी केंद्र शासित प्रदेश के पास अपने अधिकार नहीं होते। केंद्र शासित प्रदेश की सभी शक्तियां या तो केंद्र सरकार के पास होती हैं या फिर लोक भवन के पास। मंत्रिमंडल के सभी फैसले पहले उपराज्यपाल भवन भेजे जाते हैं।''
अब्दुल्ला ने कहा कि विशेष दर्जे की बहाली के लिए राज्य का दर्जा ही महत्वपूर्ण आधार है।
अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी विशेष दर्जे के मुद्दे को भूली नहीं है।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने विधानसभा के पहले दिन विशेष दर्जे से संबंधित प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने कहा, ''वह प्रस्ताव अब भी कायम है। उस प्रस्ताव पर चर्चा तभी हो सकती है, जब हमें राज्य का दर्जा वापस मिल जाएगा।''
उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों को यह भरोसा भी दिलाया कि उनकी पार्टी अपने किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''मैं अपने लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि हम अपने वादों पर कायम हैं और आगे भी अडिग रहेंगे। पार्टी नेतृत्व जल्द ही नई रणनीति और कार्यक्रम तय करेगा।''
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उल्लेख करते हुए हाल में दिए गए अपने बयान से पीछे हटने के आरोपों को खारिज करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी टिप्पणी जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता को दिया गया ''व्यंग्यात्मक राजनीतिक जवाब'' थी। उन्होंने कहा कि इसका अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की अपील करने या नीति में किसी बदलाव से कोई आशय नहीं था।
उन्होंने कहा, ''मैं अपने किसी बयान से पीछे नहीं हटा हूं। मुझे किसी पत्रकार का अपना एजेंडा चलाने से कोई आपत्ति नहीं है। मेरी आपत्ति तब होती है, जब कोई अखबार तथ्यात्मक रूप से गलत संपादकीय लिखता है। ऐसे में एक व्यक्ति के तौर पर मुझे तथ्यों को स्पष्ट करने का अधिकार है।''
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ट्रंप का उल्लेख उन्होंने तब किया था, जब विपक्षी नेता ने यह दलील दी थी कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करके जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा नहीं मिल सकता।
अब्दुल्ला ने कहा, ''वह विपक्ष की टिप्पणी का व्यंग्यात्मक राजनीतिक जवाब था, कोई नीतिगत रुख नहीं और निश्चित रूप से बाहरी हस्तक्षेप की अपील भी नहीं।''
उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है और इस धारणा को सिरे से खारिज किया कि उन्होंने इस मुद्दे पर किसी विदेशी दखल की मांग की थी।
उन्होंने कहा, ''तथ्य बिल्कुल स्पष्ट हैं। मैंने कभी कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण नहीं किया और न ही मिस्टर ट्रंप से हमें राज्य का दर्जा दिलाने के लिए कहा।'' उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का राज्य का दर्जा बहाल कराने का संघर्ष देश के संवैधानिक ढांचे के भीतर ही जारी रहेगा।
दिल्ली में हुए उस विरोध-प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए, जिसमें पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (90) समेत नेशनल कान्फ्रेंस के नेताओं ने पुलिस बैरिकेड और अन्य बाधाओं के बावजूद मार्च किया, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह धरना एक लंबे राजनीतिक अभियान का पहला चरण भर है।
उन्होंने कहा, ''यह शुरुआत है, अंत नहीं।'' मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में पार्टी जल्द ही जम्मू और कश्मीर दोनों संभागों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी में भी अपने अगले संगठनात्मक और जनसंपर्क कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेगी।
भाषा अमित सुरेश
सुरेश
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