उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता पर हमला: उच्च न्यायालय ने शाम सात बजे की सुनवाई,इसे न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप बताया
रंजन
- 22 Jul 2026, 11:36 PM
- Updated: 11:36 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) एक अहम घटनाक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एक सनसनीखेज मामले में शाम सात बजे आपात सुनवाई की। इस मामले में लखनऊ जिला अदालत के एक बार नेता पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली के वकीलों और उनके मुवक्किल के साथ स्थानीय अदालत के अंदर मारपीट की।
उच्च न्यायालय ने इस घटना को न्याय प्रक्रिया में 'सीधा दखल' बताया।
दिलचस्प बात यह है कि इस मामले का संज्ञान तब लिया गया जब प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने अधिवक्ता अभिप्सा मोहंती को भरोसा दिलाया कि वह खुद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजन रॉय तक यह बात पहुंचाएंगे।
प्रधान न्यायाधीश ने मंगलवार को कहा, ''मैं उनसे (इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति राजन रॉय, जो लखनऊ की जिला अदालतों के प्रशासनिक न्यायाधीश भी हैं) भी बात करूंगा।''
मोहंती ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के आखिर में इस घटना का जिक्र किया था। उच्च न्यायालय ने तुरंत कार्रवाई की और उसी दिन शाम सात बजे पीठ ने सुनवाई शुरू की।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने अपने 10 पन्नों के आदेश में कहा, ''हम इस चरण में अधिक कुछ नहीं कहेंगे, सिवाय इसके कि अगर यह घटना (जैसा कि आरोप है) हुई है (और हमारे सामने दिखाए गए वीडियो और वकीलों के बयानों के आधार पर प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि यह घटना हुई है), तो यह बहुत गंभीर मामला है।''
पीठ ने कहा, ''इस मामले में न केवल आरोपी व्यक्तियों द्वारा अपराध किया जाना शामिल है, बल्कि न्याय प्रक्रिया में दखल भी शामिल है।''
इसमें कहा गया है कि अर्जी के मुताबिक, वकील-आवेदकों और वादी (उनके मुवक्किल) को गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी गई और एक वकील के खिलाफ केस करने और पेश होने की कोशिश करने पर उनके साथ मारपीट भी की गई।
मोहंती की अर्जी के मुताबिक, वह प्रॉपर्टी से जुड़े एक केस (मोहम्मद शाकिर बनाम सौरभ वर्मा) के सिलसिले में 'वकालतनामा' (कानूनी अधिकार-पत्र) दाखिल करने के लिए अपने दो साथियों (वकील आशुतोष श्रीवास्तव और कोमल अग्रवाल) और मुवक्किल मोहम्मद शाकिर के साथ अदालत परिसर में मौजूद थीं, तथी स्थानीय वकील सौरभ कुमार वर्मा और उनके साथियों ने कथित तौर पर उन्हें रोका, उनके साथ बदसलूकी की और मारपीट की।
पीठ ने कहा, ''लखनऊ के वकील और स्थायी निवासी आशुतोष श्रीवास्तव ने जानकारी दी है कि सौरभ कुमार वर्मा के खिलाफ कम से कम तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। सौरभ कुमार वर्मा सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ के पदाधिकारी मालूम होते हैं।''
पीठ ने कई निर्देश जारी किए जिनमें लखनऊ पुलिस कमिश्नर को निर्देश देना भी शामिल है कि वे पुलिस के संयुक्त आयुक्त की अध्यक्षता वाले प्रकोष्ठ से सौरभ कुमार वर्मा, अभय प्रताप वर्मा, हर्षित पांडे वगैरह, या किसी अन्य वकील या व्यक्ति के पिछले रिकॉर्ड के बारे में जानकारी एकत्र करें जो आज हुई घटना में शामिल हो सकते हैं।
भाषा संतोष रंजन
रंजन
2207 2336 दिल्ली