राज्यसभा में उठी ई-रिक्शा के नियमन की मांग
मनीषा अविनाश
- 02 Apr 2025, 01:32 PM
- Updated: 01:32 PM
नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) सदस्य स्वाति मालीवाल ने ई-रिक्शा के नियमन की मांग करते हुए कहा कि कभी परिवहन का किफायती और पर्यावरण अनुकूल माध्यम रहा ई-रिक्शा आज कई समस्याओं का कारण बन रहा है।
शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए मालीवाल ने कहा कि देश में ऑटो रिक्शा, टैक्सी एवं कैब के लिए नियम हैं लेकिन ई-रिक्शा के लिए ऐसे नियम नहीं होने की वजह से आज परिवहन का यह माध्यम अराजक स्थिति उत्पन्न कर रहा है।
उन्होंने कहा ‘‘मेट्रो स्टेशन, बाजारों के आसपास ई-रिक्शा बड़ी संख्या में खड़े होते हैं जिसके कारण रास्ता घिर जाता है और आवागमन प्रभावित होता है। एक ई-रिक्शा में तीन से चार लोग बैठ सकते हैं लेकिन इसमें आठ से दस लोग बैठते हैं और वह भी व्यस्त समय में। इसका ढांचा ऐसा होता है कि मामूली दुर्घटना में यह पलट जाता है।’’
मालीवाल ने दावा किया कि ई-रिक्शा चालक न तो प्रशिक्षित होते हैं, न ही उनके पास लाइसेंस होता है और न ही कोई पंजीकरण व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा चालक तेज गति से, गलत दिशा में वाहन चलाते हैं, रेड लाइन का उल्लंघन करते हैं।
उन्होंने कहा कि एक माह पहले करीब दस साल की एक बच्ची की ई-रिक्शा से टक्कर लगने के कारण मौत हो गई थी और पिछले दिनों ही सात साल के बच्चे ने ई-रिक्शा के चार्जिंग प्वाइंट से करंट लगने के कारण अपनी जान गंवा दी।
मालीवाल ने मांग की कि ई-रिक्शा की संख्या सीमित की जाए, वाहनों और उनके चालकों के लिए नियम बनाए जाएं, और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि इनका रूट तय होना चाहिए, वहीं राज्य सरकारों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा ‘‘ हमें सुविधा चाहिए लेकिन सिस्टम के साथ, रफ्तार चाहिए लेकिन जिम्मेदारी के साथ। हमें प्रगति चाहिए लेकिन किसी की जिंदगी की कीमत पर नहीं।’’
कांग्रेस के नीरज डांगी ने शून्यकाल में सरकार से मेडिकल बीमा पर से 18 फीसदी जीएसटी हटाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य बिल बढ़ता जाता है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वरिष्ठ नागरिकों का स्वास्थ्य बिल कम करने के लिए कई कदम उठा सकती है, बीमा में ‘एफडीआई’ बढ़ाया जा सकता है, आवश्यक दवाओं की कीमत कम की जा सकती है, मेडिकल बीमा पर से 18 फीसदी जीएसटी हटा कर पांच फीसदी किया जा सकता है।
डांगी ने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत योजना में आयुसीमा घटा कर 60 साल की जानी चाहिए।
इस योजना के तहत 70 साल और अधिक उम्र के लोगों को पांच लाख रुपये तक का सालाना मुफ्त इलाज का प्रावधान है। डांगी ने कहा ‘‘इसमें 60 साल और इससे अधिक उम्र के लोगों को शामिल किया जाना चाहिए।’’
बीआरएस सदस्य केआर सुरेश रेड्डी ने हैदराबाद विश्वविद्यालय की 400 एकड़ भूमि कथित तौर पर बेचे जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह भूमि वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए बेची जा रही है और राज्य सरकार के इस कदम से पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो सकता है।
उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय के छात्र राज्य सरकार के इस कदम का विरोध कर रहे हैं और प्रशासन ने उन पर लाठी चार्ज किया है।
रेड्डी ने कहा ‘‘पहली बार देश में ऐसा हो रहा कि छात्र पर्यावरण के लिए आवाज उठा रहे और सरकार उनका दमन कर रही है।’’
तृणमूल कांग्रेस के रीताव्रता बनर्जी ने भविष्यनिधि चूककर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए दावा किया कि निजी क्षेत्र में बड़ी संख्या में कर्मचारी का पीएफ काटा तो जाता है लेकिन जमा नहीं किया जाता।
उन्होंने कहा कि हल्दिया बंदरगाह पर भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के साथ धोखा हुआ और पश्चिम बंगाल सरकार ने पत्र भी लिखा लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
भाजपा की दर्शना सिंह ने स्कूलों में प्राथमिक उपचार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अक्सर स्कूलों में दुर्घटनाएं हो जाती हैं और इन आपात स्थितियों में सही समय पर दिया गया प्राथमिक उपचार जीवन बचा सकता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि स्कूलों में शिक्षकों और बच्चों दोनों को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा ‘‘शिक्षकों और विद्यार्थियों को जानवरों के काटने पर उपचार से लेकर सीपीआर देने तक की जानकारी दी जानी चाहिए ताकि जरूरत पर यह प्रशिक्षण काम आ सके। हर स्कूल में प्राथमिक उपचार किट होना चाहिए और समय-समय पर डाक्टर और विशेषज्ञ कार्यशालाएं भी आयोजित करें।’’
माकपा के वी शिवदासान ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) से संबद्ध कर्मियों का वेतन बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद ‘समान काम समान वेतन’ नियम पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एनआरएचएम से संबंद्ध कर्मियों के संदर्भ में अक्सर नियमों का पालन नहीं किया जाता है और कई बार तो पैरामेडिक्स को वेतन समय पर नहीं मिलता।
उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र पर खर्च बढ़ाए और राज्यों को पर्याप्त धन दे।
समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन ने कहा कि किसानों की कई मांगें हैं और उनका आंदोलन लंबे समय से जारी है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मांग ‘‘न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की है।’’
उन्होंने कहा कि एमएसपी तय करने वाली समिति में न तो किसान हैं और न ही कृषि विशेषज्ञ हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का हल तब तक नहीं होगा तब तक एमएसपी की कानूनी गारंटी नहीं मिल जाती।
भाजपा के धैर्यशील मोहन पाटिल ने कहा कि कोंकण का हापुस आम खास होता है लेकिन इन दिनों बाजार में आम की दूसरी किस्मों को भी कोंकण का हापुस आम कह कर बेचा जा रहा है।
उनहोंने कहा ‘‘आज बाजार में जितना हापुस आम आता है उससे तीन गुना अधिक दूसरी किस्म के आम को हापुस बता कर बेचा जाता है। अगर यही हाल रहा तो हापुस की विरासत कुछ दिन में खत्म हो जाएगी।’’
पाटिल ने मांग की कि कोंकण के बाहर से आने वाले तथाकथित हापुस आम को हापुस न माना जाए, इसे गैरकानूनी माना जाए और ऐसा करने वालों को दंडित किया जाए।
भाजपा के ही मयंककुमार नायक ने मेहसाणा को उड़ान योजना के तहत मुंबई से जोड़ने की मांग की।
भाषा
मनीषा